सहिया की व्यथा प्रेस कॉन्फ्रेंस से अदालत तक

संजय शर्मा ने सेंसर बोर्ड से कहा था- आपत्ति है तो बताइए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संजय शर्मा ने सेंसर बोर्ड के फैसले के खिलाफ मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलकर सवाल उठाया था। क्या आदिवासियों की पीड़ा दिखाना नक्सलवाद का समर्थन है? उन्होंने कहा था कि ‘सहिया’ हिंसा के समर्थन की फिल्म नहीं, बल्कि हिंसा के खिलाफ प्रेम की कहानी है। अब कपिल सिब्बल द्वारा पूरी फिल्म देखने और उसके बाद फिल्म के पक्ष में इतनी स्पष्ट राय रखने के बाद यह विवाद एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। संजय शर्मा अब सेंसर बोर्ड के फैसले और आगे की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
इस मुकदमे का सबसे बड़ा कानूनी सवाल संभवत: यही होगा कि किसी हिंसा या सामाजिक बुराई को पर्दे पर दिखाना क्या उसका समर्थन करना माना जा सकता है?‘सहिया’ की कानूनी तैयारी में सुप्रीम कोर्ट के एस. रंगराजन बनाम पी. जगजीवन राम और बॉबी आर्ट इंटरनेशनल बनाम ओमपाल सिंह हून जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का सहारा लिया गया है। बॉबी आर्ट मामले से जुड़ा महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि किसी सामाजिक बुराई का चित्रण अपने आप उस बुराई का अनुमोदन नहीं बन जाता. किसी रचना को उसके पूरे संदर्भ और संदेश में देखा जाना चाहिए। इसी तरह बॉम्बे हाई कोर्ट के फैंटम फिल्म्स बनाम सीबीएफसी मामले में फिल्म की प्रकृति, विषयवस्तु और मूल कथानक को ध्यान में रखकर देखने तथा दृश्यों को कहानी से अलग करके न आंकने की अहमियत सामने आई थी।

कपिल सिब्बल के साथ अदालत की लड़ाई

अब संजय शर्मा इस मामले को अदालत में ले जाने जा रहे हैं और कपिल सिब्बल ने फिल्म देखने के बाद इस कानूनी लड़ाई में जाने की बात कही है।अदालत में सेंसर बोर्ड के फैसले को रद्द करने, फिल्म पर तत्काल और निष्पक्ष पुनर्विचार कराने तथा यदि कोई वास्तविक आपत्तिजनक हिस्सा है तो उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित करने जैसी राहतें मांगी जा सकती हैं। कानूनी तैयारी में यह विकल्प भी रखा गया है कि पूरी फिल्म रोकने के बजाय यदि आवश्यक हो तो सीमित और कानूनसम्मत संशोधनों के साथ प्रमाणन पर विचार किया जाए। लेकिन कपिल सिब्बल द्वारा पूरी फिल्म देखने के बाद दी गई राय ने निर्माता पक्ष के आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है।

अब लड़ाई सिर्फ ‘सहिया’ की नहीं

‘सहिया’ का विवाद अब सिर्फ एक निर्माता की फिल्म रिलीज कराने की लड़ाई नहीं रह गया है। यह सवाल भारतीय सिनेमा में रचनात्मक स्वतंत्रता, सेंसर बोर्ड की शक्तियों, प्रमाणन प्रक्रिया की जवाबदेही और असहमति की जगह से जुड़ गया है.एक तरफ सेंसर बोर्ड है, जिसने फिल्म को राष्ट्रीय अखंडता, रा’य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे बेहद गंभीर आधारों से जोड़ते हुए प्रमाणपत्र देने से इनकार किया। दूसरी तरफ फिल्म निर्माता संजय शर्मा हैं, जो पूछ रहे हैं कि आखिर फिल्म का वह दृश्य तो बताया जाए जो इन आरोपों को साबित करता है। और अब तीसरी तरफ कपिल सिब्बल हैं, जिन्होंने खुद पूरी फिल्म देखने के बाद कहा है कि उन्हें उसमें एक भी आपत्तिजनक दृश्य नजर नहीं आया। 2& अगस्त के अंतिम प्रत्यावेदन के बाद प्रक्रिया में हुई देरी ने इस लड़ाई में एक और सवाल जोड़ दिया है।

