ईरान पर ट्रंप का दबाव, चीन की एंट्री से बढ़ा तनाव-मिडिल ईस्ट बड़ी जंग की ओर?
दावोस सम्मेलन के खत्म होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा ध्यान एक बार फिर से ईरान पर आ गया है। एक ओर जहां अमेरिका के 10 युद्ध पोत मिडिल की समुंद्र में मंडरा रहे हैं

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दावोस सम्मेलन के खत्म होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा ध्यान एक बार फिर से ईरान पर आ गया है। एक ओर जहां अमेरिका के 10 युद्ध पोत मिडिल की समुंद्र में मंडरा रहे हैं और टॉमहॉक मिसाइलों का रुख ईरान की ओर है तो वहीं ईरान भी आँखों में खौफ नहीं, बल्कि खाक में मिला देने वाला जज्बा पेश कर रहा है।
ट्रंप ने परमाणु समझौते के लिए जल्द से जल्द मेज पर आने की बात कही है तो वहीं ईरान ने भी कहा है कि वो बातचीत करने को तैयार है लेकिन इसके लिए इज्जत और तमीज से पेश आना होगा, वरना फारस की खाड़ी को अमेरिकी फौज का कब्रिस्तान बना देंगे। इस सबके बीच चीन की इंट्री ने पूरे मामले को और भी गरम कर दिया है। ऐसे में ईरान न सिर्फ मजबूत होता दिख रहा है बल्कि मिडिल ईस्ट एक बहुत बड़ी जंग की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। कैसे पूरे मामले में चीन की इंट्री हुई और कैसे अमेरिका को बैकफुट पर वापस जाना पड़ सकता है।
ईरान की खामेनेई सरकार अपने ही देश में गिरती इकोनॉमी और मंहगाई से जूझ रही है। पूरे देश में गरीबी, महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। गृह युद्ध जैसी स्थिति है, हयूमन राइट्स संगठनों की ओर से जो रिपोर्ट्स सामने आई है उसमें 10 हजार से ज्याद लोगों के मारे जाने की खबर है तो वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति लागातार ईरान पर दवाब बनाए हुए हैं। ट्रंप ने साफ़ शब्दों में ईरान को डराते हुए कहा है कि उसके पास अब सिर्फ दो ही रास्ते बचे हैं या तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए नया समझौता कर ले, वरना उसे अब तक के सबसे भयानक सैन्य हमले के लिए तैयार रहना चाहिए।
अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने एक धकी टाइट की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका का एक बहुत बड़ा जंगी जहाजों का बेड़ा ईरान की तरफ तेज़ी से कूच कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, यह बेड़ा पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है और किसी भी वक्त हमला करने की स्थिति में है। ट्रंप ने ईरान को सलाह दी है कि वह वक्त रहते बातचीत की मेज पर आ जाए और एक ऐसी संधि पर दस्तखत करे जिसमें परमाणु बम बनाने की कोई गुंजाइश न हो। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि- ईरान के पास समय बहुत कम बचा है। ट्रंप अब ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई करने का मन बना चुके हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य हमले वाली धमकी को ईरान ने पूरी तरह ठुकरा दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि जब तक अमेरिका धमकियां देना बंद नहीं करता, तब तक बातचीत का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। ईरानी सेना के कमांडरों ने दो टूक कहा है कि उनके हाथ ट्रिगर पर हैं और अगर अमेरिका ने कोई भी गलती की, तो ईरान ऐसा करारा जवाब देगा जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के साथ हुए पिछले टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बीते साल जून के हमलों से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने बताया कि उस 12 दिनों के युद्ध के कड़वे अनुभवों ने ईरान को पहले से ज्यादा मजबूत और तेज बना दिया है। अराघची के मुताबिक, अब ईरान किसी भी हमले का जवाब और भी ज्यादा असरदार तरीके से देने में सक्षम है। गौरतलब है कि ट्रंप ने कुछ ही घंटे पहले ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की बात कही थी। अमेरिका अब ईरान पर वहां के आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाकर सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। लेकिन ईरान के बदले हुए तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि वह झुकने के बजाय टकराने के मूड में है।
