राहुल व प्रियंका ने वायनाड भूस्खलन पीडि़तों को लगाया मरहम
100 नए घर बनवाकर देगी कांग्रेस पीडि़तों से बोले कांग्रेस नेता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
वायनाड। वायनाड भूस्खलन पीडि़तों को कांग्रेस ने मरहम लगाया। एक बड़ी पहल के तहत राहुल गांधी ने 100 घरों का शिलान्यास किया और प्रियंका गांधी ने भी पीडि़तों को समर्थन का आश्वासन दिया। इस राहत योजना में प्रभावित दुकानदारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी शामिल है, जिसे कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण मानवीय कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को साल 2024 में आए भीषण भूस्खलन के पीडि़तों के लिए एक बड़ी राहत योजना की शुरुआत की। उन्होंने पार्टी की ओर से बनाए जाने वाले 100 घरों का शिलान्यास किया। कांग्रेस द्वारा बनाए जा रहे ये घर 1,100 स्क्वायर फीट के होंगे, जिनमें से हर घर के लिए 8 सेंट जमीन दी गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनका पूरा परिवार उन लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है जिन्होंने इस त्रासदी में अपना सब कुछ खो दिया है।

प्रियंका गांधी का भी भावनात्मक संदेश
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पीडि़तों का दुख साझा करते हुए कहा कि उन्होंने उन लोगों की मुश्किलें देखी हैं जिन्होंने अपने परिजनों और खेतों को खो दिया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के सभी सांसदों ने गृह मंत्री से मिलकर इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की थी और प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा था। प्रियंका ने कहा कि हादसे के वक्त वह सांसद नहीं थीं, लेकिन अब वह इस क्षेत्र के लोगों के लिए एक बेटी और बहन की तरह हैं। उन्होंने इस बात की भी खुशी जताई कि सभी राजनीतिक दलों ने पुनर्वास के काम में मदद की है।
नेता प्रतिपक्ष ने पीडि़तों के हौसले की तारीफ की
राहुल गांधी ने पीडि़तों की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा, आपने बहुत कुछ खोया है, लेकिन अपना हौसला और दूसरों के प्रति हमदर्दी नहीं खोई। उन्होंने घर बनाने की प्रक्रिया में हुई देरी का भी जिक्र किया और बताया कि जमीन की परमिशन और अन्य कागजी कार्रवाई के कारण समय लगा, लेकिन अब यह काम जल्द पूरा होगा। उन्होंने इस पहल को पीड़ितों के लिए प्यार और साथ का एक संदेश बताया।
एनसीईआरटी मामले पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
पीएम के लिए एनसीईआरटी का असली फुल फॉर्म है नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स : जयराम
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन के लिए नागपुर सांप्रदायिक पारिस्थितिकी तंत्र का मार्गदर्शन और आकार दिया है (नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स), जो वास्तविक एनसीईआरटी है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग भी की।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में पाठ्यपुस्तकों में वैचारिक बदलाव किए गए हैं और इन्हें ध्रुवीकरण व राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ही ऐसे शैक्षणिक तंत्र को दिशा दी है, जिसने पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन को आकार दिया। कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के आगे के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने पुस्तक में न्यायपालिका पर आपत्तिजनक सामग्री होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे संस्थान की गरिमा प्रभावित होती है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुस्तक की सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को तत्काल जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी निदेशक और स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आपत्तिजनक अध्याय शामिल करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों न की जाए। वहीं, केंद्र सरकार ने भी पुस्तक में विवादित अंश शामिल किए जाने पर चिंता जताई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और मसौदा तैयार करने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, एनसीईआरटी ने शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद पुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा लिया है, अनुचित सामग्री के लिए खेद जताया है और संबंधित प्राधिकरणों से परामर्श के बाद इसे दोबारा संशोधित करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि उसके आदेश की अवहेलना करते हुए किसी भी माध्यम से समान सामग्री प्रसारित करने की कोशिश को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
जेएनयू छात्र संघ का मार्च हुआ उग्र
पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष सहित 14 गिरफ्तार
१११ 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर अखाड़े में तब्दील हो गया है। छात्र संघ द्वारा आयोजित लॉन्ग मार्च के दौरान छात्रों और दिल्ली पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई।
इस मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए वर्तमान अध्यक्ष अदिति मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में जाने-माने स्टूडेंट लीडर, जेएनयूएसयू के पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार, जेएनयूएसयू प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट गोपिका बाबू और जॉइंट सेके्रटरी दानिश अली शामिल हैं। वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में एफआई दर्ज की गई है और जांच चल रही है।