स्पष्ट मत

यह बेहद शानदार फिल्म है। इसमें एक भी ऐसा सीन नहीं है जिसे आपत्तिजनक कहा जाए। मैं हैरान हूं कि इसे रोका गया। सरकार को तो इस फिल्म को अवॉर्ड देना चाहिए। इसे हम अदालत में ले जाएंगे और फिल्म हर हालत में रिलीज होगी।

अब जवाब सेंसर बोर्ड से अदालत मांगेगी

अदालत के सामने मूल सवाल शायद यही होगा-जिस फिल्म क ो सेंसर बोर्ड ने रोक दिया, उसी फिल्म को पूरी देखने के बाद देश के वरिष्ठ संवैधानिक वकील कपिल सिब्बल अगर यह कह रहे हैं कि इसे रोकना नहीं, अवॉर्ड देना चाहिए, तो आखिर ‘सहिया’ का अपराध क्या है?

आखिर ‘सहिया’ में है क्या?

‘सहिया’ मूल रूप से नक्सल प्रभावित झारखंड की पृष्ठभूमि में बनी प्रेम कहानी है इसमें एक नवविवाहित जोड़ा ऐसी परिस्थितियों में फंस जाता है जहां एक तरफ नक्सली हिंसा है और दूसरी तरफ पुलिस तथा सुरक्षा व्यवस्था. एक पत्रकार की गलत रिपोर्टिंग भी कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ लाती है। शादी की रात से शुरू हुआ संकट नवविवाहित जोड़े को ऐसे संघर्ष में धकेल देता है जहां दोनों को अपनी जान बचाते हुए निकलना पड़ता है. लेकिन इसी भय, हिंसा और असुरक्षा के बीच दोनों का रिश्ता और प्रेम मजबूत होता जाता है। निर्माता संजय शर्मा का कहना है कि फिल्म का विषय नक्सलवाद का समर्थन करना नहीं है. फिल्म सवाल उठाती है कि जब रा’य और रा’य-विरोधी हिंसा आमने-सामने खड़ी होती हैं तो उनके बीच फंसे सामान्य आदिवासी और नागरिक का क्या होता है।

यही ‘सहिया’ की आत्मा है

संजय शर्मा की ओर से सेंसर बोर्ड को दिए गए प्रत्यावेदन में स्पष्ट किया गया कि फिल्म न तो हिंसा का महिमामंडन करती है, न राष्ट्रविरोधी भावना पैदा करने का उसका कोई उद्देश्य है और न ही वह आदिवासी समाज को राष्ट्रविरोधी बताती है। इतना ही नहीं, निर्माता पक्ष ने बोर्ड से यह भी कहा कि अगर किसी निश्चित दृश्य या संवाद को लेकर वास्तविक आपत्ति है तो उसे स्पष्ट किया जाए। निर्माता उचित कट, संशोधन या डिस्क्लेमर जैसे उपायों पर विचार करने को तैयार था। इसके बावजूद पूरी फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया। यहीं संजय शर्मा का सवाल है- जब समस्या किसी खास दृश्य में है तो उस दृश्य को बताइए। पूरी फिल्म पर ताला क्यों?

