डीडीयू के सात शोधार्थियों ने रचा इतिहास, ICHR के प्रतिष्ठित शोध अनुदान में हासिल की बड़ी सफलता
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सात शोधार्थियों का ICHR के प्रतिष्ठित शोध अनुदान के लिए चयन हुआ है। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में सफलता के बाद विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) ने एक बार फिर शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान साबित की है। विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सात शोधार्थियों का चयन भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के प्रतिष्ठित शोध अनुदान के लिए हुआ है। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के कठिन चरणों में सफलता हासिल कर इन शोधार्थियों ने न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि विश्वविद्यालय का भी गौरव बढ़ाया है।
सात शोधार्थियों ने प्रतिष्ठित शोध अनुदान में बनाई जगह
इस वर्ष मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की शुभांगी मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव, सत्या निषाद, कुमारी संजू और अनन्या त्रिपाठी का चयन हुआ है। वहीं प्राचीन इतिहास विभाग की मनीषा कुमारी और रोशनी वर्मा भी इस प्रतिष्ठित शोध अनुदान के लिए चुनी गई हैं।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले वर्ष भी मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पांच शोधार्थियों ने इसी परीक्षा में सफलता हासिल की थी। लगातार दूसरे वर्ष मिली यह सफलता विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य की निरंतरता को दर्शाती है।
विभागाध्यक्षों ने बताया मेहनत और बेहतर शोध वातावरण का परिणाम
मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी और प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने सभी चयनित शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विभाग में उपलब्ध बेहतर अकादमिक माहौल और गंभीर शोध संस्कृति का परिणाम है।
कुलपति ने दी शुभकामनाएं
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सभी सफल शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डीडीयू में शिक्षण और शोध की गुणवत्ता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शोधार्थियों की यह सफलता भविष्य में विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगी।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडे, गोरखपुर
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