ट्रंप की धमकियों पर ईरान ने जो जवाब दिया है, उसने पेंटागन के जनरलों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उनके तेल टैंकरों या सरजमीं पर एक भी खरोंच आई, तो वो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सप्लाई लाइन यानी होरमुज की जलडमरूमध्य को हमेशा के लिए बंद कर देंगे। ईरान ने अपनी गुप्त मिसाइल सिटी के दरवाजे खोलकर दुनिया को दिखा दिया है कि उनके पास ऐसी फतह और खैबर मिसाइलें हैं, जिनका तोड़ अमेरिका के पास भी नहीं है। ईरान का तेवर एकदम साफ है कि हम जंग की शुरुआत नहीं करेंगे, लेकिन अगर हमें छेड़ा गया, तो हम उसे खत्म जरूर करेंगे। यूरोपी के कुछ देशों की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने 3 शर्तें रखी हैं। पहली शर्त ईरान में सभी स्थानों पर यूरेनियम संवर्धन का स्थायी अंत करना होगा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के द्वारा तय की गई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज और संख्या पर अंकुश लगाया जाए। मध्य पूर्व में ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स का अंत किया जाए, जिसमें हमास, हूती और हिजबुल्लाह शामिल हैं हालांकि ईरान अभी इन शर्तों के लिए तैयार नहीं है, लेकिन बातचीत चल रही है।
हालांकि इस बीच बीजिंग से एक ऐसी दहाड़ आई जिसने अमेरिका को आईना दिखा दिया है। चीन ने खुलकर ईरान का साथ दिया है और अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अपनी दादागिरी बंद करे। चीन ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान पर हमला करना आग से खेलने जैसा होगा, जिसके नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने पड़ेंगे। चीन आज ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और उसकी ये नसीहत ट्रंप के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। चीन का ये स्टैंड साबित करता है कि ईरान आज दुनिया में अकेला नहीं है, उसके साथ ऐसी महाशक्तियां खड़ी हैं जो अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दे रही हैं। पिछले दिनों चीन के 16 कार्गो प्लेन अचानक ईरान पहुंचे थे। जिसके बाद पूरी दुनिया में हलचल बढ़ गई थी, दावा किया जा रहा है था कि जो अमेरिका का सबसे बडा युद्धपोत फारस की खाड़ी में है उससे लड़ने के लिए चीन ने मिसाइलें और हथियार दे दिए हैं। ऐसे में ईरान अब अपने पूरे फार्म में दिखाई दे रहा है।
ट्रंप को शायद ये गलतफहमी है कि उनके जंगी जहाज ईरान को डरा लेंगे। लेकिन हकीकत ये है कि ईरान की मिसाइल टेक्नोलॉजी आज दुनिया की सबसे खतरनाक तकनीकों में से एक है। ईरान के पास ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जो हवा की गति से कई गुना तेज चलती हैं और जिन्हें अमेरिका का कोई भी डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकता। ईरान का एक ही सैचुरेशन अटैक अमेरिका के इन 10 युद्धपोतों को समंदर की गहराइयों में दफन करने के लिए काफी है। ईरान की ये ताकत ही उसे ट्रंप के सामने मजबूती से खड़ा करती है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब ओमान की खाड़ी पर टिकी हैं। तनाव अपने चरम पर है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप एक ऐसी जंग शुरू करने की कगार पर हैं जिसे जीतना नामुमकिन है।
ईरान ने अपने कफन बांध लिए हैं और उसकी जनता अपने स्वाभिमान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अगर एक भी गलत फायर हुआ, तो मिडिल ईस्ट से उठने वाली ये आग पूरी दुनिया की इकोनॉमी को खाक कर देगी। ट्रंप अपनी छवि को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने साबित कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। भले से ही ट्रंप के पास 10 युद्धपोत हों या 100 मिसाइले हैं, ईरान का हौसला फौलादी है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका का गुलाम बनकर नहीं जिएगा। अब देखना ये है कि ट्रंप का ये खौफनाक खेल उन्हें जीत दिलाता है या फिर अमेरिका के लिए एक ऐसी दलदल साबित होता है जहाँ से निकलना नामुमकिन होगा।