म्युनिसिपल को-ऑपरेटिव सोसायटी के सचिव ने किया गोलमाल

हेरफेर करनेके गंभीर आरोप, नियुक्ति से लेकर ऋण वितरण तक जांच की मांग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम लखनऊ की म्युनिसिपल को-ऑपरेटिव सोसायटी के सचिव नवीन गौड़ के खिलाफ नियुक्ति की योग्यता, ऋण वितरण में कथित अनियमितताओं, कर्मचारियों की शेयर मनी के कथित दुरुपयोग और शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं राहुल वाल्मीकि ने पूरे मामले की उ‘चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नवीन गौड़ की वर्ष 18 में सहायक लेखाकार के पद पर नियुक्ति हुई थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित पद के लिए बी.कॉम तथा निर्धारित अनुभव की आवश्यकता थी, जबकि नियुक्ति के समय उनकी शैक्षिक योग्यता केवल इंटरमीडिएट थी। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर नियुक्ति हासिल की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

2023 से सचिव का कार्यभार संभालने का दावा

शिकायत के मुताबिक नवीन गौड़ वर्ष 2023 से समिति के सचिव का कार्यभार देख रहे हैं। इसी अवधि में समिति में सफाई कर्मचारियों को दिए जाने वाले ऋण को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों के नाम पर उनकी जानकारी अथवा सहमति के बिना ऋण स्वीकृत किए गए और ऋण की रकम अन्य खातों में स्थानांतरित की गई। इसके अलावा ऋण के समय कर्मचारियों से जमा कराई जाने वाली शेयर मनी में भी कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है।

दिवंगत सफाई कर्मचारी विकास के मामले में गंभीर आरोप

शिकायत में स्वर्गीय विकास पुत्र बंसी लाल, जो सफाई कर्मचारी के मामले को भी उठाया गया है। आरोप है कि विकास की जानकारी के बिना उसके नाम पर ऋण स्वीकृत कर रकम निकाली गई। शिकायतकर्ता के अनुसार उस समय विकास दुर्घटना में घायल था और उसके पैर में फ्रैक्चर होने के कारण सरकारी अस्पताल में उपचार चल रहा था। आरोप है कि इसी दौरान उसके नाम पर ऋण कराकर रकम निकाल ली गई।शिकायत के मुताबिक विकास ने मामले की जांच के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप है कि इसके बाद उस पर कथित रूप से दबाव बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके चलते उसे घर छोडक़र शहर में छिपकर रहने की स्थिति पैदा हुई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मानसिक तनाव के बाद विकास की मृत्यु हो गई। हालांकि, विकास की मृत्यु और कथित धमकियों के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।

कमलेश के नाम पर भी बिना जानकारी ऋण स्वीकृत करने का आरोप

इसी प्रकार कमलेश पुत्री शिव कुमार, जिन्हें भी सफाई कर्मचारी बताया गया है, के संबंध में आरोप लगाया गया है कि उनकी जानकारी के बिना ऋण स्वीकृत कर खाते से रकम निकाली गई। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक वेतन से अधिक कटौती होने के बाद कमलेश को अपने नाम पर ऋण होने की जानकारी हुई, जबकि उन्होंने ऋण के लिए आवेदन नहीं किया था। आरोप है कि शिकायत के बाद उन पर भी दबाव बनाया गया और धमकी दी गई। शिकायत में दावा किया गया है कि लगातार मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी के कारण उनकी तबीयत गंभीर रूप से खराब हुई और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि आवश्यक है।

शिकायतों पर कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ताओं के अनुसार मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, नगर आयुक्त, सहकारिता विभाग, जिला सहकारी बैंक की हलवासिया शाखा तथा सहकारिता भवन स्थित आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समितियां, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की गई हैं। साथ ही जिन कर्मचारियों ने धमकी या दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए हैं, उनके बयान दर्ज कर संबंधित बैंक लेनदेन और समिति के दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।

