महाराष्ट्र में फिर सियासत गरमाई

टीपू सुल्तान व शिवाजी पर कोहराम

  • सामना के लेख के माध्यम से शिवसेना यूबिटी ने भाजपा व कांग्रेस को घेरा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र में एकबार फिर राजनीतिक हवाएं इस समय टीपू सुल्तान व शिवाजी के इर्द-गिर्द घूमने लगीं है । शिवसेना यूबिटी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लेख से टीपू सुल्तान को लेकर छिड़े विवाद पर बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस को भी घेर लिया है। मामला मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरू हुआ, जिसके बाद बयानबाजी तेज हो गई। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर के विवाद को और गरमाया दिया है।
संपादकीय में लिखा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह मैसूर के टीपू सुल्तान को फिर से कब्र से बाहर निकाला जा रहा है. मालेगांव के ‘शान-ए-हिंद’ हॉल में तस्वीर लगाए जाने पर विवाद खड़ा हुआ, हालांकि बाद में तस्वीर हटा दी गई. इसके बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। सामना ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग दिया। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के उस बयान की भी आलोचना की गई, जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी। संपादकीय में कहा गया कि यह तुलना असंगत और अनुचित है।(संपादकीय में टीपू सुल्तान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा गया, टीपू सुल्तान कौन था, वह क्या था? इस इतिहास पर चर्चा करने का कोई फायदा नहीं, वह मैसूर का राजा था, उसके पिता हैदर अली भी राजा थे। उसने अंग्रेजों से युद्ध किया। वह एक योद्धा था, लेकिन वह अपने राज्य और साम्राज्य को बचाने के लिए युद्ध लड़ रहा था। छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे नहीं थे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगल आक्रमण को रोकने के लिए हिंदवी स्वराज की शून्य से स्थापना की। उन्होंने अपना राज बनाया टीपू को यह राज्य विरासत में मिला, छत्रपति ने स्वराज के शत्रुओं को इसी मिट्टी में दफना दिया, 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में उनकी मृत्यु हुइ। कुछ इतिहासकार उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला पहला स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं।

टीपू को लेकर इतना अक्रोश है तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट पर चुप्पी क्यों

संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा गया, उन्होंने कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। साथ ही सामना ने सवाल उठाया कि अगर टीपू को लेकर इतना अक्रोश है तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच पर चुप्पी क्यों है. लेख में बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि यह सच है कि भाजपा के लोग टीपू सुल्तान के नाम से अपनी सहूलियत के अनुसार खुश या नाराज होते हैं। इसी टीपू सुल्तान को पाकिस्तान में ‘नायक’ माना जाता है और उसी पाकिस्तान के साथ भारत क्रिकेट मैच खेल रहा है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि फडणवीस व बीजेपी को यह निंदनीय नहीं लगता।

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