चैतर वसावा जेल में, AAP का BJP सरकार पर बड़ा हमला
डेडियापाड़ा से विधायक चैतर वसावा के जेल में होने को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं.. आदिवासी समाज में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है.. जो लंबे समय से जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहे हैं.. हाल के दिनों में उन्हें और उनके कुछ साथियों को एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है.. आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है.. जबकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया है.. ऐसे में यह मामला अब केवल कानूनी नहीं.. बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है..
इसी बीच आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने डेडियापाड़ा पहुंचकर चैतर वसावा के परिवार से मुलाकात की.. उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की तथा पार्टी की ओर से एकजुटता का संदेश दिया.. इसुदान गढ़वी ने कहा कि आम आदमी पार्टी केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि एक परिवार है.. उनके अनुसार जब भी पार्टी का कोई साथी मुश्किल में होगा.. पूरा संगठन उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा.. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से इस लड़ाई को आगे बढ़ाएगी..
डेडियापाड़ा और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में इस मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.. समर्थकों का कहना है कि पार्टी अपने नेता के साथ खड़ी है.. जबकि विरोधी दल इस पूरे मामले को कानून की कार्रवाई बता रहे हैं.. यही वजह है कि यह मुद्दा अब पूरे गुजरात में चर्चा का केंद्र बन गया है.. अगर चैतर वसावा की राजनीतिक यात्रा पर नजर डालें.. तो वे दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्र का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं.. उन्होंने वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर डेडियापाड़ा (एसटी) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की.. इस जीत ने न केवल उन्हें राज्य की राजनीति में नई पहचान दिलाई.. बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी की मौजूदगी को भी मजबूत किया..
आपको बता दें कि राजनीति में आने से पहले चैतर वसावा आदिवासी समुदाय के लोगों की सरकारी कार्यालयों में मदद करने के लिए जाने जाते थे.. ग्रामीण अध्ययन में स्नातक करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक सरकारी विभाग में भी काम किया.. बाद में उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई.. और आदिवासी किसानों, मजदूरों तथा ग्रामीण परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना शुरू किया..
शुरुआती दौर में वे भारतीय ट्राइबल पार्टी से जुड़े रहे.. बाद में वर्ष 2022 में उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा.. इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में उनकी जीत ने यह संकेत दिया कि आदिवासी क्षेत्रों में एक नया राजनीतिक विकल्प उभर रहा है.. चुनावी जीत के बाद पार्टी ने उन्हें गुजरात विधानसभा में अपना नेता भी बनाया.. इसके बाद वे लगातार आदिवासी अधिकारों, वन अधिकार कानून, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार.. और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को विधानसभा और जनता के बीच उठाते रहे..
हालांकि चैतर वसावा का राजनीतिक सफर जितनी तेजी से आगे बढ़ा.. उतनी ही तेजी से वे विवादों में भी घिर गए.. वर्ष 2023 में डेडियापाड़ा क्षेत्र में हुई एक घटना ने उनके राजनीतिक जीवन को नया मोड़ दे दिया.. यह मामला वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय आदिवासी किसानों के बीच हुए विवाद से जुड़ा था..
मामले के अनुसार, वन भूमि पर खड़ी फसल को लेकर किसानों और वन विभाग के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी.. इसी दौरान चैतर वसावा भी इस विवाद में पहुंचे.. आम आदमी पार्टी का कहना है कि वे दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे थे.. वहीं, अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस दौरान सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट, धमकी.. और जबरन वसूली जैसी घटनाएं हुईं.. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की और चैतर वसावा सहित कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया..
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जून 2026 में सत्र अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया.. अदालत ने चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा तथा सात अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई.. अदालत ने भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत आरोपों को सिद्ध माना.. अदालत के फैसले के बाद यह मामला पूरे गुजरात में राजनीतिक बहस का विषय बन गया..
आम आदमी पार्टी ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की.. पार्टी का कहना है कि चैतर वसावा को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है.. पार्टी नेताओं का आरोप है कि वे लगातार आदिवासी समाज के अधिकारों और स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे.. जिससे राजनीतिक विरोधियों को असहजता हुई.. हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि.. कानून अपना काम कर रहा है और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है..
वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी डेडियापाड़ा पहुंचे.. उन्होंने चैतर वसावा के परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना.. और भरोसा दिलाया कि पार्टी हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी.. इसके बाद उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों.. और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की.. जिसमें संगठन को मजबूत बनाने और कानूनी लड़ाई जारी रखने पर चर्चा हुई.. बैठक के दौरान इसुदान गढ़वी ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को कभी अकेला नहीं छोड़ती.. उनके अनुसार, पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ेगी.. उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी.. और कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय पाने की पूरी कोशिश की जाएगी..
इसुदान गढ़वी ने यह भी आरोप लगाया कि चैतर वसावा आदिवासी किसानों.. और वन अधिकारों के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे हैं.. उनके अनुसार, कई बार उन्होंने किसानों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया.. लेकिन राजनीतिक कारणों से उनकी भूमिका को गलत तरीके से पेश किया गया.. दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल कानून के अनुसार की गई है.. और इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं है..
चैतर वसावा की राजनीतिक पहचान केवल एक विधायक तक सीमित नहीं रही है.. दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है.. जो स्थानीय लोगों की समस्याओं को खुलकर उठाते रहे हैं.. जल, जंगल और जमीन के अधिकार, वन अधिकार कानून के तहत भूमि पट्टों का मुद्दा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार.. और बुनियादी सुविधाओं की मांग जैसे विषय उनके राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा रहे हैं.. यही कारण है कि डेडियापाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में उनका एक मजबूत जनाधार माना जाता है..



