ताहिर हुसैन बेल केस: अदालत में सुनवाई टली, 10 जून को होगा अगला फैसला
इस साल की शुरुआत में 29 जनवरी को, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर के साथ-साथ अथर खान और सलीम मलिक उर्फ मुन्ना की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिन्हें हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इस साल की शुरुआत में 29 जनवरी को, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर के साथ-साथ अथर खान और सलीम मलिक उर्फ मुन्ना की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिन्हें हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी.
दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस अमित शर्मा ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अब इस मामले की सुनवाई 10 जून को कोर्ट की दूसरी बेंच करेगी. ताहिर UAPA के तहत दिल्ली हिंसा के मामले में बड़ी साजिश के आरोपियों में से एक हैं. वह कोर्ट से नियमित जमानत दिए जाने की गुहार लगा रहे हैं. उनकी पिछली जमानत याचिका ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दी थी.
जमानत याचिका जस्टिस सौरभ बनर्जी और जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई थी. इसके बाद, जस्टिस अमित शर्मा ने जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि इस मामले को ऐसी बेंच के सामने लिस्ट किया जाए जिसमें जस्टिस अमित शर्मा शामिल न हों.
6 साल हिरासत में हैं ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन की ओर से वकील राजीव मोहन, सोनल सरदा के साथ पेश हुए. वकील तारा नरूला ने ताहिर की ओर से जमानत याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका गलत तरीके से खारिज कर दी थी. इसमें यह भी कहा गया है कि ताहिर 6 साल से भी अधिक समय से हिरासत में हैं.
इस साल की शुरुआत में 29 जनवरी को, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर के साथ-साथ अथर खान और सलीम मलिक उर्फ मुन्ना की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिन्हें हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी. एडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कानूनी प्रावधानों को देखते हुए इन याचिकाओं में कोई दम नहीं है.
कोर्ट पहले भी खारिज कर चुका है याचिका
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को इस मामले में 5 आरोपियों को जमानत दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. ASJ बाजपेयी ने 29 जनवरी को दिए अपने आदेश में कहा, “अब, सह-आरोपियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, जब इस कोर्ट ने एक बार यह राय बना ली है कि पहली नजर में आवेदक के खिलाफ मामला बनता है, तो अब पिछले आदेश की समीक्षा करके कोई दूसरी राय नहीं बनाई जा सकती.”
ताहिर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, “कोर्ट को इस याचिका में कोई दम नहीं लगता, और इसे खारिज किया जाता है.” कोर्ट ने इससे पहले भी 30 मार्च, 2024 को ताहिर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पहली नजर में सच लगते हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “पिछले आदेश में, इस कोर्ट ने यह भी पाया था कि आवेदक के खिलाफ पहली नजर में मामला बनता था और UAPA की धारा 43D(5) के तहत रोक लागू थी, इसलिए, आवेदक का मामला जमानत के लिए उपयुक्त नहीं था.”
इस मामले में ताहिर हुसैन, उमर खालिद, शरजील इमाम, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ सफूरा जरगर, इकबाल तन्हा, इशरत जहां और अन्य आरोपी हैं. उन पर IPC और UAPA के तहत चार्जशीट दाखिल किया गया है.



