उन्नाव: बांगरमऊ तहसील में रिश्वत का खेल, अधिवक्ता से मारपीट के बाद बवाल
उन्नाव की बांगरमऊ तहसील में लेखपाल पर वरासत के नाम पर रिश्वत मांगने और अधिवक्ता से मारपीट का गंभीर आरोप लगा है। अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप कर धरना शुरू कर दिया है और आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उन्नाव जिले की बांगरमऊ तहसील में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब एक लेखपाल पर रिश्वतखोरी और मारपीट के गंभीर आरोप सामने आए। मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिवक्ताओं के विरोध के बाद तहसील परिसर में पूरा कामकाज ठप हो गया और धरना शुरू कर दिया गया।
वरासत के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बांगरमऊ तहसील में तैनात लेखपाल Mardan Singh पर वरासत (उत्तराधिकार) दर्ज कराने के नाम पर ₹10,000 रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने इसका विरोध किया तो अतिरिक्त ₹6,000 की और मांग की गई। इस पूरे मामले में अधिवक्ता सौरभ श्रीवास्तव ने खुलकर रिश्वतखोरी का विरोध किया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
अधिवक्ता के साथ मारपीट का आरोप
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आरोप है कि लेखपाल ने तहसील परिसर में ही अधिवक्ता को एक कमरे में बंद कर लात-घूंसों से मारपीट की। इस घटना के बाद अधिवक्ता समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
तहसील में कामकाज ठप, अधिवक्ताओं का धरना
घटना के बाद अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर तहसील परिसर में कामकाज ठप कर दिया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं की मांग है कि आरोपी लेखपाल के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक प्रशासन इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले ने बांगरमऊ तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यों में इस तरह की शिकायतें लगातार आती रहेंगी तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है। फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच की प्रक्रिया की उम्मीद की जा रही है, लेकिन अधिवक्ता वर्ग तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।
भ्रष्टाचार पर सख्ती की मांग
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या राजस्व विभाग के कार्यों में पारदर्शिता पर्याप्त है या नहीं। अधिवक्ताओं ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस घटना के खिलाफ बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता है।
रिपोर्ट – रंजन बाजपाई
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