एक बार फिर विवादों में यूनिवर्सिटी, अब डॉक्यूमेंट्री को लेकर हंगामा

NLSIU की लॉ एंड सोसाइटी कमिटी (LawSoc) ने 'प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट' नाम की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग टाल दी है. यह डॉक्यूमेंट्री ललित वचानी ने उमर खालिद की जेल की सजा पर बनाई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: NLSIU की लॉ एंड सोसाइटी कमिटी (LawSoc) ने ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ नाम की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग टाल दी है. यह डॉक्यूमेंट्री ललित वचानी ने उमर खालिद की जेल की सजा पर बनाई है.

CJI सूर्य कांत को दीक्षांत समारोह के लिए बुलाए जाने को लेकर हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने विरोध जताया था, फिर कुछ दिन पहले बेंगलुरु की NLSIU ने भी CJI को बुलाए जाने का विरोध कर दिया. लेकिन अब इसी NLSIU में जेल में कैद उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जानी थी, लेकिन इस पर हंगामा हो गया और इस योजना को टालना पड़ गया.

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) की लॉ एंड सोसाइटी कमिटी (LawSoc) ने ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ (Prisoner No. 626710 is Present) नाम की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग टाल दी है. यह डॉक्यूमेंट्री ललित वचानी ने उमर खालिद की जेल की सजा पर बनाई है. स्क्रीनिंग से जुड़ा आयोजन आज यानी सोमवार (14 सितंबर) को लॉ यूनिवर्सिटी में होना था और इसके बाद इस पर चर्चा की जानी थी.

‘किसी दबाव’ में आयोजन रद्द नहीं हुआ
लेकिन बीती रात LawSoc की ओर से छात्रों को ई-मेल के जरिए आयोजन को टालने की जानकारी दी गई. उन्होंने इसके लिए ‘लॉजिस्टिकल और सुरक्षा कारणों’ का हवाला दिया, लेकिन यह भी साफ किया कि इवेंट इसी ट्राइमेस्टर में होगा.
LawSoc ने आगे साफ कर दिया कि वे ‘किसी के दबाव’ में आकर आयोजन से पीछे नहीं हट रहे हैं. ई-मेल में कहा गया कि इस आयोजन को टालने का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि स्क्रीनिंग ‘सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से’ हो सके. लॉ एंड सोसाइटी कमिटी ने पुष्टि की कि वे ‘छात्र समुदाय की भलाई से समझौता किए बिना’ जरूरी इंतजाम करने पर काम कर रहे हैं.LawSoc ने अपने संवैधानिक अधिकारों, आपराधिक कानून, लोगों की आजादी और संस्थागत आजादी में रुचि रखने वाले छात्रों को नए समय पर होने वाले इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित भी किया.

ABVP ने किया स्क्रीनिंग का विरोध
छात्रों को भेजे गए LawSoc के शुरुआती ई-मेल के अनुसार, यह स्क्रीनिंग 13 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे’ यानी राजनीतिक कैदी दिवस के मौके पर आयोजित की जानी थी. ई-मेल के अनुसार, कमिटी का मकसद स्क्रीनिंग के जरिए कई व्यापक कानूनी सवालों पर चर्चा को बढ़ावा देना भी था, जिसमें ट्रायल से पहले हिरासत में लिया जाना, जमानत, असहमति, राजनीतिक कैद, या फिर आपराधिक कानून और लोकतांत्रिक आजादी के बीच का संबंध हो.

आयोजक के ई-मेल में यह भी बताया गया कि सितंबर में उमर खालिद की जेल की सजा के छह साल पूरे हो रहे हैं. हालांकि इस प्रस्तावित आयोजन का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जमकर विरोध किया. ABVP ने कल NLSIU के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर प्रशासन से अनुरोध किया कि वे शैक्षणिक जगहों का इस्तेमाल ‘राजनीतिक या वैचारिक प्रचार’ के लिए न होने दें.

VC स्क्रीनिंग की इजाजत न देंः ABVP
ABVP ने प्रशासन से यह भी मांग की कि वाइस चांसलर अपने कैंपस में स्क्रीनिंग की अनुमति न दें, ताकि यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल को राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचाया जा सके. यह लॉ यूनिवर्सिटी पिछले दिनों तब चर्चा में आया जब यहां से ग्रेजुएट होने वाले छात्रों और NLSIU के पूर्व छात्रों के एक समूह ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्य कांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को दिए गए निमंत्रण का विरोध कर दिया.

NLSIU में भी छात्रों ने किया था CJI का विरोध
विरोध की वजह से नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी को अपने 34वें सालाना दीक्षांत समारोह के लिए 17 अक्टूबर तक के लिए टालना पड़ गया. पहले यह आयोजन 12 सितंबर को होना था, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया. यहां से पास होने वाले छात्रों को भेजे गए एक संदेश में यूनिवर्सिटी ने कहा कि नई तारीख को उसकी एग्जीक्यूटिव काउंसिल और जनरल काउंसिल से मंजूरी मिल गई है. इन बैठकों की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने की, जो यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं.

यूनिवर्सिटी ने बताया कि वह एक फॉर्म जारी करेगी जिसमें छात्रों से पूछा जाएगा कि वे अपनी डिग्री खुद आकर लेना चाहते हैं या अनुपस्थित रहकर (in absentia) लेना चाहते हैं. जो छात्र गैर हाजिर रहकर डिग्री लेने का विकल्प चुनेंगे, वे 17 अक्टूबर के बाद अपने सर्टिफिकेट ले सकेंगे. सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया की जानकारी एक अलग नोटिफिकेशन में दी जाएगी.

NALSAR यूनिवर्सिटी ने भी जताई थी आपत्ति
जबकि इससे पहले, हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों ने भी अपने यहां होने वाले दीक्षांत समारोह में CJI सूर्य कांत की प्रस्तावित मौजूदगी पर गहरी आपत्ति जताई थी. उन्होंने यह आपत्ति NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों और उन पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों के बाद जताई थी.

हालांकि इस विरोध के बाद BCI के चेयरमैन मनन मिश्रा ने राज्य बार काउंसिलों से कहा कि वे पास होने वाले बैच का एनरोलमेंट ही न करें. इस पर विरोध शुरू हो गया. मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी फटकार लगाई तो BCI ने कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला वापस ले लिया. पिछले महीने, NLSIU के करीब 165 पास होने वाले छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने एक खुला पत्र साइन करके NALSAR के छात्रों के खिलाफ BCI की कार्रवाई की निंदा की थी.

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