मिर्जापुर में टोल प्लाजा को लेकर बवाल, 36 घंटे से कलेक्ट्रेट में धरने पर कांग्रेस

मिर्जापुर में वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर बने टोल प्लाजा को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 36 घंटे बाद भी कोई अधिकारी मिलने नहीं पहुंचा और स्थानीय लोगों से मनमाना टोल वसूला जा रहा है।

4 पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में वाराणसी-शक्तीनगर हाईवे पर बने टोल प्लाजा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फर्जी टोल प्लाजा को हटाने की मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ता दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 36 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी जिला प्रशासन का कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल पार्टी का नहीं, बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों और किसानों की समस्या से जुड़ा हुआ है, जो टोल टैक्स की कथित मनमानी से परेशान हैं।

मंगलवार से कलेक्ट्रेट में जारी है धरना

मंगलवार से कांग्रेस कमेटी के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं। इस प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार सिंह पटेल कर रहे हैं।

धरने को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अहरौरा इलाके में टोल टैक्स के नाम पर लोगों से जबरन वसूली की जा रही है। उनका आरोप है कि आम जनता की मेहनत की कमाई पर टोल के जरिए बोझ डाला जा रहा है।

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20 किलोमीटर के दायरे में फ्री पास की मांग

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों को कम से कम 20 किलोमीटर के दायरे में फ्री पास दिया जाए। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए बार-बार टोल देना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

वरिष्ठ नेताओं ने भी किया समर्थन

धरना प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। इनमें पूर्व विधायक भगौती प्रसाद चौधरी,  पूर्व पालिका अध्यक्ष दीपचंद जैन और अन्य स्थानीय नेता मौजूद रहे। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर टोल प्लाजा को अहरौरा, अष्टभुजा और विंध्याचल क्षेत्र से हटाकर दूसरी जगह नहीं ले जाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

60 किलोमीटर नियम को लेकर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि नियम के अनुसार 60 किलोमीटर के दायरे में दूसरा टोल प्लाजा नहीं होना चाहिए। ऐसे में यह टोल प्लाजा किन परिस्थितियों में लगाया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। फिलहाल मिर्जापुर में टोल प्लाजा को लेकर सियासत तेज हो गई है और अब सबकी नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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