चुनी सरकार के पास पूरे अधिकार नहीं
पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला बोले- राज्य का दर्जा बहाल हो

- बोले- भारत की ताकत उसके धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र में है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा। नेशनल कॉन्फ्रें स के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वहां चुनी हुई सरकार तो है, लेकिन उसके पास वे अधिकार नहीं हैं जो होने चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े द्वारा राज्य का दर्जा न होने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री पर हुए हमले से जोडऩे संबंधी सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव इस आश्वासन के साथ कराए गए थे कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि चुनी हुई सरकार है, लेकिन उसके पास आवश्यक अधिकार नहीं हैं। चुनाव इस वादे के साथ हुए थे कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और लोगों की समस्याएं दूर की जाएंगी।
कई साल बीत गए वह राज्य का दर्जा कहां है? अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन संसद और सुप्रीम कोर्ट दोनों के सामने दिया गया था। जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा न होने के कारण अपराध बढऩे के सवाल पर उन्होंने कहा कि अपराध पूरे देश में होते हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती गरीबी और वैश्विक हालात से आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश में हर जगह अपराध होते हैं। गरीबी बढ़ रही है और वैश्विक स्थिति, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध के कारण, हमें भी प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई से सबसे ज्यादा परेशानी मध्यम वर्ग को होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई साजिश है तो उसे सामने आना चाहिए। लेकिन मैं केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से निवेदन करता हूं कि जब वे बार-बार कहते हैं कि स्थिति पूरी तरह सुधर गई है, तो यह भी देखें कि क्या माहौल वास्तव में इतना सुरक्षित हो गया है कि हम सम्मान के साथ स्वतंत्र रूप से घूम सकें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जमानत दिए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को देश को बेहतर बनाने के लिए आगे आना चाहिए। लोग आगे आएं और इस देश को बेहतर बनाने में मदद करें, ताकि यहां लोग सम्मान और मानवता के साथ रह सकें। हमें नफरत छोडऩी होगी। कश्मीरी पंडितों के लंबे समय से विस्थापन का जिक्र करते हुए उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और मेल-मिलाप की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे हिंदू भाई अब भी अपने घरों से दूर रह रहे हैं। यह कब तक चलेगा? 34 साल हो गए हैं। अब समय आ गया है कि हम साथ मिलकर रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और भारत की ताकत उसके धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र में है। अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी राय अलग हो सकती है, लेकिन भारत एक स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।
फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
जम्मू कश्मीर में क्रिकेट संघ से जुड़े बहु करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले के मामले में श्रीनगर की एक अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह आदेश उस समय जारी किया गया जब आरोप तय करने की सुनवाई के दौरान फारूक अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने इस मामले में पहले 12 मार्च की तारीख तय की थी, जिस दिन आरोप तय किए जाने थे। बता दें कि इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया था। हालांकि उसके बाद से अब तक आरोप तय करने की प्रक्रिया में देरी होती रही और मुकदमे की औपचारिक सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि फारूक पहले भी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले में उनका नाम जानबूझकर घसीटा जा रहा है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
जब पूर्व सीएम सुरक्षित नहीं तो आम आदमी का क्या : सुरिंदर चौधरी
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले के बाद केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सवाल किया कि अगर इतने प्रभावशाली नेता को निशाना बनाया जा सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर इसका क्या असर पड़ेगा। एएनआई से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि असंबंधित मुद्दों पर राजनीतिक बहस में उलझने के बजाय, हमले के कारणों को समझने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। चौधरी ने कहा कि आज लोग जो कुछ भी कह रहे हैं, हम उनसे पूछना चाहेंगे कि इधर-उधर की बातें करने के बजाय, उन्हें यह बताना चाहिए कि यह हमला क्यों हुआ। अगर फारूक जैसे उच्च सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति पर हमला हो सकता है, तो आम आदमी की क्या हालत होगी? गुरुवार को फारूक ने घटना का ब्यौरा देते हुए केंद्र से जम्मू-कश्मीर की स्थिति सुधारने पर ध्यान देने का आग्रह किया।



