बंगाल में घुसपैठियों–SIR पर BJP फंसी, मंत्री के बयान से बवाल, मतुआ समुदाय नाराज
पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों और SIR को लेकर दिए गए बयान के बाद BJP मुश्किल में घिरती नजर आ रही है... केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों एक बड़े विवाद की चपेट में है.. बात है विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाने की.. इस प्रक्रिया ने खासकर मतुआ समुदाय को प्रभावित किया है.. जो बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों का बड़ा समूह है.. और भाजपा नेता शांतनु ठाकुर के बयान ने आग में घी डाल दिया.. जिससे मतुआ समुदाय में गुस्सा भड़क उठा.. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की.. लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.. और शाह क्या करेंगे.. क्या भाजपा 2026 के विधानसभा चुनावों में मतुआ वोट बैंक को बचा पाएगी..
बता दें कि चुनाव आयोग हर साल वोटर लिस्ट को अपडेट करता है.. लेकिन पश्चिम बंगाल में इस बार विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है.. SIR का मकसद है वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना, यानी मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या गैर-मौजूद लोगों के नाम हटाना.. 16 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई.. जिसमें अट्ठावन लाख बीस हजार आठ सौ अट्ठानवे नाम हटाए गए.. ये नाम मुख्य रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट कैटेगरी के थे.. कुल सात करोड़ छाछठ लाख सैंतीस हजार पांच सौ उनतीस वोटरों में से 92.40 फीसदी नाम बचे हैं.. लेकिन हटाए गए नामों ने हंगामा मचा दिया..
SIR की प्रक्रिया दो चरणों में है.. पहला चरण दिसंबर 2025 में खत्म हुआ.. और दूसरा फरवरी 2026 तक चलेगा.. अंतिम लिस्ट 14 फरवरी 2026 को आएगी.. लेकिन समस्या यह है कि कई नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो रहे.. चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने इकतीस लाख अड़तीस हजार तीन सौ चौहत्तर वोटरों को अनमैप्ड माना है.. जिन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है.. राज्य के अधिकारियों ने सुनवाई पर अस्थायी रोक लगा दी.. क्योंकि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की शिकायतें आईं.. कई नाम जो 2002 की हार्ड कॉपी में हैं.. वे सॉफ्टवेयर में नहीं दिख रहे है..
जानकारी के अनुसार इस SIR से सबसे ज्यादा प्रभावित मतुआ समुदाय है.. मतुआ बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थी हैं.. जो उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में रहते हैं.. इन जिलों में वे चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.. कई मतुआ सदस्यों के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं.. इसलिए उनके नाम हटने का डर है.. तृणमूल कांग्रेस ने इसे साइलेंट इनविजिबल रिगिंग कहा है.. यानी चुपके से चुनावी धांधली.. जिसका मतलब साफ है कि बीजेपी बंगाल में चुनाव जीतने के लिए.. लीगल वोटरों का नाम भी लिस्ट से गायब करवाना चाहती है..
आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत 4 जनवरी को कोलकाता में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई.. जहां भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि जो भी बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आए हैं.. उनका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए.. यह बयान सीधे मतुआ समुदाय पर असर डालता है.. क्योंकि कई मतुआ सदस्य बांग्लादेश से शरणार्थी के रूप में आए थे.. समुदाय में गुस्सा फैल गया.. भाजपा ने तुरंत डैमेज कंट्रोल किया.. प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह आर्य का निजी विचार है.. पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है.. वीडियो सोशल मीडिया से हटा लिया गया.. लेकिन तब तक बात आम जनता में फैल चुकी थी..
जानकारी के मुताबिक आर्य का बयान सिर्फ एक बयान नहीं था.. यह भाजपा की घुसपैठ-विरोधी रणनीति का हिस्सा लगता है.. अमित शाह ने भी दिसंबर 2025 में कहा था कि ममता बनर्जी घुसपैठ को बढ़ावा दे रही हैं.. जिससे बंगाल की डेमोग्राफी बदल रही है.. लेकिन मतुआ समुदाय खुद को घुसपैठिया नहीं मानता है.. वे शरणार्थी हैं, जो धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भागकर आए.. CAA के तहत उन्हें नागरिकता का वादा किया गया था.. लेकिन SIR ने उनके वोटिंग राइट्स पर सवाल खड़े कर दिए..
वहीं विवाद और बढ़ा जब केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने 22 दिसंबर 2025 को हंसखाली-गारापोटा में बयान दिया.. और उन्होंने कहा कि अगर SIR में 50 लाख रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमान.. और पाकिस्तानी मुसलमानों के नाम हटते हैं.. और हमारे एक लाख लोगों को थोड़े समय के लिए वोटिंग रोकनी पड़े.. तो कहां ज्यादा फायदा है.. ठाकुर खुद मतुआ समुदाय से हैं.. और ठाकुरबाड़ी के सदस्य है.. उनका यह कहना कि मतुआ बलिदान सहन करें.. जो मतुआ समुदाय को चुभ गया..
