केजरीवाल बरी, सत्ता की साजिश बेनकाब

- फैसले के बाद भावुक केजरीवाल ने कहा सत्यमेव जयते
- दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अदालत ने कथित शराब घोटाले में बइज्जत बरी किया
- घोटाले का आरोप लगा कर बीजेपी ने किया चरित्र हनन, डाल दिया जेल में छीन ली सत्ता
- 21 अन्य आरोपी भी किए गए बरी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए की अदालत ने दोनों नेताओं को कथित शराब नीति घोटाला मामले में आज बरी करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। इसके अलावा इस मामले में 21 अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा? कि बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है। इस मामले में सीबीआई ने कुल 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने सभी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार करते हुए सभी को बरी कर दिया। वहीं देश के चर्चित राजनीतिक चेहरों में शामिल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जिस कथित शराब घोटाले के आरोपों में गिरफ्तार किया गया वह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं था। वह एक राजनीतिक तूफान था। आरोपों की गूंज इतनी तेज थी कि उसने अदालत से पहले ही सड़कों टीवी स्टूडियो और सोशल मीडिया पर फैसला सुना दिया था। उन्हें भ्रष्ट कहा गया बेईमान कहा गया सत्ता का दुरुपयोग करने वाला बताया गया। उनके चरित्र को इस तरह चौराहे पर खड़ा किया गया जैसे फैसला हो चुका हो और सजा तय हो चुकी हो। लेकिन लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि अंतिम फैसला अदालत देती है सत्ता नहीं। और जब दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इन आरोपों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए दोनों नेताओं को बरी कर दिया तो यह सिर्फ एक कानूनी राहत नहीं यह उस नैरेटिव पर सीधा प्रहार था जिसे महीनों तक देश के सामने सच की तरह परोसा गया। यह फैसला उन सवालों को भी जन्म देता है जिनसे सत्ता अक्सर बचना चाहती है। अगर आरोप टिके नहीं तो गिरफ्तारी क्यों हुई? अगर सबूत पर्याप्त नहीं थे तो जेल क्यों भेजा गया? अगर केस इतना मजबूत था तो अदालत ने आरोपों को खारिज क्यों किया?
अदालत ने लगाई जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने जांच में हुई चूक के लिए संघीय जांच एजेंसी को फटकार लगाते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे। जबकि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला ही नहीं बनता था। न्यायाधीश सिंह ने कहा कि आरोपपत्र में आंतरिक विरोधाभास हैं जो साजिश की थ्योरी की जड़ पर प्रहार करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सबूत के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और पूर्व मुख्यमंत्री को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून के शासन के प्रतिकूल था। सिसोदिया के संबंध में न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता हो और न ही उनसे कोई बरामदगी की गई है।
बीजेपी की खतरनाक प्रवृत्ति की कहानी है
यह सिर्फ दो नेताओं की कहानी नहीं है। यह उस खतरनाक प्रवृत्ति की कहानी है जिसमें आरोप पहले लगाए जाते हैं और सबूत बाद में खोजे जाते हैं। यह उस दौर की कहानी है जिसमें किसी व्यक्ति को अदालत से पहले ही दोषी घोषित कर दिया जाता है। और जब अदालत उस व्यक्ति को बरी करती है तो सवाल सिर्फ कानून पर नहीं बल्कि उन ताकतों पर उठता है जिन्होंने आरोपों का महल खड़ा किया था।
राजनीतिक चमत्कार था आम आदमी पार्टी का उदय
दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी का उदय एक राजनीतिक चमत्कार की तरह था। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली इस पार्टी ने देश की राजधानी में सत्ता हासिल की और खुद को ईमानदारी की राजनीति का प्रतीक बताया। लेकिन यही पहचान जल्द ही उसके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन गई। जब कथित शराब नीति घोटाले का आरोप आम आदमी पार्टी पर लगाया गया। जांच एजेंसियों ने इसे बड़े भ्रष्टाचार के रूप में पेश किया। छापे पड़े पूछताछ हुई और आखिरकार गिरफ्तारी भी हुई। भारतीय जनता पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए लगातार हमला बोला।
सत्यमेव जयते
कोर्ट का फैसला आने के बाद दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल मीडिया के सामने मुखातिब हुए। इस दौरान वह इतने भावुक थे कि कैमरे के सामने ही वह फूट-फूटकर रोने लगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे समय से उन पर शराब घोटाला कहकर जो आरोप लगाए जा रहे थे उन्हें अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। केजरीवाल ने कहा कि वे शुरू से ही यह कहते रहे हैं कि सच की जीत होती है और आज वही साबित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान उनके साथ हैं और न्याय मिला है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया कि आखिर में अधर्म और अन्याय हारता है और सच ही जीतता है। सत्यमेव जयते। अरविंद केजरीवाल की रिहाई के बाद पत्नी सुनीता केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा दुनिया में कोई कितना भी शक्तिवान हो जाए लेकिन ईश्वर की शक्ति के ऊपर नहीं हो सकता है। अरविंद केजरीवाल ने अपना पूरा जीवन पूरी ईमानदारी से जिया है। उनका एक ही लक्ष्य है कि भारत खूब तरक्की करे।
आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता वो सच को आच्छादित कर ले : अखिलेश यादव
अखिलेश ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कन्नौज सांसद ने फैसले को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने लिखा कि आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं, आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले। आज हर ईमानदार आशा भरी साँस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे। आजादी से पहले, वर्तमान सत्ता के जो ‘संगी-साथी’ देश के दुश्मनों से मिले हुए थे और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदों तक पहुँचाने के लिए, आज़ादी के दीवानों के खि़लाफ़ मुख़बिरी जिनका काम रहा है और जो देश को गुलाम बनानेवाले साम्राज्यवादियों के माफ़ी-वज़ीफ़े पर रहकर अपनी भूमिगत भूमिका निभाते रहे हैं, छल-छलावे के वो विचारवंशी भाजपाई, आज किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं ।
अब नया कानून लाए केंद्र सरकार तय हो जिम्मेदारी : वकार
एआईएमआईएम नेता असीम वकार ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सत्य की जीत की बधाई देते हुए संसद में क्रिमिनल अकाउंटेबिलिटी लॉ बनाए जाने की मांग उठाने की अपील की है। हम पूरे विपक्ष से आग्रह करते हैं कि निर्दोष लोगों को जेल भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। अगर वह कभी संसद पहुंचे तो उनकी पहली मांग सरकार से यही होगी कि जो लोग बेगुनाहों को फंसाते हैं, उन्हें नौकरी से निलंबित कर जेल भेजा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ भी साजिश रची जा रही है और अंतत: वे भी निर्दोष साबित होकर बरी होंगे। झूठे आरोपों के कारण न जाने कितने लोगों की जिंदगियां और करियर बर्बाद हुए हैं, और यदि अभी कानून नहीं बनाया गया तो यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
हाईकोर्ट जाएगी सीबीआई
सीबीआई ने एलान किया है कि वह निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट जाएगी। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में पेश किए गए कई पुख्ता सबूतों और जांच के पहलुओं को फैसले में उचित स्थान नहीं मिला है जिसके चलते अब ऊपरी अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत हाईकोर्ट में अपील करने का फैसला किया है। एजेंसी का मानना है कि मामले जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया है या उन पर ठीक से विचार नहीं किया गया है।




