Ramayana में 11 किरदार निभाने वाले मुस्लिम एक्टर की हालत हुई बेबस, गुजारा करना भी मुश्किल
रामानंद सागर की 'रामायण' 80 के दशक के सबसे मशहूर टेलीविजन शो में से एक रही। साल 1987 में आया ये शो दर्शकों के दिलों में घर कर गया था..साथ ही, इसने उस दौर में रिकॉर्ड भी तोड़ दिए थे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रामानंद सागर की ‘रामायण’ 80 के दशक के सबसे मशहूर टेलीविजन शो में से एक रही। साल 1987 में आया ये शो दर्शकों के दिलों में घर कर गया था..साथ ही, इसने उस दौर में रिकॉर्ड भी तोड़ दिए थे।
उस वक़्त, जब ये शो टीवी पर आता था, तो मानों लोग बिना पलक झपकाए ही इसे देखा करते थे। सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था, दुकानें बंद रहती थीं और लोग अपने काम-धाम छोड़कर हाथ जोड़कर टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे। अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी समेत शो के तमाम कलाकारों ने ‘रामायण’ में अपने किरदारों को लेकर खूब पॉपुलैरिटी हासिल की। कोविड के दौर में भी जब ये शो री-रिलीज हुआ तो आलम ऐसा ही देखने को मिला। आज भी लोग इन सितारों को भगवान के रूप में ही पूजा करते हैं। तो, इस सीरियल का एक हीरो ऐसा भी रहा..जिसने ‘रामायण’ में 11 किरदारों को निभाया था।
दिलचस्प बात ये है कि, ये एक्टर एक मुस्लिम हीरो भी था। तो, इस मशहूर सीरियल में काम करने के बावजूद इस हीरो की हालत ऐसी हो गई कि, इन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज होना पड़ा। पैसे की कमी के कारण इनका अपना गुजारा करना तक मुश्किल हो गया। दरअसल, जिस एक्टर की बात हम 4pmbollywood की इस रिपोर्ट में कर रहे हैं..उनका नाम असलम खान है। जिन्होंने रामानंद सागर की ‘रामायण’ में 11 रोल प्ले किये थे।
ख़ास बात ये रही कि, रामायण में असलम खान की एंट्री भी अचानक हुई थी। हुआ यूं कि, समुद्र देव के किरदार के लिए पहले किसी और एक्टर को चुना गया था, लेकिन आख़िरी समय पर उसने रोल करने से मना कर दिया। तब बैकअप के तौर पर असलम खान को केवल ऑन-स्क्रीन डायलॉग बोलने के लिए बुलाया गया। लेकिन, उनकी दमदार आवाज और एक्टिंग ने दर्शकों का दिल ही जीत लिया।
फिर, रामायण के बाद असलम खान ने ‘अलिफ लैला’, ‘श्री कृष्णा’, ‘सूर्यपुत्र कर्ण’, ‘मशाल’ और ‘हवाएं’ जैसे पॉपुलर शोज में भी अहम किरदार निभाए थे। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया, लेकिन उनकी किस्मत में ये सक्सेस लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। छोटे पर्दे की दुनिया में नाम कमाने के बावजूद, उन्हें और ज़्यादा मौक़े नहीं मिल सके। एक्टर को इंडस्ट्री में कोई काम नहीं मिला और उन्होंने 2002 में इस फील्ड को छोड़ने का फैसला कर लिया। आज वो लाइमलाइट से पूरी तरह दूर हैं।
असलम ख़ान को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। वो एक समय पर पाई-पाई को मोहताज हो गए थे। उन्हें गुज़र-बसर करने में भी परेशानी आई थी। बात अब असलम खान की हो ही रही है तो, एक्टर के बारे में आपको और भी विस्तार से जानकारी दे देते हैं। एक्टर का बचपन बेहद आम माहौल में बीता। परिवार में कला का माहौल भले न रहा हो, लेकिन किस्से-कहानियों, कविताओं और लोक-नाटकों ने उनके भीतर एक्टिंग का बीज जरूर बो दिया।
