पाटीदार आंदोलन पर फिर गरमाई सियासत, पूर्व डिप्टी CM ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल

पाटीदार आंदोलन को लेकर गुजरात की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है... पूर्व डिप्टी CM ने अपनी ही सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर पाटीदार आरक्षण आंदोलन चर्चा के केंद्र में है.. करीब एक दशक पहले, वर्ष 2015 में हुए इस आंदोलन की यादें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं.. अब गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने उस दौर की पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है.. उन्होंने पूछा है कि पाटीदार आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज.. और फायरिंग का आदेश आखिर किसने दिया था.. उनके इस बयान ने एक बार फिर पुराने विवाद को नई बहस का विषय बना दिया है..

पाटीदार समुदाय गुजरात का सबसे प्रभावशाली सामाजिक और आर्थिक वर्ग माना जाता है.. कृषि, व्यापार और उद्योग में इस समुदाय की मजबूत भागीदारी रही है.. इसके बावजूद वर्ष 2015 में बड़ी संख्या में पाटीदार युवाओं ने शिक्षा.. और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया.. युवा नेता हार्दिक पटेल के नेतृत्व में यह आंदोलन तेजी से पूरे राज्य में फैल गया.. शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन बाद में कई स्थानों पर हिंसा भड़क गई.. पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और फायरिंग का सहारा लिया.. जिसमें कई लोग घायल हुए.. और कुछ लोगों की मौत भी हुई.. अब लगभग दस साल बाद नितिन पटेल द्वारा उठाए गए सवालों ने उस पूरे घटनाक्रम को फिर से सुर्खियों में ला दिया है..

हाल ही में नितिन पटेल ने कहा कि 25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में आयोजित विशाल पाटीदार रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण थी.. उनके अनुसार रैली समाप्त होने के बाद अधिकांश लोग अपने-अपने घर लौट चुके थे.. इसके बाद अफवाहें फैलने लगीं कि पुलिस ने मंच पर तोड़फोड़ की.. और प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं.. इन खबरों के बाद हालात अचानक बिगड़ गए.. और कई इलाकों में तनाव फैल गया.. बाद में पुलिस ने बल प्रयोग किया.. जिसमें फायरिंग भी शामिल थी..

नितिन पटेल का आरोप है कि जिन लोगों का आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं था.. उन्हें भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा.. उन्होंने कहा कि कई निर्दोष पाटीदार परिवारों को बिना किसी कारण परेशान किया गया.. उनके अनुसार पुलिस अहमदाबाद और मेहसाणा की कई रिहायशी सोसायटियों में दाखिल हुई.. घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया.. और लोगों के साथ सख्ती बरती गई.. उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाटीदारों पर लाठीचार्ज.. और फायरिंग का आदेश आखिर किस स्तर से दिया गया था.. उनका कहना है कि आज तक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिला है..

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने उस समय की परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि.. हिंसा फैलने के बाद कई वरिष्ठ नेता तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के सरकारी आवास पहुंचे थे.. उनके अनुसार, आनंदीबेन पटेल घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित थीं.. नितिन पटेल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री को भी इस पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं थी.. और उन्हें यह नहीं बताया गया था कि बल प्रयोग किसके निर्देश पर किया गया.. उन्होंने यह भी बताया कि जब मेहसाणा में पुलिस कार्रवाई चल रही थी.. तब उन्होंने वहां के तत्कालीन डीएसपी हसमुख पटेल को फोन कर स्थिति की जानकारी लेने और कार्रवाई रोकने की कोशिश की थी.. हालांकि उनके हस्तक्षेप का कोई प्रभाव नहीं पड़ा.. बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री से भी पुलिस को सख्त निर्देश देने की अपील की.. नितिन पटेल का कहना है कि उस समय सरकार के भीतर भी कई सवाल थे.. लेकिन उनका कभी संतोषजनक जवाब नहीं मिला..

आपको बता दें कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी.. हार्दिक पटेल ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति का गठन किया.. और पाटीदार समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने की मांग उठाई.. पाटीदार समुदाय गुजरात की आबादी का लगभग 15 प्रतिशत माना जाता है.. आंदोलन से जुड़े लोगों का तर्क था कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण युवाओं के लिए अवसर कम हो रहे हैं.. बेरोजगारी और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता ने इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया..

25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में विशाल जनसभा आयोजित की गई.. जिसमें लाखों लोग शामिल हुए.. शुरुआत में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.. लेकिन बाद में हालात अचानक बिगड़ गए.. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ.. इसके बाद लाठीचार्ज, आंसू गैस और फायरिंग की घटनाएं सामने आईं.. देखते ही देखते हिंसा गुजरात के कई हिस्सों में फैल गई.. मेहसाणा, विसनगर, ऊंझा और अन्य इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा.. कई स्थानों पर सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा.. इस पूरे घटनाक्रम में कई लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग घायल हुए..

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार को सेना की मदद भी लेनी पड़ी.. तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने घटना पर दुख व्यक्त किया.. और जांच के आदेश दिए.. हालांकि आंदोलन ने गुजरात की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया.. यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं रह गया था.. बल्कि युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, अवसरों की कमी और सामाजिक असंतोष का प्रतीक बन गया था.. उस समय नितिन पटेल राज्य सरकार का अहम हिस्सा थे.. उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की और हालात सामान्य बनाने की कोशिश की.. बाद में आंदोलन से जुड़े कई मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू हुई.. लेकिन अब लगभग दस साल बाद उनका यह कहना कि उस समय निर्दोष लोगों के साथ अत्याचार हुआ था.. राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है..

नितिन पटेल स्वयं पाटीदार समुदाय से आते हैं.. और लंबे समय तक गुजरात की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं.. इसलिए उनका यह बयान सिर्फ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं माना जा रहा.. बल्कि इसे पार्टी और सरकार के अंदरूनी घटनाक्रम से जोड़कर भी देखा जा रहा है.. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ.. उसे स्वीकार करना चाहिए और यदि कहीं गलतियां हुई थीं.. तो उन्हें सामने लाना चाहिए.. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई निर्दोष लोगों को केवल पाटीदार होने के कारण परेशान किया गया.. उनके अनुसार कई घरों में पुलिस दाखिल हुई.. वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया.. और लोगों के साथ कठोर व्यवहार किया गया.. उनका कहना है कि यदि उस समय किसी स्तर पर गलत निर्णय लिया गया था.. तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए..

 

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