बंगाल के राज्यपाल के इस्तीफे पर सियासी बवाल
नए राज्यपाल निश्चित रूप से रूकावटें पैदा करेंगे : जयराम

- विपक्षी दलों ने कें द्र सरकार के इस फैसले पर जताई हैरानी
- अलोकतांत्रिक कार्यशैली का परिचय दे रही मोदी सरकार : कांग्रेस
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा अचानक दिये गए इस्तीफे पर सियासी बवाल मच गया। सपा, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों बीजेपी की कें द्र सरकार के इस फैसले पर हैरानी जताई है। कांग्रेस ने कहा कि पिछले साल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से ‘बिना किसी कारण के हटा’ दिया गया था। कांग्रेस ने कड़ी हैरानी जताई है और केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे अलोकतांत्रिक कार्यशैली का हिस्सा बताया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले बृहस्पतिवार को राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा अचानक दिये गए इस्तीफे पर कांग्रेस ने हैरानी जताई और कहा कि पिछले साल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से ‘‘बिना किसी कारण के हटा’’ दिया गया था और कोलकाता के लोक भवन में उनके उत्तराधिकारी (बोस) के साथ भी ‘‘इसी तरह का व्यवहार’’ किया गया है। विपक्षी दल ने यह भी कहा कि अब आर एन रवि को बंगाल भेज दिया गया है, ऐसे में ‘‘वहां उनके द्वारा रुकावटें पैदा करना तय है।’’ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पहले जगदीप धनखड़ को 21 जुलाई 2025 को भारत के उपराष्ट्रपति पद से अचानक हटा दिया गया। कोलकाता के लोक भवन में उनके उत्तराधिकारी सी.वी. आनंद बोस के साथ आज ऐसा ही व्यवहार किया गया। आखिर ये हो क्या रहा है?’’ रमेश ने एक अन्य पोस्ट में कहा, आर एन रवि, मोदी की ‘व्यवस्था’ का अभिन्न अंग हैं। हालांकि, उनकी कार्यशैली के कारण उन्हें नगालैंड से हटना पड़ा था।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वह (रवि) तमिलनाडु भेजे गए, जहां उन्होंने घोर बदनामी बटोरी। अब उन्हें पश्चिम बंगाल भेज दिया गया है, जहां वह निश्चित रूप से रूकावटें पैदा करेंगे।
चुने हुए मुख्यमंत्री से सलाह किए बिना गवर्नर को हटाना गंभीर : फखरुल
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा,जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने बिना सोचे-समझे और चुने हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सलाह किए बिना गवर्नर को हटाया, उससे गंभीर सवाल उठते हैं। यही मुद्दा ममता बनर्जी उठा रही हैं। इस बात की भी चिंता है कि जिन राज्यों में गैर-बीजेपी सरकारें हैं, वहां बीजेपी गवर्नर के जरिए उन सरकारों के काम में दखल दे रही है। इसलिए, समाजवादी पार्टी का मानना है कि ममता बनर्जी की चिंताएं जायज हैं।
राज्यपाल के पद पर पर्याप्त समय बिताया : सी. वी. आनंद
राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस इस्तीफे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने राज्यपाल के पद पर पर्याप्त समय बिताया है। बता दें कि सी. वी. आनंद बोस को नवंबर 2022 में केंद्र सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और तब से वह इस पद पर कार्य कर रहे थे।
आर. एन. रवि होंगे नए राज्यपाल
राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के इस्तीफे और आर. एन. रवि की संभावित नियुक्ति ने पश्चिम बंगाल में केंद्र-राज्य के बीच टकराव को एक नया मोड़ दिया है। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोडक़र देखा जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नए विवाद की नींव पड़ गई है।
राज्यपाल आनंद पर दबाव डाला गया : ममता बनर्जी
इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि आर. एन. रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है।ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से वह हैरान और चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस्तीफे के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन पर कुछ दबाव डाला गया हो। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर किसी राजनीतिक उद्देश्य से चुनाव से पहले ऐसा कदम उठाया गया है तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति के बारे में उन्हें पहले से कोई औपचारिक परामर्श नहीं दिया गया।ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि इस तरह के फैसले सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर कर सकते हैं और इससे राज्यों की गरिमा पर असर पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।



