राहुल गांधी संग बैठे धनखड़ मचा बवाल, बीजेपी पेश कर रही सफाई!
भाजपा राज में विपक्ष के नेताओं को बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है। दरअसल विपक्षके सवालों से बीजेपी सरकार इस कदर परेशान हो चुकी है जिसकी कोई हद्द नहीं है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में विपक्ष के नेताओं को बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है। दरअसल विपक्षके सवालों से बीजेपी सरकार इस कदर परेशान हो चुकी है जिसकी कोई हद्द नहीं है।
इसी बीच एक बार फिर बीजेपी सत्ताधारी दल ने अपनी सत्ता की हनक दिखाते हुए कुछ ऐसा किया जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई और बीजेपी सरकार की जमकर आलोचना होने लगी। दरअसल पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सोमवार को कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड समारोह में शामिल हुए. धनखड़ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अगली पंक्ति में बैठे थे. जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तीसरी पंक्ति में बैठे देखा गया. इसी बात को लेकर कांग्रेस नाराज है. कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी का अपमान बताया है और प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है.
दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे पहले राहुल गांधी के साथ तीसरी पंक्ति में बैठे हुए दिखाई दिए। बाद में उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बगल में पहली पंक्ति में बैठा दिया गया। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने राहुल गांधी और खड़गे की तीसरी पंक्ति में बैठने वाली तस्वीर साझा करते हुए एक्स पर कहा कि क्या देश में विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों को पूरा करता है? यह बस एक ऐसी सरकार की हताशा को उजागर करता है जो हीन भावना से ग्रस्त है। लोकतंत्र में मतभेद तो बने रहेंगे, लेकिन राहुल गांधी के साथ किया गया यह बर्ताव अस्वीकार्य है।
कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने भी एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का घोर उल्लंघन है! मौजूदा हालात में इसकी उम्मीद करना बेकार है! राहुलगांधी, खड़गे जी। तन्खा ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखते हुए मौजूदा माहौल में सत्ताधारी पार्टी से बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, सत्ताधारी पार्टी की इन छोटी-छोटी हरकतों से लोकतंत्र को ठेस पहुंचती है। हालांकि, इसपर अपनी गलती मानने के बजाय भाजपा ने पूछा कि गांधी ने उपराष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग क्यों नहीं लिया था।
पहले भी गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोहों के दौरान राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ चुका है। अपने वीडियो संदेश में, तन्खा ने कहा कि राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में बैठे देखकर उन्हें आश्चर्य और दुख हुआ। उन्होंने कहा कि जब सुषमा स्वराज और अरुण जेटली विपक्ष के नेता थे, उन्हें याद नहीं है कि तब उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया हो। भारतीय राजनीति में खड़गे और राहुल दोनों का ही विशेष स्थान है और उन्हें पीछे की पंक्तियों में बैठाना उनका नहीं बल्कि राष्ट्र का अपमान है। आप संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में पार्टी के सचेतक मणिकम टैगोर ने अतीत की एक और तस्वीर साझा की है, जिसमें एल.के. आडवाणी अपनी बेटी के साथ पहली पंक्ति में बैठे हुए हैं। तस्वीर में कई केंद्रीय मंत्री और सोनिया गांधी भी उसी पंक्ति में बैठे नजर आ रहे हैं।
टैगोर ने कहा कि यह 2014 की बात है, देखिए तब एलके आडवाणी कहां बैठे थे। अब इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन क्यों? क्या इसलिए कि मोदी और शाह खड़गे और राहुल का अपमान करना चाहते हैं? गणतंत्र दिवस पर विपक्ष के नेताओं का इस तरह अपमान नहीं किया जा सकता। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर कहा कि एक बार फिर कांग्रेस ने विशेषाधिकार और अहंकार, परिवार और पद को जनता से ऊपर रखा है। उनका मानना है कि परिवार तंत्र, संविधान तंत्र से श्रेष्ठ है। बैठने की व्यवस्था एक निर्धारित प्रारूप – वारंट या वरीयता तालिका – के अनुसार होती है। राहुल गांधी के आसपास या पीछे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री भी देखे जा सकते हैं, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस पर कोई मुद्दा नहीं उठाया। राहुल को लगता है कि वह भारत के मालिक हैं? वैसे, वे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में क्यों नहीं आते? उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में वे कहां थे? प्रधान न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में? स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में?।
वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने कहा, यह साफ है कि कैसे, बार-बार, किसी न किसी तरह से यह सरकार विपक्ष के नेता और उनके पद की गरिमा को कम करने की कोशिश करती है, चाहे वह सदन के अंदर हो या बाहर. प्रोटोकॉल का बहुत महत्व होता है. गौरतलब है कि इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद और राहुल गांधी के साथ धनकड़ के बैठने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। और केंद्र में बैठी मोदी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है।



