जंग का अखाड़ा बनता यूएई, भारतीय सहमे

  • ईरान का दावा- लुकास के जरिये अरब देशों पर हमले कर रहा है अमेरिका
  • फ्रांस  के राष्ट्रपति मैक्रों ने ईरान से दुबई पर हमले बंद करने की अपील की
  • ईरान के सर्वोच्चय लीडर मोजतबा खामेनेई ने दुश्मनों को दे दी संपत्ति जब्त करने की धमकी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। युद्ध ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच शुरू हुआ लेकिन इसकी चपेट में पूरा मिडिल ईस्ट आ चुका है। दुबई, अलएन, सउदी अरब, अबूधाबी, कतर, ओमान, बहरीन समेत तमाम देशों की बत्ती गुल हो चुकी है। एयरपोर्ट पर आवाजाही रूक गयी है और लोग घरों के भीतर रहने को मजबूर है। कई मोर्चां पर लड़ रहे ईरान को अब अमेरिकन कूटनीति से भी लड़ाई करनी पड़ रही है।
ईरान का दावा है कि अमेरिका ने ईरानी ड्रोन के क्लोन के तौर पर तैयार किये गये लुकास से अरब मुल्कों पर हमले कर रहा है और ईरान का नाम लगा रहा है। हालांकि ईरान अपनी उस बात से पीछे नहीं हटा है जिसमें उसने कहा था कि किसी भी अरब मुल्क की जमीन से यदि ईरान पर हमला होता है तो वह उसका जवाब देगा। दुबई में लाखों भारतीय रहते हैं और जंग की चपेट में आने के बाद वहां रह रहे लोगों को लेकर देश के भीतर चिंताएं बड़ रही है। बीती रात दुबई एयर पोर्ट का एक बड़ा हिस्सा विस्फोट की जद में आ गया। दुबई एयरपोर्ट के पास ईरानी ड्रोन हमले से फ्यूल टैंक में भीषण आग लग गयी। रिपोर्टस के मुताबिक इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ है सुरक्षा के मद्देनजर दुबई सिविल एविएशन अथॉरिटी ने उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कद दी हैं जिससे एयरपोर्ट संचालन प्रभावित हुआ है।

हजारों ईरानी बेघर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार बिगड़ते हालात का असर अब आम नागरिकों पर साफ दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्रकी एजेंसी इंटरनेशल आर्गनाइजेशन फार माइग्रकेशन के मुताबिक ईरान में जारी संकट के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोडऩे को मजबूर हो गए हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और अब तक लगभग 32 हजार से ज्यादा लोग सीमा पार कर अफगानिस्तान पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई शहरों में लगातार हो रहे हमलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की वजह से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पतालों, बिजली और पानी जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़ी कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं जिसके कारण आम लोगों के सामने सुरक्षा और जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक हालात बिगडऩे के कारण लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। सीमा क्षेत्रों में राहत शिविरों में लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और मानवीय सहायता की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्रएजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो विस्थापन का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से अपील की है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और मानवीय सहायता के रास्ते खुले रखे जाएं, ताकि संकट में फंसे लोगों को राहत मिल सके।]

मोजतबा खामनेई का देश को पहला संदेश

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने टेलीग्राम अकाउंट पर किए गए एक पोस्ट के जरिये अपना पहला संदेश जारी किया है। संदेश ईरान के सरकारी टेलीविजन पर एक महिला प्रेजेंटर ने पढ़कर सुनाया। संदेश में कहा गया है कि ईरान पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है और सिर्फ उन ठिकानों को निशाना बनाएगा जहां से उस पर हमले किए जाएंगे। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक रिपब्लिक के तीसरे सुप्रीम लीडर खामेनेई के नाम से यह संदेश उनकी लोकेशन स्वास्थ्य स्थिति या शारीरिक स्थिति के बारे में कोई जानकारी दिए बिना जारी किया गया था। संदेश में कहा गया है कि हम दुश्मन से मुआवजा लेंगे और अगर वह मना करता है तो हम उसकी जितनी प्रॉपर्टी ले लेंगे जितनी तय करेंगे। अगर यह संभव नहीं हुआ तो हम उसकी उतनी ही प्रॉपर्टी नष्ट कर देंगे। पिछले दिनों ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने देश के नाम अपने पहले मैसेज में लगातार प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया और होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखे जाने का ऐलान किया। एक संदेश में मोजतबा खामेनेई ने संघर्ष में मारे गए लोगों का बदला लेने की भी कसम खाई और कहा कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा।

मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इमैनुअल मैक्रों ने कूटनीतिक पहल करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशयान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान मक्रों ने क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात पर चिंता जताई और तनाव कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की। फ्र ांस के राष्ट्रपति ने खास तौर पर लेबनान और ईराक सहित क्षेत्र के अन्य देशों में ईरान से जुड़े प्रत्यक्ष या प्रॉक्सी हमलों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि मौजूदा स्थिति पूरे मध्य पूर्व को गंभीर अस्थिरता की ओर धकेल सकती है। मैक्रों ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि अगर हिंसा और सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो इसका असर केवल एक या दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरा क्षेत्र बड़े संकट में फंस सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस की यह पहल क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश का हिस्सा है। यूरोपीय देश लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव को बातचीत और संवाद के जरिए कम किया जाए ताकि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना को रोका जा सके।

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