मदद की गुहार लगाता रहा शख्स, मोबाइल में व्यस्त दिखे सिद्धार्थनगर DM, योगी राज में अफसरों की मनमानी

जहां एक शख्स अपनी माँ के बंदर के हमले में घायल होने की शिकायत लेकर डीएम साहब के पास पहुँचा। हाथ जोड़कर, गिड़गिड़ाते हुए अपनी तकलीफ बता रहा था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: योगी राज में एक तरफ जहां जनता बदहाल है। उनके समस्याओं समाधान नहीं हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ समस्या का समाधान करने के बजाय कुर्सी तोड़ रहे हैं।

योगी राज में मानों अफसरों की चांदी हो काम धाम करना नहीं है बस गरीबों मजलूमों पर रौब झाड़ना ही इनका मकसद बन चुका हो। खैर इसी बीच एक ऐसे ही अफसर का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसकी जमकर आलोचना भी हो रही है। दरअसल यह वीडियो है सिद्धार्थनगर के डीएम साहब है।

जहां एक शख्स अपनी माँ के बंदर के हमले में घायल होने की शिकायत लेकर डीएम साहब के पास पहुँचा। हाथ जोड़कर, गिड़गिड़ाते हुए अपनी तकलीफ बता रहा था। लेकिन डीएम साहब मस्ती से च्यूंगम चबाते हुए फोन में व्यस्त रहे। उनकी नजर फरियादी पर नहीं, स्क्रीन पर थी। मानों वो देश हित में कोई बड़ा काम कर रहे हों। खैर वीडियो वायरल होते ही हड़कंप मच गया,

क्या यह लोकतंत्र है या राजा-प्रजा वाला सिस्टम? योगी राज में इस कदर अफसर मनमानी हो चुके हैं जिसकी कोई हद्द नहीं है। ऐसी घटनाएँ यूपी में नई नहीं हैं। योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था, सड़कें, बिजली और विकास के लिए बहुत काम किया लेकिन कागजों में। कहने को तो अपराधियों पर सख्ती, निवेश लाना और योगी का सख्त इमेज इनकी ताकत रही है, लेकिन ये सब कहने की बातें हैं।

अफ़सोस की बात तो ये है कि आम आदमी जब सरकारी दफ्तर जाता है तो अभी भी पुरानी सोच का सामना करता है। अधिकारी खुद को मालिक समझते हैं, जनता को भिखारी! जनसुनवाई जैसी व्यवस्था लोकतंत्र की सुंदर बात है, लेकिन अगर उसमें अधिकारी फोन देखते रहें तो इसका क्या मतलब?

कुलमिलाकर अफसरों को जवाबदेह बनाना, उनके काम की निगरानी करना और संवेदनशीलता सिखाना जरूरी है। सिर्फ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट और लॉ एंड ऑर्डर से लोकतंत्र पूरा नहीं होता। जब तक छोटे-छोटे स्तर पर आम आदमी को इंसान समझा नहीं जाएगा, तब तक “राजशाही” जैसा एहसास बना रहेगा। लोकतंत्र में हर नागरिक का हक है कि उसकी बात सुनी जाए, सम्मान से। फरियादी की माँ घायल थी, वह मदद माँगने आया था।

अगर डीएम ध्यान नहीं दे रहे थे तो यह संवेदनहीनता है। कहीं न कहीं ये योगी सरकार की लापरवाही का भी नतीजा है। अगर ऐसे असफसरों पर कायदे से एक्शन लिया जाए तो यह एक उदाहरण बन जाए जिससे अधिकारीयों को सबक मिले और ऐसी लापरवाही बरतने से पहले सौ बार सोचना पड़े। मगर अफ़सोस की बात तो ये है कि सरकार ऐसे मामलों को ऐसे नजरअंदाज करती है जैसे मोदी जी गरीबों को करते हैं। या फिर योगी सरकार ने अफसरों को खुली छूट दे रखी है कि बस बड़े लोगों की बातें सुने और उनकी समस्या का समाधान करें और मजबूरों, गरीबों को अनदेखा करे।

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