राहुल गांधी और अखिलेश यादव का पीडीए नारा: सामाजिक एकजुटता की पहल
पार्टी संगठन ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए दलित मतों को साधने के लिए दलित चेहरे को जिलाध्यक्ष के रुप में घोषित कर न केवल सभी को हैरत में डाल दिया था

4pm न्यूज नेटवर्क: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने जिस पीडीए (पिछड़ा-दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की बात करते हुए दलित और पिछड़ा वर्ग को एक मंच पर करने की सोच के साथ पीडीए का नारा दिया था, इसके पीछे वज़ह बताया था
सत्ताधारी दल भाजपा में दलित-पिछड़ों की होने वाली उपेक्षा, वह सच में दिखाई दे रहा है। बकौल समाजवादी पार्टी के नेताओं की मानें तो भाजपा समाज को बांटने का काम करती आई है। कभी हिन्दू मुस्लिम के नाम पर तो कभी दलित-पिछड़ों और सवर्ण के नाम पर यह इनका फार्मूला है, ‘फूंट डालो राज करो’ का।
इसका जीता जागता उदाहरण मीरजापुर में सत्ताधारी दल बीजेपी के हालिया नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को और उनकी नवगठित कमेटी (21 पदाधिकारी जिलाध्यक्ष सहित तथा 67 कार्यकारिणी सदस्यों) को देखने के बाद साफ होने लगा है।
संगठन के जिलाध्यक्ष की कमान दलित समाज के कार्यकर्ता को देने की घोषणा के बाद ही जहां अंदर ही अंदर खुसूर-फुसूर शुरू हो गई थी, लेकिन किसी ने खुल कर विरोध का साहस नहीं किया, वहीं पार्टी संगठन ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए दलित मतों को साधने के लिए दलित चेहरे को जिलाध्यक्ष के रुप में घोषित कर न केवल सभी को हैरत में डाल दिया था बल्कि संतुलन साधने का भरपूर प्रयास तो किया है, लेकिन जिला कमेटी में पदाधिकारियों को लेकर विरोध के स्वर तेज़ होने लगे हैं।
एक को साधने के बाद बाकी कमेटी में बनिया समाज की उपेक्षा को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। लोगों का कहना है कि पहले संगठन के जिला कमेटी में बनिया समाज को भरपूर स्थान दिया गया था, लेकिन इस बार इन्हें हांसिए पर रख छः के जगह दो पर लाकर सीमित कर दिया गया। जबकि इसके मुकाबले 7 ब्राह्मण चेहरों को प्राथमिकता दी गई है।
मिर्जापुर जिले में 7 ब्राह्मण चेहरे के तौर पर नवगठित कमेटी में उदयभान तिवारी उपाध्यक्ष, हेमंत तिवारी उपाध्यक्ष, रवि पांडे महामंत्री, रोहित त्रिपाठी मंत्री, सुनीता शर्मा मंत्री, भावेश शर्मा मीडिया प्रभारी एवं मनोज दुबे को कार्यालय मंत्री का दायित्व दिया गया है।
भागेदारी नहीं झुनझुना थमाया
वहीं बात करें वैश्य और बनिया समाज की तो वर्तमान में एक उपाध्यक्ष व एक को झुनझुना कोषाध्यक्ष पकड़ा कर इन्हें एक तरह से किनारे लगा दिया गया है। सूत्रों की मानें तो बनिया बिरादरी के ही एक पदाधिकारी द्वारा अपने और स्वजातियों को किनारे लगा दिया गया है, जिसकी आम जनमानस में खूब अच्छी खासी चर्चा है। और तो और जिला कमेटी के करीब आधे से ज्यादा पदाधिकारी नगर विधानसभा सभा से ही हैं।
जिसकी खूब चर्चा जिले में हो रही है। बताते चलें कि बीजेपी जिला कमेटी घोषित होने से पहले नामित सभासदों की जो लिस्ट जारी हुई उसमें भी एक भी सभासद बनिया वर्ग का नहीं रहा। इन सब बातों को लेकर एक तरह बनिया समाज बीजेपी के मौजूदा रवैए को लेकर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।
बनिया समाज से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि इसका परिणाम 2027 के विधान सभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। पार्टी के रणनीतिकारों ने गलत फैसला लेते हुए जिला कमेटी में बनिया समाज की भागेदारी को कम कर उन्हें एक तरह से नकारने का काम किया है जो अनुचित है।राजनीति के जानकार बता रहे हैं कि बनिया समाज के उपर बीजेपी का ठप्पा लगा हुआ है, लेकिन जिसकदर इनकी उपेक्षा हो रही है वह कहते नहीं बन रहा है।
किसके इशारे पर चल रहा खेल
गौर करें तो पूर्व में भाजपा मिर्जापुर जिला कमेटी में पहले 6 फिर 4 बनिया पदाधिकारी मनोनीत होते आएं थे। आज यह दो पर आकर सिमट गये हैं, उसमें से एक पद को ‘लालीपाप’ सरीखे जोड़ कर देखा जा रहा है। ऐसे में लोगों द्वारा कहते सुना जा सकता है कि आखिरकार किसके इशारे पर यह सब हुआ? जिसका जवाब तो फिलहाल किसी के पास नहीं है।