मुरादाबाद में इंटरनेशनल फर्म में लगी भीषण आग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुरादाबाद। कटघर क्षेत्र के रामपुरदोराहा इलाके में गोट रोड पर स्थित आरएच इंटरनेशनल फर्म में सोमवार अचानक आग लग गई। जिस समय आग लगी फैक्ट्री के सैकड़ों कर्मचारी अपने काम में लगे थे। फैक्ट्री के एक हिस्से से धुआं उठते ही अफरा-तफरी मच गई। सारे कर्मचारी भाग कर किसी तरह बाहर निकले।
आनन-फानन में पुलिस और दमकल विभाग को आग की सूचना दी गई। तब तक आग ने विकराल रूप लेकर पूरी फैक्ट्री को अपने चपेट में ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटे उठने लगी। दमकल की चार गाड़ी करीब-करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद भी आग पर काबू नहीं पा सकी। बाद में 6 गाडिय़ां और बुलाई गई।दो घंटे बीतने के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। दमकलकर्मी आग बुझाने में जुटे रहे। सीएफओ डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि दमकल की दस गाडिय़ां लगाई गई हैं।

दिशा सालियान की मौत मामले में सीबीआई ने कराई एफआईआर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने सोमवार को दिशा सालियन मामले की गहन जांच के लिए एफआईआर दर्ज की। यह घटनाक्रम सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर की छत से गिरने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सामने आया है। अब सीबीआई पूरे मामले की जांच करेगी। ध्यान देने वाली बात है कि सालियन 8 जून, 2020 को मृत पाई गई थीं, जो मुंबई के बांद्रा में राजपूत के घर पर उनके मृत पाए जाने से कुछ दिन पहले की घटना है।
गौरतलब है कि उनकी मौत को शुरू में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट के तौर पर दर्ज किया गया था। हाल ही में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और सालियन की मौत से जुड़े हालात की जांच करने का निर्देश दिया था।

इस मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की डिवीजऩ बेंच ने इस बात पर चिंता जताई थी कि सालियन के परिवार के हत्या के आरोपों के बावजूद सिर्फ़ एडीआर ही दर्ज किया गया था। इससे पहले, बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह भी गौर किया था कि सालियन की मौत के पांच साल बाद भी उनके परिवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एडीआर की कॉपी नहीं दी गई थी।

नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने दिया भाजपा को दिया झटका

वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस की नगर परिषद पर दर्ज की एकतरफा जीत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजे धीरे-धीरे आने लगे हैं। सुबह 8.00 बजे से मतों की गिनती जारी है और दोपहर तक नतीजे साफ होने लगेंगे। शुरु आती रू झान में कांग्रेस से भा’ापा को कड़ी टक्कर मिल रही है। कई सीटों पर एनडीए पर इंडिया गठबंधन हावी है।
भाजपा के कई दिग्ग्ज नेताओं के क्षेत्र में कांग्रेस ने बाजी मार ली है तो कही आप व अन्य विपक्षी दलों ने कामयाबी हासिल की है। हालांकि भाजपा ने बढ़त ली हुई है। कांग्रेस ने सबसे बड़ा झटका वसुंधरा राजे को दिया है। उनके चुनाव क्षेत्र झालावाड़ में बीजेपी की हार हुई है। भरतपुर नगर निगम के चुनाव में निर्दलियों ने बाजी मारी जबकि दौसा नगर निगम के 55 में से 25 वार्ड पर जीती कांग्रेस। कुल मिला कर राजस्थान निकाय चुनाव के 1012 वार्डों पर कांग्रेस की जीत, 119& पर बीजेपी विजयी है। उदयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत हुई है। बीजेपी ने 41 सीटों पर बंपर जीत के साथ प्रचंड बहुमत का आंकड़ा पार किया है जबकि 17 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं, एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए हैं। 45 वार्डों वाली इस नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटों पर परचम लहराकर अपना बोर्ड बनाना तय कर लिया है।
यह नतीजा इसलिए अहम है क्योंकि झालावाड़ को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता है; उन्होंने झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और इस इलाके में उनका काफी राजनीतिक प्रभाव रहा है।पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का मजबूत गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। 45 वार्डों वाली इस नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटों पर परचम लहराकर अपना बोर्ड बनाना तय कर लिया है। यह नतीजा इसलिए अहम है क्योंकि झालावाड़ को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता है; उन्होंने झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और इस इलाके में उनका काफी राजनीतिक प्रभाव रहा है।

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