ट्रंप की योजना पर पड़ा पानी? मुज्तबा खामेनेई के फैसलों से जंग का रुख बदला

खामेनेई की हत्या के बाद ईरान की कमान संभालने वाले मुज्तबा खामेनेई के 5 बड़े फैसलों ने अमेरिका की रणनीति को चुनौती दे दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और नई सैन्य रणनीति से युद्ध का समीकरण बदल गया है।

4pm न्यूज नेटवर्क: ईरान में सत्ता और युद्ध दोनों को लेकर हालात अचानक बदल गए हैं। 28 फरवरी को ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद यह माना जा रहा था कि तेहरान की ताकत कमजोर पड़ जाएगी और अमेरिका व इजराइल जल्दी ही युद्ध खत्म कर ईरान में नया नेतृत्व तलाश लेंगे।

उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बयान दिया था कि उन्होंने अपने मन में नए नेता का चयन कर लिया है और सही समय आने पर उसका ऐलान किया जाएगा। लेकिन युद्ध के 34वें दिन तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि अमेरिका इस संघर्ष से कैसे बाहर निकलेगा। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की नई रणनीति ने अमेरिका की योजनाओं को उलझा दिया है।

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अमेरिका में भी उठने लगे सवाल

अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन के पास युद्ध से बाहर निकलने का साफ रास्ता नजर नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, अमेरिका पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव उतना ही बढ़ेगा।

ट्रंप को क्यों देना पड़ा सफाई भरा भाषण

युद्ध के 34वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश को संबोधित करना पड़ा। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए इस युद्ध में उतरना जरूरी था। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका इस संघर्ष में शामिल नहीं होता तो भविष्य में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। हालांकि उनके हालिया बयान पहले के बयानों से काफी अलग नजर आ रहे हैं। पहले जहां सत्ता परिवर्तन की चर्चा हो रही थी, वहीं अब अमेरिका की रणनीति सीमित सैन्य दबाव बनाने की दिखाई दे रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा

इस युद्ध में सबसे बड़ा रणनीतिक मोर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिका का सीधे तौर पर होर्मुज से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते की स्थिति में होर्मुज को दोबारा खोलने की बात कही है। इससे साफ है कि इस रास्ते को लेकर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों में दबाव बना हुआ है।

मुज्तबा खामेनेई के 5 फैसले जिन्होंने जंग को बदल दिया

पिता की हत्या के करीब 10 दिन बाद सुप्रीम लीडर बने मुज्तबा खामेनेई ने कुछ ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने इस युद्ध को लंबा और जटिल बना दिया।

1. शुरुआत में ही होर्मुज की नाकेबंदी

मुज्तबा खामेनेई ने युद्ध के सिर्फ 6 दिन के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का फैसला कर लिया। इससे पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई और कई देशों में बाजार प्रभावित हुए।

2. वीडियो संदेश से दूरी

युद्ध के दौरान मुज्तबा खामेनेई ने कोई वीडियो संदेश जारी नहीं किया। उनकी तरफ से सिर्फ लिखित बयान सामने आए। माना जा रहा है कि यह कदम उनकी लोकेशन को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया।

3. सेना की नई रणनीति

ईरान ने अपनी सेना को छोटे-छोटे यूनिट में बांट दिया है। कई जगह स्थानीय कमांडरों को खुद फैसले लेने की छूट दी गई है। इससे युद्ध को जल्दी खत्म करना मुश्किल हो गया है।

4. ब्रिटेन को दिया कड़ा संकेत

जब ब्रिटेन ने अमेरिका को सैन्य मदद देने के लिए चागोस द्वीप स्थित अपने बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी, तो ईरान ने वहां हमला कर यह संदेश दिया कि उसकी पहुंच दूर तक है। इसके बाद ब्रिटेन ने इस संघर्ष से दूरी बना ली।

5. मजबूत कूटनीतिक नेटवर्क

ईरान ने अपने दूतावासों और कम्युनिकेशन सिस्टम को सक्रिय कर दिया है। अलग-अलग देशों में मौजूद दूतावास लगातार आधिकारिक बयान जारी कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की जा सके।

आगे क्या हो सकता है

मौजूदा हालात में यह संघर्ष सिर्फ सैन्य लड़ाई नहीं रह गया है। इसमें कूटनीति, वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार भी शामिल हो चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव जल्द खत्म होगा या आने वाले समय में यह और बड़ा रूप ले सकता है।

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