इथेनॉल पर बार-बार उठ रहे सवाल

ई2० फ्यूल पर पूछे सवालों का निस्तारण किया जाए: केजरीवाल

  • आप संयोजक ने सरकार को घेरा
  • मारुति-टोयोटा-हीरो समेत 29 ऑटो कंपनियों को लिखा पत्र

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। इथेनॉल को लेकर सडक़ परिवहन मंत्रालय पर हमले अब भी जारी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखा। यह पत्र ई20 ईंधन के पुराने वाहनों में उपयोग को लेकर कंपनियों के विरोधाभासी बयानों पर केंद्रित है। उधर इन सब आरोपों पर नीतिन गडकरी ने कहा उन्हें फंसाने के लिए झूठी बातें फैलाईं जा रहीं हैं। गडकरी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि इथेनॉल प्रोग्राम में उनका कोई निजी हित है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का चीनी का कारोबार सरकार की इथेनॉल पॉलिसी से पहले से चल रहा है और इथेनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी न के बराबर है।
केजरीवाल ने बताया कि तीन प्रमुख कंपनियों मारुति, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो को अलग से पत्र भेजा गया है। शेष 26 कंपनियों को एक अलग पत्र भेजा गया है। उन्होंने कंपनियों से सार्वजनिक तौर पर अपनी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह कदम वाहन मालिकों की सुरक्षा और जानकारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। केजरीवाल ने मारुति, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो को लिखे पत्र में इस विरोधाभास को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों की ओनर्स मैनुअल में स्पष्ट रूप से लिखा है। मैनुअल के अनुसार, 23 से पहले निर्मित वाहनों में 10 फीसदी से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किसी भी स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए। यह कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज और उनके प्रतिनिधियों के सार्वजनिक बयान के बीच एक बड़ा अंतर दर्शाता है।

7 फीसदी हिस्सेदारी की बातें मुझे फंसाने की साजिश है : नितिन गडकरी

केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम का ज़ोरदार बचाव किया। उन्होंने हितों के टकराव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस पॉलिसी से गाडिय़ों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने आलोचकों को चुनौती दी कि वे ई2० फ्यूल से किसी पेट्रोल गाड़ी को नुकसान पहुंचने का सबूत पेश करें। साथ ही, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस पहल का मकसद फ्यूल का आयात कम करना, साफ़-सुथरे फ्यूल को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना है। गडकरी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि इथेनॉल प्रोग्राम में उनका कोई निजी हित है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का चीनी का कारोबार सरकार की इथेनॉल पॉलिसी से पहले से चल रहा है और इथेनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी न के बराबर है। उन्होंने कहा कि मुझे इथेनॉल पॉलिसी से कोई फायदा नहीं होता। इथेनॉल प्रोडक्शन में मेरी हिस्सेदारी सिफऱ् ०.7 प्रतिशत है। इतनी कम हिस्सेदारी के साथ, किसी बड़े आर्थिक फायदे का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि उन्हें इथेनॉल प्रोग्राम से कोई फायदा होने वाला था। हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट) के आरोपों को खारिज करते हुए गडकरी ने कहा, यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है कि मैंने अपने फायदे के लिए इथेनॉल पॉलिसी बनाई। ०.7 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला व्यक्ति निजी फायदे के लिए देश की इथेनॉल पॉलिसी को प्रभावित नहीं कर सकता। मंत्री ने कहा कि भारत अभी लगभग 55० इथेनॉल बनाने वाली यूनिट्स के ज़रिए हर साल करीब 1,5०० करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करता है, जिसमें उनका हिस्सा सिफऱ् ०.7 प्रतिशत है।

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