170 दिनों बाद पहाड़ों में लौटे वांगचुक, बोले—अब एक नया सूरज उगेगा
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 170 दिनों बाद जेल से रिहा हुए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 170 दिनों बाद जेल से रिहा हुए. उन्होंने अपनी रिहाई पर खुशी जाहिर की और लद्दाख के उद्देश्य के लिए एक नई सुबह की उम्मीद जताई. वांगचुक ने संघर्ष में साथ देने वाले पूरे देश का धन्यवाद किया.
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से छूटने के बाद कहा कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों पर आकर और लोगों से मिलकर, मुझे उम्मीद है कि जिस उद्देश्य के लिए हम काम कर रहे हैं. उसके लिए एक नई सुबह होगी. हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं.
हमें आशा है कि सभी तरफ से ऐसा ही माहौल बनेगा. उन्होंने कहा कि मैं इस संघर्ष में हमारा साथ देने वाले पूरे देश के लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं. वांगचुक बोले कि लोगों से मिलने के लिए वो बहुत उत्सुक हैं.
सोनम वांगचुक ने लद्दाख की राजनीतिक मांगों पर लचीला रुख अपनाया. उन्होंने केंद्र के साथ लेन-देन वाले रवैये के प्रति अपनी सहमति जताई. उन्होंने कहा कि ऐसे नतीजे की जरूरत है जिससे दोनों पक्षों का फायदा हो, जबकि दूसरी ओर क्षेत्र के प्रमुख संगठनों ने यह साफ कर दिया है कि उनकी मुख्य मांगों पर कोई समझौता नहीं होगा.
बातचीत दो मुद्दों पर होगी
वांगचुक को हाल ही में जेल से रिहा किया गया है. वह सितंबर से ही जेल में बंद थे. उन्हें लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था. अधिकारियों ने उन विरोध प्रदर्शनों को हिंसक बताया था. सरकार ने इस सख्त कानून के तहत जारी हिरासत के आदेश को वापस ले लिया. इससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया.
उन्होंने सोमवार को कहा कि बातचीत इन्हीं मुद्दों पर होगी. इनमें मुख्य दो मुद्दे हैं. छठी अनुसूची में शामिल होना और लोकतंत्र की बहाली. जैसा कि मैंने कहा, ये ‘लेन-देन’ का मामला है.
इसलिए अगर दोनों पर नहीं, तो हम उम्मीद करते हैं कि कम से कम एक पर तो बात बनेगी ही. हम इस मामले में लचीले हैं. दूसरी तरफ दूसरा पक्ष भी लचीला हो सकता है. उन्होंने कहा कि जाहिर है कि किसी एक पक्ष के लिए ये’हार-हार’ वाली स्थिति नहीं होनी चाहिए. ऐसी बातचीत सफल नहीं मानी जाएगी. ये एक ‘जीत-जीत’ वाली स्थिति हो सकती है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की जरूरतों का ध्यान रखें.



