मिर्ज़ापुर बीजेपी में बगावत! ‘दागियों’ और ‘चहेतों’ की लिस्ट से भड़के कार्यकर्ता, 2027 से पहले बढ़ा संकट

मिर्ज़ापुर बीजेपी की नई कार्यसमिति लिस्ट पर बवाल मचा है। दागियों और चहेतों को जगह मिलने से कार्यकर्ता नाराज हैं। माननीय की पत्नी को सदस्य बनाए जाने पर महिला कार्यकर्ताओं में भी रोष, 2027 चुनाव पर पड़ सकता है असर।

4pm न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में बीजेपी की नई जिला कार्यसमिति की घोषणा के बाद पार्टी के अंदर ही विरोध तेज होता जा रहा है। पदाधिकारियों से लेकर कार्यसमिति के सदस्यों तक की लिस्ट को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पहले से ही ‘दागी’ चेहरों को जगह दिए जाने पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब एक “माननीय” की पत्नी को कार्यसमिति में शामिल किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।

‘पुराने कार्यकर्ता हाशिए पर’, अंदर ही अंदर सुलग रहा गुस्सा

पार्टी से वर्षों से जुड़े कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें इस बार पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। न तो उन्हें पद मिला और न ही कार्यसमिति में जगह। कुछ नाराज कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,  “जब चुनाव आता है तो हमें याद किया जाता है, लेकिन संगठन में जगह देने की बात आती है तो हमें किनारे कर दिया जाता है।” उनका आरोप है कि पार्टी अब जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय “चहेतों” और “पैसे वालों” को प्राथमिकता दे रही है।

‘माननीय’ की पत्नी को जगह मिलने से महिला कार्यकर्ताओं में रोष

इस पूरे विवाद का केंद्र बनी हैं श्रीमती सीता सिंह, जिन्हें जिला कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। वह एक “माननीय” की पत्नी बताई जा रही हैं। इस फैसले से खासकर महिला कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कई महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से संगठन में सक्रिय थीं और उम्मीद कर रही थीं कि इस बार उन्हें मौका मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या आम कार्यकर्ता सिर्फ कार्यक्रमों में दरी बिछाने और कुर्सियां संभालने के लिए ही रह गए हैं।

‘दागियों’ और ‘अपनों’ की भरमार, संगठन की दिशा पर सवाल

कार्यसमिति की लिस्ट में कथित तौर पर दागी और विवादित छवि वाले लोगों को जगह मिलने की बात भी सामने आ रही है। इससे पार्टी के अंदर यह संदेश जा रहा है कि अब संगठन की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के लिए भविष्य में नुकसानदेह हो सकती है।

2027 चुनाव से पहले खतरे की घंटी?

नाराज कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि अगर इसी तरह जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती रही तो 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। एक कार्यकर्ता ने कहा,  “हम खुद जनता के बीच जाने लायक नहीं रहेंगे, क्योंकि हमारे पास जवाब ही नहीं होगा।”

हाईकमान तक पहुंचा मामला

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला पार्टी के उच्च नेतृत्व तक पहुंच चुका है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या इस विवाद पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। मिर्ज़ापुर में बीजेपी की नई कार्यसमिति की लिस्ट ने संगठन के भीतर की खामियों को उजागर कर दिया है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी अगर समय रहते दूर नहीं की गई, तो यह आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

रिपोर्ट- संतोष देव गिरी

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