विपक्ष के निशाने पर आया संघ, कांग्रेस और सीजेपी ने उठाए सवाल

- संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी निकाय जांच से ऊपर नहीं है : प्रियांक खरगे
- आर्थिक मामलों और आय के स्रोतों की जानकारी देना जरूरी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एकबार फिर आरएसएस पूरे देश विरोध होने लगा है। नई -नई बनी पार्टी सीजेपी से लेकर सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने उस पर हमला बोला है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खडग़े ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण और फंडिंग स्रोतों की जानकारी मांगी है। खरगे ने तर्क दिया है कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी निकाय जांच से ऊपर नहीं है और आरएसएस जैसे बड़े संगठन से पारदर्शिता व जवाबदेही की उम्मीद की जाती है, जो उसकी राज्यव्यापी व्यापक उपस्थिति को देखते हुए आवश्यक है।
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संगठन, चाहे वह कितना भी पुराना, बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो, जांच-पड़ताल से ऊपर नहीं हो सकता। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हर नागरिक, संगठन, संस्थान और निकाय से कानून का पालन करने की उम्मीद की जाती है। खरगे ने लिखा कि इसी बड़े पैमाने, प्रभाव और पहुंच की वजह से संघ से पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक नियमों के पालन के मामले में सबसे ऊंचे मानकों की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आरएसएस अपने अधिकृत पदाधिकारियों को भेजकर यह बताए कि इतने बड़े पैमाने का संगठन किन कानूनी आधारों पर बिना किसी पहचान के और लागू कानूनों के तहत कानूनी इकाई या व्यक्तियों के समूह के तौर पर औपचारिक रूप से रजिस्टर हुए बिना काम करता रहता है।
कर्नाटक के गृह मंत्री ने संघ प्रमुख को लिखा पत्र
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खडग़े ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन से उसकी कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग के स्रोतों और खर्चों जैसी जानकारी स्पष्ट करने को कहा। भागवत को लिखे दो पन्नों के पत्र में खडग़े ने बताया कि कर्नाटक में आरएसएस की बड़ी मौजूदगी है, राज्य भर में इसकी 6० हजार से ज़्यादा शाखाएं और उससे जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इतना बड़ा संगठन कानूनी निगरानी से बाहर नहीं रह सकता। पत्र में कहा गया है कि भारत में, सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एक सफाई कर्मचारी का भी रजिस्टर होना ज़रूरी है। हर धार्मिक संस्थान और धार्मिक ट्रस्ट का ऑडिट होता है। चैरिटेबल संस्थाओं,एनजीओ, ट्रस्ट, सोसायटियों, कंपनियों और दूसरे संस्थानों के लिए अपने ढांचे, गतिविधियों, आर्थिक मामलों और आय के स्रोतों की जानकारी देना ज़रूरी है। यह मांग उस समय की पहली बड़ी कानूनी पहल है जब से खरगे ने पिछले साल सार्वजनिक रूप से बीजेपी की वैचारिक मूल संस्था (आरएसएस) के खिलाफ मोर्चा संभाला है।<
मुझ पर हुए हमले के पीछे आरएसएस के लोग थे : अभिजीत
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि जयपुर में उन पर हुए हमले के पीछे आरएसएस के कुछ लोग शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि यह हमला नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पेपर लीक जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है। सीजेपी द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संविधान चौक पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। इससे पहले जयपुर में सोमवार को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दो लोगों ने दीपके के साथ कथित तौर पर मारपीट की। यह पूछे जाने पर कि वह इस हमले के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं, दीपके ने आरोप लगाया, ‘‘वहां आरएसएस के कुछ लोग थे और इसमें कोई नयी बात नहीं है।’’ उन्होंने दावा किया कि जब भी कोई सरकार या उसकी विचारधारा के खिलाफ बोलता है तो इस तरह की घटनाएं होती हैं। आरएसएस से संबंध होने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के दावों के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने कहा, ‘‘तो क्या इसीलिए उन्होंने कल मुझ पर हमला किया?’’ उन्होंने दोहराया कि उन पर हमला असली मुद्दे से ध्यान भटकाने और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास था।दीपके ने कहा, ‘‘हम अपने मुद्दों से नहीं भटकेंगे। जितना चाहो हम पर हमला कर लो। हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे और अपने मुख्य मुद्दे से नहीं हटेंगे, जो एक करोड़ से अधिक छात्रों के साथ हो रहे अन्याय से जुड़ा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के हमले होते रहेंगे, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं। हम महात्मा गांधी और आंबेडकर के मार्ग पर चलते हैं। यह हमारा सत्याग्रह है और हम शांतिपूर्वक आगे बढ़ते रहेंगे।’’



