अरुणाचल CM पेमा खांडू पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच मामले में मुख्य सचिव को बुलाया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) से जवाब मांगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार और रिश्तेदारों की कंपनियों को कथित अवैध सरकारी ठेके दिए जाने के मामले में सीबीआई ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) से जवाब मांगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) से जवाब मांगा. ये कदम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के उस आरोप के बाद उठाया गया जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ जांच में राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच CBI की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर विचार कर रही थी. यह रिपोर्ट कोर्ट के अप्रैल के उस आदेश के बाद दाखिल की गई थी जिसमें खांडू से जुड़े पब्लिक वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट्स के आवंटन में पक्षपात के आरोपों की जांच का निर्देश दिया गया था.
रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि जांच एजेंसी ने राज्य सरकार से रिकॉर्ड हासिल करने में आ रही दिक्कतों का ज़िक्र किया था. कोर्ट ने कहा, “CBI की ओर से 17 जुलाई को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई थी. इसे देखने से पता चलता है कि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के मामले में राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है. इसलिए, मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को नोटिस जारी करना उचित है.”
सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार और रिश्तेदारों की कंपनियों पर सरकारी ठेके अवैध रूप से देने का आरोप लगाया गया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को आदेश दिया था, जिसमें 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके अवैध रूप से दिए गए. कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई से इसकी प्रारंभिक जांच कराने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दो हफ्ते के भीतर प्रारंभिक जांच दर्ज करने और 16 हफ्ते के अंदर अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था.
अब इस पर आज केंद्रीय एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है. सीबीआई द्वारा ये जांच 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सार्वजनिक कार्यों के अनुबंधों और वर्क ऑर्डर की अवधि के दौरान की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन नाम के एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया है, जिसमें भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए गए थे.



