महाराष्ट्र में मची बगावत के बीच फूटा संजय राउत का गुस्सा, बेईमानों को कर दिया बेनकाब!
महाराष्ट्र का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस में हुई बगावत के बीच विपक्षी खेमे की एक और पार्टी शिवसेना (यूबीटी) भी एक बड़े संकट का सामना कर रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस में हुई बगावत के बीच विपक्षी खेमे की एक और पार्टी शिवसेना (यूबीटी) भी एक बड़े संकट का सामना कर रहा है।
सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह से सात सांसद सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हैं और राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। इस बीच उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जो जाना चाहते हैं, खुशी से जाएं।
इस मामले को लेकर नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। वहीं इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपनी पार्टी के कुछ बागी सांसदों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बेईमानी करेगा या पार्टी के साथ गद्दारी करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही अंदरूनी अटकलों के बीच आया है।
महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के शिंदे गुट की तरफ जाने की खबरें तेज हो गई हैं। इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया है। कुछ सांसदों के बैठक छोड़ने और दूसरे गुट से संपर्क करने की चर्चा चल रही है। संजय राउत ने इन अफवाहों पर साफ कहा कि पार्टी एकजुट है। अगर कोई नेता या सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ जाता है या बीजेपी-शिंदे गुट के साथ हाथ मिलाता है तो पार्टी उसे छोड़ने वाली नहीं है।
राउत का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में शिवसेना के टूटने के बाद उद्धव ठाकरे गुट पहले ही काफी नुकसान झेल चुका है। तब कई विधायक और सांसद एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। अब लोकसभा में भी कुछ बचे हुए सांसदों पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। राउत ने कहा कि जो लोग साई बाबा और माता भवानी की शपथ लेकर पार्टी में आए थे, अगर वे गद्दारी करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
संजय राउत ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वे विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पैसे और पद का लालच देकर सांसदों को तोड़ा जा रहा है। राउत का कहना है कि असली शिवसेना उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में है और कार्यकर्ता इस पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। बागी सांसदों को उन्होंने सलाह दी कि अगर जाना है तो खुलकर इस्तीफा दे दें, लेकिन गुपचुप तरीके से बेईमानी न करें।
वहीं शिवसेना UBT में फूट की अटकलों के बीच, नासिक से शिवसेना UBT MP राजाभाऊ वाजे ने बड़ा बयान दिया उन्होंने कहा मैं उद्धव जी के साथ हूं और उनके साथ ही रहूंगा।
न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार के बाद जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस के जाने-माने नेताओं ने पार्टी का साथ हार के बाद छोड़ा है, वो चर्चा का विषय बना हुआ है. सबसे बड़ी चर्चा तो त्रिपुरा की एक पंजीकृत पार्टी राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी में TMC के 20-22 सासंदों के विलय की घोषणा की है.
अब इसपर सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने एक लेख के जरिए देश की राजनीति में बढ़ते दल-बदल और निष्ठा की कमी पर तंज कसा है. उन्होंने अपने लेख में पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और पंजाब की राजनीति में बीते कुछ दिनों से जो हो रहा है, उसे भारतीय राजनीति की ‘गटरगंगा’ का सबसे स्याह और काला अध्याय बताया है. उन्होंने बीजेपी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि ‘आयाराम-गयारामों’ को मेडल बांटने का धंधा दिल्ली दरबार में बाकायदा व्यापारिक तौर-तरीके से चल रहा है.
सामना में राउत ने लिखा, ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ नाम की इस खोखली पार्टी की ऐसी लॉटरी लगी कि रातों-रात उसे बैठे-बिठाए 22 ‘रेडीमेड’ सांसद मिल गए. अब तक इतने सांसद न तो कभी शिवसेना को मिले, न शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस को नसीब हुए. कई राजनैतिकदल तो ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खपा दी.
एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर, रामदास आठवले और केजरीवाल जैसे बड़े-बड़े सूरमा जो नहीं कर पाए, वो त्रिपुरा की इस NCPI ने कर दिखाया. भारतीय लोकतंत्र का यह अनोखा चमत्कार प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और देश के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ‘तपस्या’ का ही नतीजा है.”
उबाठा नेता ने लिखा कि त्रिपुरा की इस पार्टी की लोकसभा की कुल ताकत ही सिर्फ दो सीटों की है, मगर इस त्रिपुरी पार्टी के अब पूरे 22 सांसद लोकसभा में दिखाई देंगे, जो प्रधानमंत्री मोदी के सामने ‘जी हुजूर’ और ‘हां में हां’ मिलाने का काम करेंगे. इसे कहते हैं ‘ऊपरवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के’ इस मामले ने यही साबित किया है.”महाराष्ट्र में जो चल रहा है। उसपर सियासी पारा हाई है। ऐसे में यह घटना सिर्फ शिवसेना तक सीमित नहीं है।
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस में भी बगावत हुई है। संजय राउत ने टीएमसी के बागी सांसदों पर भी तीखा हमला बोला था। उन्होंने उन्हें गद्दार बताया और सड़क पर जूतों से मारने जैसी बात कही, जो विवादास्पद रही। राउत का स्टाइल हमेशा आक्रामक और साफ-साफ होता है। वे विपक्षी एकता पर जोर देते हैं और बीजेपी की रणनीति को ‘दल तोड़ने की साजिश’ बताते हैं।इस चेतावनी का असर पार्टी के अंदरूनी माहौल पर पड़ रहा है।
उद्धव ठाकरे ने भी बैठक बुलाकर सांसदों से एकजुटता का संदेश दिया। राउत का बयान कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला है, लेकिन विपक्षी दलों में चिंता भी पैदा कर रहा है। राजनीति में वफादारी और विश्वास बहुत जरूरी होते हैं। अगर नेता बार-बार पाला बदलते हैं तो जनता का भरोसा उठ जाता है।



