चार वर्षों से बंद शौचालय पर जनता का फूटा गुस्सा, अतिक्रमण हटाकर संचालन शुरू करने की मांग
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नगर पंचायत बड़हलगंज के वार्ड संख्या-7 मुक्तिपथ नगर स्थित सामुदायिक शौचालय पिछले चार वर्षों से बंद होने के विरोध में रविवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नगर पंचायत बड़हलगंज के वार्ड संख्या-7 मुक्तिपथ नगर स्थित सामुदायिक शौचालय पिछले चार वर्षों से बंद होने के विरोध में रविवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया।
बड़ी संख्या में नागरिकों ने शौचालय परिसर के बाहर प्रदर्शन करते हुए नगर पंचायत प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराकर तत्काल आम जनता के लिए संचालित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जनसुविधा के लिए बनाए गए इस शौचालय की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनसुविधा के लिए बना था शौचालय, एक माह बाद ही हो गया बंद
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब बढ़नपुरा ग्राम पंचायत अस्तित्व में थी, तब आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद यह लगभग एक महीने तक संचालित हुआ, लेकिन उसके बाद इसे बंद कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इसके बाद कभी भी इसे नियमित रूप से चालू नहीं किया गया।
बाद में ग्राम पंचायत का नगर पंचायत बड़हलगंज में विलय हो गया, जिससे लोगों को उम्मीद थी कि बंद पड़ी इस जनसुविधा को दोबारा शुरू कराया जाएगा। लेकिन चार वर्षों का समय बीत जाने के बावजूद शौचालय आज भी बंद पड़ा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी लगातार बढ़ती गई।
सरकारी भवन पर कब्जे का आरोप, आवास में बदले जाने की शिकायत
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए गए इस शौचालय भवन पर कुछ लोगों का कब्जा करा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि भवन को आवास का रूप देकर उसमें टीवी, कूलर, बेड सहित अन्य घरेलू सामान रखे गए हैं और वहां स्थायी रूप से निवास किया जा रहा है।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी भवन के उपयोग के बदले किराया भी वसूला जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय बंद होने से सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में खुले में शौच जाना बेहद कठिन हो जाता है। लोगों को मजबूरी में खेतों और सुनसान स्थानों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे असुविधा के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।
महिलाओं ने कहा कि सुबह और शाम के समय खुले में शौच जाना उनके लिए बेहद असुरक्षित और असहज स्थिति पैदा करता है। कई बार सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का भी खतरा बना रहता है।
कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार वार्ड के सभासद, नगर पंचायत प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिसके कारण समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो आज उन्हें सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सामुदायिक शौचालय को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराकर जनता के उपयोग के लिए शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और उच्च अधिकारियों से शिकायत जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सरकारी संपत्ति को तत्काल खाली कराया जाए तथा शौचालय को आवश्यक मरम्मत के बाद आम जनता के लिए फिर से संचालित किया जाए।
स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता अभियान तथा खुले में शौच मुक्त भारत (ODF) का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। ऐसे में यदि सरकारी धन से निर्मित सामुदायिक शौचालय वर्षों तक बंद पड़े रहें या उन पर अतिक्रमण हो जाए, तो यह स्वच्छता अभियान के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़े करता है।
लोगों का कहना है कि जब बुनियादी जनसुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो स्वच्छता संबंधी योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक कैसे पहुंचेगा।
प्रशासन के जवाब का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक इस पूरे मामले में नगर पंचायत प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि मामले के सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखा जा सके।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर



