गुजरात में UCC को मंजूरी | 24 मार्च को सदन में पेश होगा बिल, शादी-तलाक के नियमों में बदलाव
गुजरात कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है... जानकारी के अनुसार...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात सरकार उत्तराखंड पैटर्न पर समान नागरिक संहिता लागू करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है.. राज्य कैबिनेट ने UCC विधेयक को अनुमोदित कर दिया है.. यह विधेयक पर्सनल लॉ को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत.. और समान बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधानों से भरा है.. UCC का मसौदा दो भागों और सात अध्यायों में तैयार किया गया है.. मुख्य फोकस विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना.. और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों पर है.. विधेयक में महिलाओं के अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा.. और लैंगिक समानता को प्राथमिकता दी गई है.. सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हुए सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा.. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और कुछ निर्दिष्ट समुदायों को उनकी परंपराओं के अनुसार विशेष छूट दी गई है..
वहीं यह कदम 17 मार्च को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के बाद आया.. रिपोर्ट तीन खंडों में है.. और इसमें राज्य भर में जनता, धार्मिक नेताओं.. और विशेषज्ञों से ली गई राय शामिल है.. रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट ने विधेयक को मंजूरी दी.. सूत्रों के अनुसार, विधेयक को विधानसभा में 24 या 25 मार्च को पेश किया जा सकता है.. जो बजट सत्र का आखिरी दिन है.. अगर विधानसभा में पास होता है तो गुजरात उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य बनेगा.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि UCC प्रगतिशील.. और समानता आधारित कानूनी ढांचा होगा.. जो महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा..
UCC का मुख्य प्रावधान विवाह का अनिवार्य पंजीकरण है.. संहिता लागू होने के बाद हर शादी का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा.. अगर कोई विवाह पंजीकृत नहीं होता तो वह अमान्य नहीं माना जाएगा.. लेकिन पंजीकरण न कराने पर जुर्माना लग सकता है.. पहले से हुए विवाहों के लिए विशेष प्रक्रिया होगी.. विवाह की न्यूनतम उम्र पुरुषों के लिए 21 वर्ष.. और महिलाओं के लिए 18 वर्ष रहेगी.. विवाह के समय कम से कम एक पक्षकार का गुजरात का निवासी होना आवश्यक होगा.. सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है.. ताकि लोगों को सरकारी दफ्तर न जाना पड़े.. यह प्रावधान पारदर्शिता लाएगा और फर्जी विवाह या जबरन शादी रोकने में मदद करेगा..
तलाक के मामलों में प्रक्रिया को स्पष्ट और मानवीय बनाया गया है.. आपसी सहमति से तलाक आसान होगा.. लेकिन तलाक का आवेदन शादी के एक वर्ष के भीतर दायर नहीं किया जा सकेगा.. इससे जल्दबाजी में तलाक रोकने का प्रयास किया गया है.. बच्चों की अभिरक्षा और भरण-पोषण पर संतुलित प्रावधान किए गए हैं.. अदालत बच्चों के हित को सर्वोपरि रखेगी.. मां या पिता दोनों को अभिरक्षा का अधिकार मिल सकता है.. लेकिन बच्चे की उम्र, भावनात्मक जरूरत और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा.. भरण-पोषण में महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता दी गई है.. यह प्रावधान पुराने व्यक्तिगत कानूनों से अलग है.. जहां तलाक की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती थी..
लिव-इन रिलेशनशिप पर UCC के सबसे चर्चित और सख्त नियम हैं.. ऐसे रिश्ते में रहने वाले जोड़ों को अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना होगा.. पंजीकरण न करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है.. रजिस्ट्रेशन के लिए दोनों पक्षकारों को यह घोषणा देनी होगी कि वे गुजरात के निवासी हैं या नहीं.. अगर कोई गुजरात का निवासी राज्य के बाहर लिव-इन में है.. तो भी रजिस्ट्रार को विवरण देना होगा.. रजिस्ट्रार जांच करेगा कि संबंध धारा 386 के तहत नहीं आता.. लिव-इन से पैदा हुए बच्चे को कानूनी मान्यता मिलेगी.. और सभी अधिकार प्राप्त होंगे.. बच्चा जोड़े का कानूनी संतान माना जाएगा.. लेकिन अगर कोई पक्षकार विवाहित है.. और उसके धर्म या परंपरा में ऐसा संबंध अनुमति नहीं देता.. तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा..



