सपना बनाम संघर्ष, पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में बरसे वोट

- बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग, कड़ी सुरक्षा के बीच लंबी कतारें
- मतदान की मार सियासत की धार, बंगाल-तमिलनाडु में आज जनता लिख रही सत्ता का फैसला
- सुबह से ही निकले वोटर दिग्गज नेताओं और कलाकारों ने डाले वोट
- तमिलनाडु में भी सियासी संग्राम तेज
- राहुल गांधी का आरोप- भाजपा तमिलनाडु की संस्कृति, भाषा और पंरपराओं को खत्म कर देगी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने चरम पर है और आज की सुबह सिर्फ सूरज नहीं सियासत की तपिश भी साथ लेकर आई है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं और दोनो ही राज्यों में वोटिंग ट्रेंड जबर्दस्त है। लंबी कतारे हैं और हर कोई बस अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहता हुआ नजर आ रहा है। इन दो अलग—अलग राज्यों दो अलग राजनीतिक संस्कृतियों में बस एक ही सवाल है कि सत्ता किसके हाथ? पश्चिम बंगाल में आज 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह से ही बूथों पर लंबी कतारें दिखाई दे रही है। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार आज दोपहर1 बजे तक पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत 62.18 प्रतिशत रहा और तमिलनाडु में 56.81 प्रतिशत दर्ज किया गया। पश्चिम बंगाल में 16 जिलों में पहले चरण की वोटिंग हो रही है। यह सिर्फ वोट नहीं बल्कि यह विश्वास की कतार है। एक तरफ ममता बनर्जी जो खुद को मिट्टी की बेटी कहकर जनता के बीच खड़ी हैं और दूसरी तरफ बीजेपी जिसने बंगाल में अपने सबसे बड़े विस्तार का दांव खेला है और पीछे खड़े हैं नरेंद्र मोदी जिनका सीधा संदेश है कि उत्साह के साथ मतदान करें। लेकिन बंगाल की कहानी सिर्फ वोटिंग तक सीमित नहीं है यह आरोपों प्रत्यारोपों और टकराव की भी कहानी है। चुनाव का शंख बजते ही एसआईआर से लेकर कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के आरोप, आईपैक पर कार्रवाई, और सड़कों से लेकर अदालत तक की लड़ाई यह चुनाव साधारण नहीं रहा। ममता बनर्जी खुद वकील बनकर अदालत में उतरीं धरने पर बैठीं और हर मोर्चे पर लड़ती नजर आई। उन्होंने एक ऐसी छवि बनाई जिससे उनके समर्थक उन्हें शेरनी कह कर पुकारने लगे। दूसरी तरफ तमिलनाडु जहां सियासत का रंग अलग है लेकिन तापमान उतना ही ऊंचा। यहां बीजेपी पर आरोप है कि वह राज्य की भाषा संस्कृति और परंपराओं को बदलना चाहती है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को खुलकर उठाया है। सवाल अब वही है कि क्या बंगाल में बीजेपी का सपना साकार होगा या ममता बनर्जी एक बार फिर उस सपने को तोड़ देंगी? और तमिलनाडु में क्या राजनीतिक समीकरण बदलेंगे या परंपरा कायम रहेगी? आज वोट डाले जा रहे हैं लेकिन असल में लिखा जा रहा है आने वाले पांच साल का इतिहास।
सतर्कता भी साफ नजर आई
हालांकि इस उत्साह के बीच सतर्कता भी साफ नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल के कुछ संवेदनशील इलाकों से हल्के तनाव और नोकझोंक की खबरें जरूर आई हैं, लेकिन सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी के चलते हालात नियंत्रण में बने हुए हैं। कुल मिलाकर माहौल ऐसा है जहां जोश और जिम्मेदारी साथ साथ चल रहे हैं। मतदाता न केवल अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनी रहे। यही संतुलन इस चुनाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है।
रंजनीकांत,क मल हसन ने डाले वोट विजय के कार्यकर्ता गिरफ्तार
चुनाव में रजनीकांत, कमल हसन व उनकी बेटियों समेत कई दिग्गजों ने भी वोट डाले। वहीं तिरुपत्तूर सीट पर मतदान करते समय वीडियो बनाना एक्टर व नेता विजय के एक कार्यकर्ता को महंगा पड़ गया। तमिगा वेत्रि कषगम के कार्यकर्ता शक्तिवेल को मतदान केंद्र के अंदर वोट डालते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया अधिकारियों के मुताबिक, शक्तिवेल ने मतदान कक्ष के भीतर मोबाइल फोन से पार्टी के सीटी चुनाव चिन्ह पर वोट डालते हुए खुद का वीडियो बनाया।
लोकतंत्र का जीवंत चेहरा
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदान केंद्रों पर आज लोकतंत्र का जीवंत चेहरा साफ दिखाई दे रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी केंद्रों तक मतदाताओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। कई जगहों पर लोग निर्धारित समय से पहले ही बूथों के बाहर पहुंच गए मानो अपने वोट के जरिए अपनी बात कहने की एक बेचैनी हो। महिलाओं की भागीदारी इस बार खास तौर पर उल्लेखनीय है। कई बूथों पर महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी नजर आईं जो बदलते सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता का संकेत है। वहीं पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में भी उत्साह देखने को मिला। सेल्फी प्वाइंट्स पर तस्वीरें खिंचवाते युवा सिर्फ एक ट्रेंड नहीं बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी का नया चेहरा पेश कर रहे हैं।
कुमारगंज व मुर्शिदाबाद में हिंसक झड़प
- भाजपा प्रत्याशी पर भीड़ का हमला
- टीएमसी व हुमांयु कबीर की पार्टी के बीच मारपीट
पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी घमासान के बीच कुमारगंज व मुर्शिदाबाद से एक बेहद तनावपूर्ण और हिंसक घटना सामने आई है, जिसने पूरे सियासी माहौल को और भड़का दिया है। भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर भीड़ द्वारा कथित हमला किए जाने का वीडियो सामने आया है, जिसमें उनके साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई होती दिख रही है। इस हमले में उनके कान से खून निकलता भी नजर आया, जिसके बाद उन्हें अपनी जान बचाकर बॉडीगार्ड के साथ मौके से निकलना पड़ा। इस घटना के बाद भाजपा नेता ने सत्ताधारी टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सियासी साजिश करार दिया है। घटना के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके पोलिंग एजेंट्स को 8-1० बूथों से जबरन बाहर निकाल दिया गया था, लेकिन उन्होंने खुद हस्तक्षेप कर उन्हें वापस अंदर जाने दिलाया। जब वह बूथ नंबर 24 पर स्थिति देखने पहुंचे, तो उन पर और उनकी टीम पर हमला किया गया, ताकि डर का माहौल बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल मौजूद थे, लेकिन उस समय उनके साथ सिर्फ उनका बॉडीगार्ड था। मुर्शिदाबाद का नाओदा क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक टकराव और तनाव का केंद्र बन गया है। मतदान प्रक्रिया के दौरान शिवनगर गांव में सत्ताधारी टीएमसी और एजेयूपी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बीच तीखी झड़प की खबर ने माहौल को गरमा दिया। आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच स्थिति तेजी से बिगड़ती नजर आई। हुमायूं कबीर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी ने उनकी पार्टी के कई उम्मीदवारों को मोटी रकम देकर चुनाव मैदान से हटने के लिए प्रभावित किया।




