जोड़ों का दर्द सर्दियों में राहत देंगे ये योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सर्दियों के मौसम में शरीर की जकडऩ, जोड़ों में दर्द और हड्डियों की कमजोरी आम समस्या बन जाती है। ठंडी हवा के कारण शरीर का ब्लड सर्कुलेशन धीमी हो जाती है और हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण भी कम होने लगता है। ऐसे में दवाइयों के बजाय अगर आप योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो न केवल हड्डियों की मजबूती बढ़ती है बल्कि शरीर लचीला और ऊर्जावान भी बना रहता है। योग सिर्फ शरीर को लचीला नहीं बनाता बल्कि हड्डियों की नींव को भी मजबूत करता है। सर्दियों में अगर आप रोजाना 15-20 मिनट इन आसनों को करें, तो आपको न सिर्फ दर्द से राहत मिलेगी बल्कि जोड़ों में लचीलापन और ऊर्जा भी महसूस होगी।
ताड़ासन
ताड़ासन शब्द ताड़ के वृक्ष से लिया गया है। इसीलिए, इसे अंग्रेजी में क्कड्डद्यद्व ञ्जह्म्द्गद्ग क्कशह्यह्लह्वह्म्द्ग कहते हैं। जिस प्रकार से ताड़ का पेड़ एक सीध में खड़ा रहता है उसी प्रकार से ताड़ासन योग किया जाता है। यह एक बेहतरीन योगासन है, जिसे आप आसानी से अपने घर में कर सकते हैं। यह आसन हड्डियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। पैरों, घुटनों और एडिय़ों में खिंचाव देकर उन्हें मजबूत करता है। शरीर के पोस्चर में सुधार लाता है। अभ्यास के लिए पैरों को मिलाकर खड़े हों, हाथों को ऊपर उठाएं और एडिय़ों पर उठ जाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए पूरा शरीर खींचें। 10-15 सेकंड तक इस स्थिति में रहें। इसके साथ ही यह आपके बैलेंस को बेहतर बनाता है। जिनकी लंबाई नहीं बढ़ रही है उन्हें ताड़ासन नियमित रूप से करना चाहिए।
भुजंगासन
भुजंगासन या सर्प मुद्रा लोकप्रिय योग आसनों में से एक है। हठ योग में भुजंगासन का विशेष महत्व रहा है क्योंकि यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से शरीर की सभी प्रणालियों को लाभ पहुंचाता है। भुजंगासन, नाम संस्कृत शब्द ‘भुजंगा’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘सांप’ या ‘सर्प’ और ‘आसन’ का अर्थ है ‘आसन’। भुजंगासन पेट को कम करने और रीढ़ को मजबूत करने में मदद कर सकता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेट जाएं, हथेलियों को कंधों के पास रखें और सांस लेते हुए सिर व सीना ऊपर उठाएं। 10-15 सेकंड तक रुकें, फिर धीरे से नीचे आएं। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। हड्डियों और मांसपेशियों में रक्त प्रवाह बढ़ाता है। पीठ और कमर के दर्द में राहत देता है।
वृक्षासन
वृक्षासन पैरों, टखनों और घुटनों की हड्डियों को मजबूत करता है। शरीर के संतुलन और एकाग्रता को बढ़ाता है। और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव में सहायक है। अभ्यास के लिए एक पैर पर खड़े हों और दूसरे पैर को जांघ पर रखें।हाथों को ऊपर जोड़ें और ध्यान केंद्रित रखें। 20 सेकंड तक मुद्रा में रहें। शुरुआत में किसी भी प्रकार के योगासन का अभ्यास किसी विशेषज्ञ की निगरानी में करना चाहिए। अगर आप ओवरवेट हैं यानी आपका वजन काफी ज्यादा है, आपको इस आसान को करने से बचना चाहिए। गठिया, माइग्रेन, अनिद्रा और रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों को इस आसन को नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को वर्टीगो यानी चक्कर आने की समस्या होती है, उन्हें भी इस योगासन का अभ्यास करने से बचना चाहिए।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंगद हैं। इस आसन का अभ्यास जांघों, घुटनों और कूल्हों की हड्डियों को मजबूत करता है। शरीर के दोनों ओर का संतुलन बनाए रखता है। कैल्शियम और विटामिन डी के अवशोषण में मदद करता है। दोनों पैरों को फैलाकर खड़े हों, एक हाथ ऊपर और दूसरा पैर की उंगलियों की ओर झुकाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए 15 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें, फिर पक्ष बदलें।