बीजेपी से लंबे समय से जुड़े हुए बनिया, वैश्य समाज के लोग मौजूदा इन घटनाक्रम से अपने आप को ठगा और उपेक्षित सा महसूस करने लगे हैं। कईयों ने तो अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस पर घोर नाराज़गी भी जताई है। लोगों का कहना है कि बनिया समाज के प्रमुख कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया गया।
जब बालेंदु मणि त्रिपाठी बीजेपी जिला अध्यक्ष थे तब उनकी कमेटी में 5 पदाधिकारी वैश्य समाज के रहें हैं, जिनमें आशुकांत चुनाहे, संतोष गोयल, डाली अग्रहरी, नीलम सोनी, बचाऊ लाल सेठ तथा एक कायस्थ समाज से अमित सिन्हा शामिल रहें।
इसके बाद बृजभूषण सिंह के टीम में 4 बनिया समाज से सन्तोष गोयल (अब सपा में हैं) महामंत्री, श्याम सुंदर केशरी उपाध्यक्ष, गौरव उमर मंत्री, नितिन गुप्ता मंत्री रहे हैं। वर्तमान जिला कमेटी में तहज़ीब न मिलने पर वैश्य समाज की नगर में राजनीतिक हत्या कर दिये जाने का तोहमत लगाते हुए एक जनप्रतिनिधि को सीधे तौर पर निशाने पर रखते हुए पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि बीजेपी जिला कमेटी में हर बार नगर से एक बनिया समाज का चेहरा जिला महामंत्री जरुर रहता था, जो इस बार दरकिनार कर दिया गया है। ऐसे में चर्चा हो रही है कि क्या मिर्जापुर जिले से 7 ब्राह्मण जिला पदाधिकारियों के भरोसे नगर विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा?
उपमुख्यमंत्री के आगमन पर पीछे से झांकते नजर आएं बीजेपी जिलाध्यक्ष
मिर्जापुर में मनोनीत किए गए बीजेपी जिलाध्यक्ष खुद उपेक्षा का शिकार होते हुए नज़र आ रहे हैं। हालिया कार्यक्रमों और यहां की तस्वीरें देखकर तो यही कहा जा रहा है। अब यह महज़ संयोग रहा है या सुनियोजित यह तो हम नहीं कहते, लेकिन पार्टी के पुराने कार्यकर्त्ताओं की टोली से लेकर आम जनमानस के बीच इसको लेकर खुसूर-फुसूर तेज़ हो चली है।
दलित बीजेपी जिलाध्यक्ष को किनारे की कुर्सी
नवरात्रि में मां विंध्यवासिनी देवी धाम में दर्शन-पूजन के लिए आए सूबे के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के साथ फोटो सेशन के समय बीजेपी के नवागत जिलाध्यक्ष इस कदर अपने ही पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा उपेक्षा के शिकार हुए दिखाई दिए मानों वह जिलाध्यक्ष नहीं भीड़ का हिस्सा हों। तस्वीर में वह साफ तौर देखें जा रहे हैं जैसे की वह भीड़ से झांक रहे हो।
आश्चर्यजनक बात तो यह है कि संस्कारवान लोगों की पार्टी कहे जाने वाली बीजेपी के उन पदाधिकारियों को भी जरा भी शर्म नहीं आई कि उनके मुखिया (पार्टी जिलाध्यक्ष) पीछे कोने में दिखाई दे रहे हैं जबकि उनका स्थान आगे होना चाहिए था, लेकिन यहां तो खुद संस्कारवान पार्टी के संस्कारित पदाधिकारी मंत्री जी के साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए इस कदर लालायित रहे कि जिलाध्यक्ष तक को पीछे ढ़केल दिया गया था।
इसी तरह से एक और तस्वीर सामने आई है जो जनपद के प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी के प्रेसवार्ता का रहा है, जहां मंच पर बीजेपी विधायकों से लेकर कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी मौजूद हैं, वहीं बीजेपी जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज एकदम से किनारे में पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि इसके पूर्व के जिलाध्यक्ष की कुर्सी बाकायदा अगल-बगल में देखी गई है। ऐसे में इस बात की चर्चा हो रही है क्या नवागत जिलाध्यक्ष जी अपने जाति और कद-काठी के कारण उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं या ऐसा उनके साथ जानबुझकर किया जा रहा है।
दूसरे दलों से होकर आएं लोगों को बीजेपी मिर्जापुर जिला कमेटी में पदाधिकारी बना दिया गया है। इनमें से कुछ ऐसे भी पदाधिकारी बनाए गए हैं जो नगर पालिका में ठेकेदारी कर रहे हैं। इसको लेकर भी अच्छा खासा विरोध है कि ठेकेदारों को पदाधिकारी बना दिया गया है। जबकि पुराने ज़मीनी कार्यकर्ताओं को ठेंगा दिखा दिया गया है। जिससे पुराने कार्यकर्ता अपने आप को ठगा महसूस करने के साथ अंदर ही अंदर आहत भी दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे ही एक कार्यकर्ता ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय तक बीजेपी के एक माननीय के लिए दरी बिछाने से लेकर उनके कार्यक्रम को सम्पन्न कराने में क्या-क्या नहीं किया, लेकिन बारी जब जिला कमेटी में शामिल कराने की आई तो उन्होंने ऐसा मुंह फेरा की उसकी कल्पना तक नहीं की थी।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरि,मिर्जापुर



