राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, कहा- सरकार का मुख्य सिद्धांत असत्य और हिंसा

राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार का मुख्य सिद्धांत असत्य और हिंसा है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत एक विशाल देश है.. जहां हर साल लाखों युवा बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी मेहनत करते हैं.. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल लगातार सामने आए हैं.. पेपर लीक, बढ़ती फीस, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप.. और छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव पूरे देश में चिंता का विषय बन चुके हैं.. इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रसिद्ध शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अहिंसक भूख हड़ताल पर बैठे.. उनकी हड़ताल और उसके दौरान हुई घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था, लोकतंत्र.. और छात्रों के अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी..

सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षक, नवाचारकर्ता और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं.. उन्होंने लद्दाख में पानी की समस्या का समाधान खोजने के लिए आइस स्टूपा जैसी अभिनव तकनीक विकसित की.. जिसकी दुनिया भर में सराहना हुई.. लोकप्रिय फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान के किरदार फुंसुख वांगड़ू की प्रेरणा भी काफी हद तक सोनम वांगचुक को माना जाता है.. वे लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय अधिकारों और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण आंदोलन करते रहे हैं.. इसी क्रम में वे इस बार छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए..

वहीं यह प्रदर्शन 20 जून 2026 को शुरू हुआ.. जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए.. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक.. और अन्य अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है.. उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार तथा प्रभावित छात्रों.. और उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था शामिल थी..

सोनम वांगचुक 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए.. और 29 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए.. उन्होंने केवल नमक और पानी के सहारे अपना आंदोलन जारी रखा.. उनका कहना था कि वे महात्मा गांधी के सत्य.. और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए छात्रों की आवाज को शांतिपूर्ण तरीके से देश के सामने रखना चाहते हैं.. उनका मानना था कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि देश के भविष्य की नींव है..

हड़ताल के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई.. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, लगभग दो सप्ताह के भीतर उनका 7 से 8 किलोग्राम वजन कम हो गया.. उनका रक्तचाप भी सामान्य स्तर से नीचे चला गया.. और डॉक्टरों ने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई.. इसके बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा.. प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकालने की भी घोषणा की थी.. ताकि अपनी मांगों को सांसदों तक सीधे पहुंचाया जा सके..

इसी बीच 18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुंचाया.. पुलिस का कहना था कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों.. और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था.. इसलिए उन्हें अस्पताल ले जाना आवश्यक था.. उस समय तक वे लगभग 20 से 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे..

आपको बता दें कि इस घटना पर विपक्षी नेताओं की भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि किसी व्यक्ति को शांतिपूर्ण.. और अहिंसक भूख हड़ताल से हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.. उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए.. वहीं सरकार और प्रशासन का पक्ष था कि किसी भी नागरिक का जीवन सर्वोपरि है.. और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति में हस्तक्षेप करना प्रशासन की जिम्मेदारी है..

वहीं यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति या एक आंदोलन तक सीमित नहीं है.. इसने भारत की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई पुराने सवालों को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया.. देश में NEET-UG जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य का निर्धारण करती हैं.. ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.. तो इसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों के विश्वास पर पड़ता है..

 

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