अपने स्कूल के दिनों में वो नाटकों में हिस्सा लेते, डायलॉग याद करते और स्टेज पर आते ही जैसे बदल जाते। यही वो समय था जब उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग उनके लिए शौक नहीं, एक पुकार है। फिर, जवानी में उन्होंने रंगमंच की ओर रुख किया। छोटे-छोटे ग्रुप्स के साथ प्रैक्टिस, रिहर्सल और स्टेज शो ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। रंगमंच ने उनकी आवाज़, बॉडी लैंग्वेज को तराशा। बाद में यही बुनियाद उनके फिल्मी करियर की ताकत बनी। हालांकि, मुंबई का सफर उनके लिए आसान नहीं था। असलम खान भी उन हजारों सपनों के साथ मायानगरी पहुंचे थे। ऑडिशन दर ऑडिशन, कभी कॉल-बैक तो कभी लंबा इंतज़ार—यह सब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया। कई बार उन्हें छोटे-मोटे विज्ञापनों या भीड़ के सीन में जगह मिली, पर वो जानते थे कि यह सिर्फ जर्नी की शुरुआत है, मंज़िल नहीं।
इस स्ट्रगल के बीच उन्होंने एक्टिंग स्किल्स में हिस्सा लिया, बड़े-बड़े कलाकारों से सीखा और अपनी कमजोरियों पर काम किया। वो डायलॉग बोलने के अंदाज़ के साथ-साथ मौन की एक्टिंग पर भी ध्यान देते—क्योंकि वो मानते थे कि कई बार खामोशी सबसे गहरी बात कहती है। असलम खान को पहला मौक़ा एक सोशल इशू पर आधारित फिल्म में सपोर्टिंग रोल के रूप में मिला। किरदार छोटा था, पर सबकी नज़रों में आ गया था। उनके कुछ सीन ने दर्शकों और लोगों का ध्यान खींचा। यही वह वक्त था, जब फिल्म इंडस्ट्री ने इस नए चेहरे को अच्छे से नोटिस किया।
इसके बाद उन्हें ऐसे किरदार मिलने लगे, जिनमें भावनात्मक गहराई की जरूरत होती थी—पिता, दोस्त, टीचर और आम आदमी जैसे किरदार। असलम खान की खासियत यह रही कि वो हर भूमिका को असली जीवन के एक्सपीरियंस से जोड़कर निभाते। दर्शकों को उनके किरदारों में ‘एक्टर’ नहीं, ‘इंसान’ दिखाई देता था। समय के साथ असलम खान ने अपने किरदारों में और भी बदलाव लाए। उन्होंने पारिवारिक ड्रामा, सोशल मैसेज वाली फिल्में, थ्रिलर और कभी-कभी हल्की-फुल्की कॉमेडी में भी काम किया। उनकी आँखों की भाषा, डायलॉग बोलने की सादगी और भावनाओं की सच्चाई ने उन्हें अलग पहचान दी।
वहीं, हर एक्टर की तरह असलम खान के करियर में भी उतार-चढ़ाव आए। कुछ फिल्में उम्मीद के मुताबिक नहीं चलीं, कुछ भूमिकाएं उम्मीद के मुताबिक प्रभाव न छोड़ सकीं। लेकिन उन्होंने इन असफलताओं को सीख में बदला। धीरे-धीरे वो उन फिल्मों का हिस्सा बने जिनमें सामाजिक मुद्दों होता। उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद को सामने लाते। यही उन्हें दर्शकों के बीच पॉपुलर बनाता गया। इसके चलते, कई निर्देशकों ने उनके साथ बार-बार काम करना पसंद किया, क्योंकि वे किरदार की तैयारी में गहराई से उतरते थे।
समय के साथ उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर भी कदम बढ़ाए। वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्मों में काम करके उन्होंने न्यू ऑडियंस तक पहुंच बनाई। यहाँ उन्हें और अधिक काम करने का मौका मिला। बहरहाल, आज के समय में वो मायानगरी से दूर उत्तर प्रदेश के झांसी में रहते हैं और एक मार्केटिंग फर्म में काम कर रहे हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी हैं, जो अब बड़े हो चुके हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग उनके निभाए गए किरदारों को याद करते हैं और ये सवाल भी उठाते हैं कि इतने टैलेंट के बावजूद उन्हें वह मुकाम क्यों नहीं मिला? जिसके वो हकदार थे।



