फिजियोथेरेपी से ठीक कर सकते हैं कंधे का दर्द

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आज की आधुनिक जीवनशैली में कंधे का दर्द एक महामारी की तरह फैल रहा है, जिससे न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि युवा पीढ़ी भी बुरी तरह प्रभावित है। ऐसा होने के पीछे का एक बड़ा कारण है देर तक बैठे-बैठे स्क्रिन के सामने काम करना है। इस पर एक फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया कि लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने झुककर बैठना, गलत पोस्चर में सोना और शारीरिक निष्क्रियता इस दर्द के मुख्य कारण हैं। अक्सर लोग इसे मामूली मांसपेशियों का खिंचाव समझकर पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जो केवल कुछ समय के लिए राहत देते हैं। लेकिन अगर इस दर्द का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह फ्रोजन शोल्डर जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है, जिसमें कंधे की गति पूरी तरह रुक जाती है। ऐसे में फिजियोथेरेपी आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है जो न सिर्फ दर्द को जड़ से खत्म करती है, बल्कि कंधे की मांसपेशियों को लचीला बनाकर उसे पूरी तरह से ठीक कर सकती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं

अगर कंधे का दर्द 2-3 दिनों में ठीक न हो या दर्द की वजह से आपकी रात की नींद खराब होने लगे, तो तुरंत किसी अच्छे फिजियोथेरेपिस्ट को दिखाएं। फिजियोथेरेपी एक ऐसा नेचुरल तरीका है जो बिना किसी ऑपरेशन या भारी दवाओं के आपके शरीर को खुद ठीक होने की शक्ति देता है। ध्यान रखें दर्द को सहना बहादुरी नहीं है, सही समय पर सही इलाज करना ही समझदारी है।

पेंडुलम स्ट्रेच से मिलेगी राहत

आप घर पर दो बहुत ही आसान व्यायामों से राहत पा सकते हैं। पहला है पेंडुलम स्ट्रेच – इसमें एक मजबूत मेज का सहारा लेकर आगे झुकें और दर्द वाले हाथ को नीचे ढीला छोडक़र धीरे-धीरे गोल घुमाएं, जैसे घड़ी का पेंडुलम हिलता है।

दर्द क्यों होता है

हमारा कंधा शरीर का सबसे ज्यादा हिलने-डुलने वाला हिस्सा है, इसलिए इसमें चोट या खिंचाव का खतरा भी सबसे अधिक रहता है। अक्सर कंधे की मांसपेशियों में अंदरूनी चोट (रोटेटर कफ), नसों में सूजन या हड्डियों के बीच मौजूद तरल थैली में दिक्कत आने से दर्द शुरू होता है। आजकल घंटों मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करने से गर्दन की नसें खिंच जाती हैं, जिसका सीधा असर कंधों पर पड़ता है। टेंडिनाइटिस, टेंडन में सूजन और चोट के कारण होता है। टेंडिनाइटिस की वजह से व्यक्ति को कोहनी और कंधे के बीच हाथ में दर्द हो सकता है। अगर आपको अक्सर ही कोहनी और कंधे के बीच हाथ में दर्द होता है, तो इस स्थिति को बिलकुल नजरअंदाज न करें। गठिया के रोगियों को जोड़ों और हड्डियों में दर्द की समस्या बनी रहती है। गठिया की वजह से कोहनी और कंधे के बीच हाथ में दर्द हो सकता है। अगर आपको गठिया है तो इसकी वजह से कोहनी और कंधे की बीच हाथ में दर्द हो सकता है।

बदलें बैठने का तरीका

अक्सर कंधे का दर्द हमारी अपनी गलतियों से बढ़ता है। फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह है कि ऑफिस में काम करते समय हर आधे घंटे में अपने कंधों को गोल-गोल घुमाएं (शोल्डर रोल), ताकि मांसपेशियों को आराम मिले। सोते समय बहुत ऊंचा या सख्त तकिया न लगाएं, क्योंकि इससे गर्दन और कंधे की नसों पर दबाव पड़ता है। दर्द होने पर आप गर्म पानी की थैली या बर्फ से सिकाई भी कर सकते हैं। आमतौर पर पुरानी जकडऩ में गर्म सिकाई और ताजी चोट या सूजन में बर्फ की सिकाई ज्यादा फायदा पहुंचाती है। इसके अलावाआहार में ऐसी चीजें खाएं जिनमें कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद हों। इसलिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, अंडे, मछली, दूध और दही का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं कंधे के दर्द के पीछे सोने की मुद्रा भी काफी हद तक असर डालती है। इसलिए हमेशा किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आप अपनी कमर के बल या फिर पेट के बल सोएं। यदि कंधे में दर्द है तो ऐसे में उस तरफ की करवट से ना लेटें।

दीवार पर चढ़ना

दीवार के सामने खड़े होकर अपनी उंगलियों को मकड़ी की तरह धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाएं। ये दोनों तरीके कंधे की जकडऩ को ढीला करते हैं और बिना किसी दवा के वहां खून का बहाव बढ़ाकर दर्द कम करते हैं।

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