सूरत में बारिश-बाढ़ का कहर, 41 लोगों की मौ*त, बिजली-पानी ठप

गुजरात के सूरत में भारी बारिश और बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं... आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक 41 लोगों की...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के सूरत से सबसे बड़ी और बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है.. जहां भारी बारिश और भीषण बाढ़ के बाद अब जैसे-जैसे पानी उतर रहा है.. वैसे-वैसे तबाही की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं.. जिन्हें देखकर हर कोई सन्न रह गया है.. पिछले 24 घंटों के दौरान सूरत के अलग-अलग इलाकों से 13 और शव बरामद किए गए हैं..

इसके साथ ही इस भीषण बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है.. हर गुजरते घंटे के साथ हालात की गंभीरता.. और स्पष्ट होती जा रही है.. पूरे शहर में शोक का माहौल है.. जबकि प्रशासन राहत, बचाव और पुनर्वास के बड़े अभियान में जुटा हुआ है..

आपको बता दें कि सूरत में आई इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है.. जिन इलाकों में कुछ दिन पहले तक लोगों की सामान्य दिनचर्या चल रही थी.. वहां अब चारों ओर तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं.. घरों में जमा कीचड़, सड़कों पर फैला मलबा, क्षतिग्रस्त वाहन.. और बर्बाद घरेलू सामान इस त्रासदी की गंभीरता को बयां कर रहे हैं.. वहीं सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में लिंबायत, खरवासा, सरोली, भेस्तान, अमरोली और वालाक पाटिया शामिल हैं..

लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण इन इलाकों में पानी इतनी तेजी से भर गया कि.. लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.. कई कॉलोनियां और रिहायशी इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए.. झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.. क्योंकि उनके घरों में पानी तेजी से घुस गया.. इसके अलावा कई बहुमंजिला इमारतों के बेसमेंट भी पानी से भर गए.. जिससे वहां खड़े वाहन और अन्य सामान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए..

जानकारी के अनुसार बाढ़ का पानी बढ़ने के दौरान कई परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा.. कुछ लोगों ने स्कूलों, सामुदायिक भवनों और राहत शिविरों में शरण ली.. जबकि कई परिवार अपने रिश्तेदारों के घरों में रहने को मजबूर हो गए.. जिन लोगों ने समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर रुख नहीं किया.. उन्हें बाद में राहत और बचाव दलों की मदद से बाहर निकाला गया..

वहीं अब जब पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है.. तबाही का वास्तविक स्वरूप सामने आ रहा है.. कई इलाकों में कीचड़ और मलबे के बीच लगातार शव बरामद हो रहे हैं.. बचाव और तलाशी अभियान के दौरान प्रशासन को अलग-अलग स्थानों से शव मिलने की सूचना मिल रही है.. यही कारण है कि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है..

प्रशासन के अनुसार, बरामद किए गए शवों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है.. मृतकों के परिजनों को सूचना दी जा रही है.. और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद शव उन्हें सौंपे जा रहे हैं.. कई मामलों में शवों की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.. क्योंकि लंबे समय तक पानी में रहने के कारण उनकी स्थिति प्रभावित हो चुकी है.. बता दें कि बाढ़ ने केवल जनहानि ही नहीं की..

बल्कि हजारों लोगों की आजीविका पर भी गहरा असर डाला है.. छोटे दुकानदारों, दिहाड़ी मजदूरों और रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.. कई दुकानों में रखा सामान पूरी तरह खराब हो गया.. जबकि छोटे उद्योगों और गोदामों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.. जिन परिवारों का जीवन पूरी तरह रोज की कमाई पर निर्भर था.. उनके सामने अब दो वक्त की रोटी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है..

राहत और सफाई अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है.. नगर निगम की टीमें लगातार सड़कों से कीचड़ और मलबा हटाने में जुटी हुई हैं.. कई इलाकों में भारी मशीनों की मदद से सफाई का कार्य किया जा रहा है.. ताकि लोगों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो सके.. इसके साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए भी लगातार पंपिंग की जा रही है..

हालांकि राहत कार्य तेज गति से चल रहे हैं.. लेकिन प्रभावित इलाकों के लोगों को अभी भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.. कई स्थानों पर कीचड़ और गंदगी की मोटी परत जमी हुई है.. जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.. स्थानीय लोग सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता जता रहे हैं.. और प्रशासन से जल्द से जल्द हालात सामान्य करने की मांग कर रहे हैं..

 

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