ऑर्केस्ट्रा और स्पा में बच्चों की एंट्री पर रोक लगे? SC ने मांगा जवाब

ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका में आरोप लगाया गया कि ये क्षेत्र पूरे देश में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी, यौन शोषण और जबरदस्ती मजदूरी के लिए "छिपे हुए ठिकानों" में बदल गए हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़ी याचिका में आरोप लगाया गया कि ये क्षेत्र पूरे देश में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी, यौन शोषण और जबरदस्ती मजदूरी के लिए “छिपे हुए ठिकानों” में बदल गए हैं.

ऑर्केस्ट्रा, डांस ग्रुप, मसाज पार्लर और स्पा में बच्चों तथा किशोरों को काम पर रखने और उनके गलत इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को केंद्र सरकार, बाल अधिकार संस्था NCPCR और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बाल अधिकार समूह ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ (JRCA) की ओर से पेश हुए सीनियर वकील एच.एस. फूलका की दलीलों पर गौर किया और केंद्रीय श्रम और कानून एवं न्याय मंत्रालयों को भी नोटिस जारी किया. फूलका ने अपनी दलील में कहा कि 10 और 11 साल की नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा और डांस बार में काम पर रखा जा रहा है. हालांकि स्पा और मसाज पार्लर के लिए, कुछ राज्यों ने न्यूनतम उम्र 18 साल तय करने के नियम बनाए हैं.

NCPCR-NHRC को भी भेजा नोटिस
हालात को “गंभीर” बताते हुए, 3 जजों की बेंच ने इस याचिका पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भी नोटिस जारी किए. याचिका में यह भी कहा गया, “केंद्र को निर्देश देते हुए एक ‘रिट ऑफ मैंडमस’ या उचित निर्देश जारी किए जाएं

कि वह ‘बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986’ की धारा 4 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे, ताकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के ऑर्केस्ट्रा, डांस ग्रुप, डांस बार, नौटंकी, मसाज पार्लर, स्पा और सैलून, या किसी भी ऐसी जगह पर काम करने या प्रदर्शन करने को CALPRA की अनुसूची के भाग A में शामिल किया जा सके, जिससे कि इस तरह के रोजगार पर पूरी तरह से रोक लग सके.”

याचिका में आरोप लगाया गया कि ये क्षेत्र पूरे देश में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी, यौन शोषण और जबरदस्ती मजदूरी के लिए “छिपे हुए ठिकानों” में बदल गए हैं. JRCA की ओर से वकील सोनाली जैन द्वारा दायर याचिका में ‘बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम’ (CALPRA), 1986 को लागू किए जाने की खामी पर सवाल उठाया.

पूरी तरह से बैन लगाई जाए
इस कानून के तहत, “खतरनाक” पेशे, जहां किशोरों के काम करने पर सख्त रोक है, उन्हें CALPRA की अनुसूची के भाग A में लिस्टेड किया गया है. जबकि, मसाज पार्लर और स्पा अभी ‘पार्ट B’ के तहत आते हैं, जिसका मतलब है कि किशोरों (14 से 18 साल के लोग) को काम पर रखना सिर्फ “नियमित” है, न कि पूरी तरह से बैन.

साथ ही “ऑर्केस्ट्रा” और “डांस ग्रुप” सेक्टर, जो बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बहुत ज्यादा फैले हुए हैं, वे पूरी तरह से लिस्ट में शामिल नहीं हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि तस्कर इस कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाकर बच्चों के कमर्शियल यौन शोषण को मनोरंजन और वेलनेस इंडस्ट्री में “कानूनी रोजगार” का रूप दे देते हैं.

बंगाल और बिहार में ज्यादा शोषण
याचिका में मार्च 2025 से मई 2026 के बीच चलाए गए बचाव अभियानों के डेटा दिए गए और बताया गया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप से 212 नाबालिगों को बचाया गया. इसी तरह दिल्ली और राजस्थान में मसाज पार्लर और स्पा से 12 नाबालिगों को बचाया गया. पीड़ितों में से कुछ तो महज 12 साल के थे.

असल में, इन नाबालिगों में से कई को ऑपरेटरों को 10,000 से 50,000 रुपये तक की रकम में बेच दिया गया, उन्हें कर्ज के जाल में फंसाकर बंधुआ मजदूर बना दिया गया, और नशे में धुत दर्शकों के सामने “यौन रूप से उत्तेजक कपड़ों” में परफॉर्म करने के लिए मजबूर किया गया.

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