शिक्षा के बाद अब E20 पर घिरी भाजपा, 100 लोगों के साथ PM हाउस का घेराव करेंगे केजरीवाल

जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शिक्षा मंत्री के बाद अब लोगों की नजरें नितिन गडकरी के कामों पर टिकी हुई हैं। दरअसल भाजपा राज में लगभग हर नेता सवालों के घेरे में है। मगर अफ़सोस की बात ये है कि सवाल पूछने वाले लोगों को भाजपाई देश विरोधी बताते हैं।

खैर इसी सियासी हो हल्ले के बीच अब एक बार फिर E-20 पर बवाल तेज हो गया है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि E20 लागू होने के बाद माइलेज में कमी, इंजन की समस्या और पुराने वाहनों में खराबी की शिकायतें बढ़ी हैं।

दरअसल जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दावा किया कि E20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक लगातार कई मामलों को लेकर शिकायत करते आ रहे हैं। उन्होंने बाकायदा शिकायतों की एक लिस्ट पोस्ट की और लिखा कि लोगों को माइलेज में कमी, इंजन के प्रदर्शन में गिरावट, E20 ईंधन का वाहनों पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता, 2023 से पहले के वाहनों में इंजन की कम्पैटिबिलिटी, कोल्ड-स्टार्ट की समस्या और इंजन के तेजी से घिसने की शिकायतें
पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होना,

फ्यूल लाइन में जंग लगना और रबर के पुर्जों में दरारें आने की बढ़ती घटनाएं, आम उपभोक्ताओं के पास E20 पेट्रोल के अलावा व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा गया। खैर आपको बता दें कि इस मामले को लेकर कई नेताओं ने जांच की मांग की है।

इसी बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नाम शुरू की गई एक ऑनलाइन याचिका पर 2,33,238 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

केजरीवाल चार अगस्त को दोपहर 12 बजे सौ लोगों के समूह के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करेंगे। यह याचिका इथेनॉल नीति में कथित खामियों को उजागर करने के लिए शुरू की गई थी। केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री को यह याचिका सौंपना चाहते हैं। साथ ही पीएम से चर्चा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि ई-20 पेट्रोल केंद्र सरकार जबरदस्ती जनता पर थोप रही है, सवालों का जवाब नहीं दे रही है। लोगों के वाहन खराब हो रहे हैं, उनका माइलेज कम हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी दबाव में मोदी सरकार काम कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया अमेरिका के दबाव में ई 20 पेट्रोल को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एथेनॉल का बहुत बड़ा उत्पादक है और केंद्र सरकार की अमेरिका के साथ जो ट्रेड डील हुई है। उसमें उसके तहत अगले 5 साल में बड़े स्तर पर भारत में वह एथेनॉल की आपूर्ति करना चाहता है।

केजरीवाल ने कुछ दिन पहले ही यह ऑनलाइन याचिका शुरू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य इथेनॉल नीति से जुड़ी चिंताओं को सामने लाना था। 2,33,238 हस्ताक्षरों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि बड़ी संख्या में लोग इस विषय पर अपनी राय रखते हैं। वहीं केजरीवाल के इस ऐलान से पहले आप नेता संजय सिंह भी लोगों से बड़ी अपील कर चुके हैं।

कुल मिलाकर E-20 को लेकर एक बार फिर भाजपा सरकार सवालों के घेरे में है। नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। अब देखना ये होगा की भाजपा सरकार इससे कैसे निपटती है। फिलहाल तो सभी की निगाहें केजरीवाल के कल होने वाले मार्च पर टिकी हुई हैं।

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