वहीं इस बयान के बाद ठाकुरनगर में हिंसा भड़क उठी.. 24 दिसंबर 2025 को मतुआ समुदाय के गोसांई (पंडित) पर हमला हुआ.. आरोप है कि हमला शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने किया.. क्योंकि गोसांई SIR से नाम हटाने पर सवाल उठा रहे थे.. ऑल इंडिया मतुआ महासंघ के TMC समर्थक सदस्य घायल हुए.. भाजपा ने आरोपों से इनकार किया.. लेकिन TMC ने पूरे बंगाल में सड़क जाम का ऐलान किया..
ठाकुर के बयान ने मतुआ गुटों में फूट डाल दी.. एक तरफ ठाकुरबाड़ी के समर्थक, दूसरी तरफ TMC से जुड़े मतुआ.. ठाकुरनगर में झड़प हुई.. जिसमें 12 लोग घायल हुए.. समुदाय ने निष्पक्ष जांच की मांग की.. और हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की अपील की.. TMC नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि SIR से सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ को ही होगा..
बता दें कि 30 दिसंबर 2025 को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने कहा कि मतुआ समुदाय को SIR से डरने की जरूरत नहीं है.. जो शरणार्थी CAA के तहत आवेदन कर चुके हैं.. उनके वोटिंग राइट्स सुरक्षित हैं.. यहां तक कि ममता बनर्जी भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती.. शाह ने TMC पर आरोप लगाया कि वे घुसपैठ को बढ़ावा दे रही हैं.. और मतुआ में पैनिक फैला रही हैं.. और उन्होंने भाजपा नेताओं को निर्देश दिया कि मतुआ वोटरों से लगातार संपर्क करें और उनके डर दूर करें..
अमित शाह ने CAA का जिक्र किया.. CAA 2019 में पास हुआ था.. जो गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देता है.. लेकिन नियमों की अधिसूचना में देरी हुई.. शांतनु ठाकुर ने CAA कैंप चलाए.. लेकिन कई मतुआ शिकायत करते हैं कि प्रक्रिया धीमी है.. शाह ने वादा किया कि CAA के तहत योग्य मतुआ.. और नामशूद्र को कोई नुकसान नहीं होगा.. लेकिन SIR ने CAA के वादों पर पानी फेर दिया..
वहीं TMC ने इस मुद्दे को भुनाया.. ममता बनर्जी ने CEC को पत्र लिखकर SIR की आलोचना की.. TMC ने कहा कि भाजपा मतुआ को धोखा दे रही है.. चुनाव से पहले CAA का वादा किया.. लेकिन अब नाम हटा रही है.. TMC ने सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन किए.. अभिषेक बनर्जी ने शाह पर निशाना साधा.. TMC का कहना है कि SIR भाजपा की साजिश है.. जो TMC के वोट बैंक को कमजोर करेगी..
TMC ने मतुआ को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ हैं.. लेकिन मतुआ में TMC की भी आलोचना है.. क्योंकि वे CAA का विरोध करती रही हैं.. CPI(M) जैसे वामपंथी दल भी हिंसा की निंदा कर रहे हैं.. मतुआ समुदाय की जड़ें 19वीं सदी में हैं.. हरिचंद ठाकुर ने मतुआ महासंघ की स्थापना की.. जो दलित हिंदुओं को संगठित करता है.. बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से धार्मिक उत्पीड़न के कारण लाखों मतुआ भारत आए.. वे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया में बस गए.. इन जिलों की 15 विधानसभा सीटों पर वे निर्णायक हैं..
जानकारी के अनुसार 2019 और 2021 चुनावों में भाजपा ने CAA का वादा कर मतुआ वोट हासिल किए.. शांतनु ठाकुर बोंगांव से सांसद बने.. लेकिन CAA लागू न होने से निराशा है.. SIR ने डर बढ़ा दिया.. कई मतुआ कहते हैं कि उनके पास 2002 की लिस्ट से मैच करने वाले दस्तावेज नहीं हैं.. समुदाय CAA के तहत आवेदन कर रहा है.. लेकिन प्रक्रिया जटिल है.. 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं.. भाजपा का लक्ष्य है दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाना.. लेकिन मतुआ की नाराजगी से नुकसान हो सकता है.. भाजपा पहले ही बैकफुट पर है.. शाह ने कहा कि बंगाल में सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार है.. लेकिन मतुआ मुद्दा मुख्य हो गया..