चंडीगढ़ में स्कूलों को बम से उड़ाने की आई मेल
लिखा-अगले दो दिन में चंडीगढ़ में ब्लास्ट होंगे
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चंडीगढ़। शुक्रवार को विवेक हाई स्कूल और गुरुकुल भवन विद्यालय और अन्य कई प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी भेजी गई। सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को अवगत कराया। स्कूलों को मिली धमकी में लिखा है कि अगले दो दिन में पूरे चंडीगढ़ में बम ब्लास्ट होंगे।
एहतियातन बच्चों को घर भेजा गया है। मेल में पंजाब सेक्रेटरिएट को भी उड़ाने की धमकी दी गई है। चंडीगढ़ में धमकियां मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से पहले भी चंडीगढ़ के कई स्कूलों को धमकी भरे मेल आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीम मौके पर पहुंची। एहतियातन स्कूलों को खाली करवा लिया गया और छात्रों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। इसके बाद पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। कक्षाओं, कार्यालयों, स्टोर रूम और अन्य स्थानों की बारीकी से जांच की गई। प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस की जांच देर शाम तक जारी रही। स्कूल के आसपास के क्षेत्र में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमकी भरा ईमेल किस आईडी से भेजा गया, इसकी जांच की जा रही है। साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ईमेल भेजने वाले की पहचान में जुटी है। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी शहर के कुछ शिक्षण संस्थानों को इस तरह के ईमेल मिल चुके हैं, जिनमें कोई विस्फोटक नहीं मिला था।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। इस तरह से बार-बार स्कूलों और अन्य सरकारी संस्थान में बम की धमकी से शहर वासियों की चिंता बढ़ गई है।
एसआईआर मामले में सरकार व चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
शीर्ष कोर्ट बोली- कोई नहीं कर सकता हमारे आदेश का उल्लंंघन, बंगाल एसआईआर पर हुई सुनवाई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार हमारे आदेशों का उल्लंघन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बताया गया कि चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि वह अपने न्यायिक अधिकारियों को जानता है और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे। पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने पीठ से कहा, चुनाव आयोग ने पीठ पीछे न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया है जिसमें कहा गया है कि उन्हें क्या स्वीकार करना चाहिए और क्या नहीं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में इस प्रक्रिया के लिए तैनात न्यायिक अधिकारी इस संबंध में फैसले लेंगे।
सीजेआई ने कहा, हम इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसका अंत होना चाहिए। हम अपने न्यायिक अधिकारियों को जानते हैं और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं हो सकते। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है।
हमारे आदेशों से आगे कोई नहीं जाएगा : जॉयमाल्या बागची
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। पीठ ने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों से आगे जाएगी। पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे गतिरोध से निराश होकर शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को एक असाधारण निर्देश जारी किया। इसमें राज्य में विवादित मतदाता सूचियों की एसआईआर में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का निर्देश दिया गया।
न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी करना पड़ेगा भारी
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां निष्पक्ष आलोचना के दायरे से बाहर हैं और ऐसा करने पर अवमानना के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि यदि यह अदालत ऐसी पोस्ट को अवमानना के क्षेत्राधिकार में संज्ञान में लेती है तो उस पोस्ट पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।अदालत ने कहा, ‘‘हम लोगों को भविष्य में सावधान रहने की याद जरूर दिलाना चाहेंगे क्योंकि सोशल मीडिया पर कहे गए ऐसे शब्द जो स्पष्ट रूप से अवज्ञाकारी हों, जब भी अवमानना के क्षेत्राधिकार में संज्ञान में लिये जाते हैं, अवमानना करने वाले को कानून के तहत दंड का सामना करना पड़ सकता है।’’ अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार अपशब्द कहना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा लांघता है। अदालत ने बस्ती की एक जिला अदालत में अधिवक्ता हरि नारायण पांडेय के आचरण के संबंध में अदालतों की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 15 के तहत एक आपराधिक अवमानना मामले के संदर्भ में यह टिप्पणी की।अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोशल मीडिया पर उच्च अदालतों को लेकर कहे गए अपशब्द किसी भी तरह से उचित टिप्पणी या निर्णय की आलोचना के दायरे में नहीं आते। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि निंदा करने वाला व्यक्ति ने अपने शब्दों को न्यायोचित नहीं ठहराया और उसने स्वीकार किया कि उस दिन जब यह घटना हुई, उस समय वह अत्यंत व्यथित था। अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा समाप्त करते हुए अदालत ने 24 फरवरी को अपने निर्णय में कहा कि अधिवक्ता काफी लंबे समय से वकालत के पेशे में है और उसने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है जिसे अधीनस्थ अदालत के न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया है।



