सैयद अली ने बदली ग्रामीणों की आर्थिक सोच

चेंजमेकर प्रोजेक्ट से दी बैंकिंग व वित्तीय साक्षरता

  • अली की लखीमपुर खीरी के एक किसान से हुई बातचीत ने बदली सोच
  • जिस दिन लोग अपनी पहली आर्थिक गलती करने से पहले ही वित्तीय शिक्षा प्राप्त करने लगेंगे, उस दिन हमारा प्रयास सफल हो जायेगा : अली

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जब अधिकांश छात्र बोर्ड परीक्षा और करियर की तैयारी में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में लखनऊ के सैयद अली हुसैन रिजवी ने एक ऐसा अभियान शुरू किया जिसने हजारों ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सोच बदलने का काम किया। महज कक्षा 12 के छात्र अली ने यह महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समस्याओं की जड़ केवल जानकारी की कमी नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसे की कमी भी है। इसी सोच से उन्होंने चेंजमेकर प्रोजेक्ट की शुरुआत की। अली बताते हैं कि लखीमपुर खीरी के एक गांव में एक किसान से हुई बातचीत ने उनकी सोच बदल दी। किसान ने बताया कि वह 2० प्रतिशत ब्याज पर साहूकार से पैसा लेना पसंद करता है, क्योंकि बैंक तक पहुंचना, दस्तावेज जुटाना और समय निकालना उसके लिए संभव नहीं है। अली का मानना है कि यह किसान की मजबूरी थी, न कि उसकी गलती। यहीं से उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को वित्तीय रूप से जागरूक करने का संकल्प लिया।
कक्षा 1० में शुरू किए गए चेंजमेकर प्रोजेक्ट के तहत अली ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सीधे गांवों में जाकर वित्तीय साक्षरता कार्यशालाएं आयोजित कीं। इन कार्यशालाओं में किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को यह समझाया गया कि साहूकारों से महंगा कर्ज लेने के बजाय बैंकिंग सेवाओं का सही उपयोग कैसे किया जा सकता है। उन्होंने एफएलईएटी- फाईनेंसियल लिटरेसी एजूकेशन एंड टे्रनिंग मॉडल तैयार किया, जिसके माध्यम से अब तक 2० से अधिक कार्यशालाओं के जरिए 15 हजार से अधिक परिवारों तक वित्तीय जागरूकता पहुंचाई जा चुकी है। मैदानी कार्यों के साथ-साथ अली ने द मनी क्लॉज नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किया, जिसका उद्देश्य युवाओं को आसान भाषा में अर्थशास्त्र और वित्त की जानकारी देना है। इस प्लेटफॉर्म के आज 2.5 लाख से अधिक पाठक भारत और विदेशों में हैं। वहीं, इसका वित्तीय साक्षरता टूलकिट लगभग 7,500 लोगों तक पहुंच चुका है। यह मंच मौद्रिक नीति, पूंजी बाजार, माइक्रो फाइनेंस और व्यवहारिक अर्थशास्त्र जैसे विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। इस वर्ष द मनी क्लॉज ने पहली बार भारत के बाहर नाइजीरिया में 15० से अधिक विद्यार्थियों के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यशाला आयोजित की। इस ऑनलाइन सत्र में अली ने लखनऊ से जुडक़र विद्यार्थियों से संवाद किया। अली का कहना है कि नाइजीरिया और भारत के गांवों की समस्याएं लगभग एक जैसी हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वित्तीय बहिष्करण केवल स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक समस्या है।

सामाजिक कार्यों के साथ शैक्षणिक उपलब्धियां भी कमाल की

सामाजिक कार्यों के साथ-साथ अली की शैक्षणिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय हैं। उन्होंन आईसीएसई बोर्ड परीक्षा में 98.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-8 हासिल की। वह ला मार्टिनियर कॉलेज, लखनऊ के वाइस कैप्टन, डिबेट कैप्टन और अपने बैच में दूसरे स्थान पर हैं। हाल ही में उन्होंने इंडियन डिबेटिंग लीग वल्र्ड इकोनॉमिक्स ब्रिटिश पार्लियामेंट्री डिबेट-26 में फाइनल बेस्ट स्पीकर का खिताब भी जीता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोजगार बाजार पर अली द्वारा लिखा गया शोधपत्र ऑक्सफोर्ड जनरल ऑफ स्टूडेंट स्कॉलरशिप में प्रकाशित हुआ। इसमें उन्होंने बताया कि एआाई के कारण रोजगार के स्वरूप में तेजी से बदलाव आ रहा है और केवल रोजगार के आंकड़ों से वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। जब अली से पूछा गया कि अगले दस वर्षों में सफलता उनके लिए क्या होगी, तो उन्होंने कहा—जिस दिन लोग अपनी पहली आर्थिक गलती करने से पहले ही वित्तीय शिक्षा प्राप्त करने लगेंगे, उस दिन मुझे लगेगा कि हमारा प्रयास सफल हो गया।

जहां बैंक नहीं पहुंचते वहां पहुंचा चेंजमेकर प्रोजेक्ट

लखनऊ के सैयद अली हुसैन रिजवी ने गांव-गांव जाकर 15 हजार से अधिक परिवारों को वित्तीय साक्षरता का पाठ पढ़ाया, द मनी क्लॉज प्लेटफॉर्म के जरिए भारत से लेकर नाइजीरिया तक फैलाई आर्थिक जागरूकता। कक्षा 1० में शुरू किया चेंजमेकर प्रोजेक्ट, आज 2० से अधिक गांवों में पहुंचा अभियान, 15 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता से जोड़ा, द मनी क्लॉज प्लेटफॉर्म के 2.5 लाख से अधिक पाठक।

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