अजित पवार के निधन पर देश भर में शोक की लहर, सीएम ममता समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

आज न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश को बड़ी क्षति हुई है। देश ने एक बेहद होनहार नेता खोया है जिससे लोगों में शोक की लहर है। अजित पवार के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आज न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देश को बड़ी क्षति हुई है। देश ने एक बेहद होनहार नेता खोया है जिससे लोगों में शोक की लहर है। अजित पवार के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है।

आज बारामती में उनके निजी विमान के क्रैश होने से उनकी और विमान में सवार अन्य चार लोगों की मौत हो गई। यह हादसा लैंडिंग के दौरान हुआ, जब विमान रनवे से फिसल गया और आग लग गई। अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे और एनसीपी के बड़े नेता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी, योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती और कई अन्य नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अजित पवार एक मेहनती नेता थे जिनका ग्रामीण स्तर पर गहरा जुड़ाव था। राहुल गांधी ने इसे बेहद दुखद बताया। महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। बारामती में बंद रहा और लोग अस्पताल के बाहर इकट्ठा होकर रो रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए बारामती में हुए इस भीषण विमान हादसे की विस्तृत जांच की मांग की है। ममता बनर्जी ने अपने पोस्ट में लिखा कि अजित पवार और उनके साथ यात्रा कर रहे लोगों की अचानक हुई मौत से वह बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि बारामती में हुई इस दुखद विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम समेत कई लोगों की जान चली गई, जो अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने दिवंगत अजित पवार के परिवार, उनके चाचा शरद पवार और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हादसे की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की अपील की। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।

आदित्य ठाकरे ने भी अजित पवार को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में उन्हें अजित पवार के साथ सरकार में और विपक्ष में काम करने का मौका मिला. विधानसभा के कामकाज पर उनकी पकड़ और उनका स्नेहिल स्वभाव हमेशा याद रहेगा. यह खबर वाकई दिल को झकझोर देने वाली है.अजित पवार का जाना सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है. उनके समर्थक, कार्यकर्ता और आम लोग गहरे सदमे में हैं. पूरे राज्य में उन्हें नम आंखों से याद किया जा रहा है.

DGCA अधिकारियों की एक टीम दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है। विभाग के अनुसार, Learjet 45 विमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ एक पीएसओ, एक अटेंडेंट और दो क्रू मेंबर (पायलट-इन-कमांड और फर्स्ट ऑफिसर) सवार थे जिनमे से कोई भी नहीं बचा।

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक बहुत बड़े नाम थे। वे शरद पवार के भतीजे थे और लंबे समय तक एनसीपी में सक्रिय रहे। उन्होंने कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। वे बारामती क्षेत्र के बहुत लोकप्रिय थे, जहां से उनकी मजबूत पकड़ थी। अजित पवार को “दादा” कहकर पुकारा जाता था क्योंकि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बड़े भाई जैसे थे। वे प्रशासनिक कामों में तेज थे और सिंचाई, सहकारिता जैसे क्षेत्रों में बड़े फैसले लेते थे। 2023 में उन्होंने चाचा शरद पवार से अलग होकर एनसीपी का एक हिस्सा लेकर भाजपा-शिवसेना के साथ सरकार बनाई थी। यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया था। लेकिन अब उनके अचानक जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव एनसीपी पार्टी में होगा। अजित पवार की अपनी अलग एनसीपी (अजित पवार गुट) थी, जो महायुति गठबंधन का हिस्सा थी। अब उनके बिना इस गुट का नेतृत्व कौन करेगा, यह बड़ा सवाल है। उनकी पत्नी राज्यसभा सांसद हैं और 2024 लोकसभा चुनाव में बारामती से लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार भी राजनीति में सक्रिय हैं। पार्थ पहले चुनाव लड़ चुके हैं। हो सकता है कि पार्टी का नेतृत्व उनकी या पार्थ की तरफ जाए। लेकिन अजित पवार की तरह मजबूत पकड़ और अनुभव किसी में नहीं है, इसलिए पार्टी में असमंजस की स्थिति बन सकती है।

इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार में भी बड़ा असर पड़ेगा। अजित पवार उपमुख्यमंत्री थे और कई विभाग उनके पास थे। वे महायुति सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं और एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम। अजित पवार के जाने से गठबंधन में संतुलन बिगड़ सकता है। एनसीपी गुट के विधायक और नेता अब किस तरफ जाएंगे, यह देखना होगा। कुछ नेता शरद पवार गुट के साथ जा सकते हैं या भाजपा के और करीब आ सकते हैं। सरकार स्थिर है, लेकिन अजित पवार की कमी महसूस होगी क्योंकि वे ग्रामीण और किसान मुद्दों पर मजबूत थे।

बारामती उनका गढ़ था, जहां से शरद पवार और अब उनकी पत्नी या पार्थ चुनाव लड़ते हैं। उनके निधन से वहां एनसीपी गुट कमजोर हो सकता है। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव आने वाले थे, जिनके लिए वे प्रचार करने जा रहे थे। अब इन चुनावों में महायुति को नुकसान हो सकता है। विपक्षी दल जैसे कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव) इसे मौका मानकर हमला कर सकते हैं। शरद पवार परिवार में पहले से ही विभाजन था, लेकिन अजित के जाने से परिवार और पार्टी में भावनात्मक एकता की कोशिश हो सकती है। शरद पवार खुद बारामती पहुंचे हैं और परिवार के साथ हैं। राज्य स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

अजित पवार भाजपा के साथ थे, लेकिन वे कभी भी स्वतंत्र फैसले ले सकते थे। उनकी मौत से भाजपा को एक मजबूत सहयोगी कम हुआ है। अगर एनसीपी गुट कमजोर हुआ तो महायुति सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, विपक्ष मजबूत हो सकता है। ममता बनर्जी ने जांच की मांग की है और कुछ नेता सवाल उठा रहे हैं। लेकिन फिलहाल शोक की लहर है। अजित पवार की मौत ने दिखाया कि राजनीति में कितनी अनिश्चितता है। एक पल में सब बदल सकता है।

अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा। वे सहकारिता के बड़े नेता थे और चीनी मिलों, दूध संघों में उनकी अच्छी पकड़ थी। किसानों के मुद्दों पर वे मुखर रहते थे। उनके बिना इन क्षेत्रों में नेतृत्व का संकट आ सकता है। युवा नेताओं को आगे आना होगा। पार्थ और जय पवार को ज्यादा जिम्मेदारी मिल सकती है। लेकिन अभी सब कुछ अनिश्चित है।कुल मिलाकर, अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बहुत बड़ा झटका है। वे एक ऐसा नेता थे जो प्रशासन और पार्टी दोनों में मजबूत थे। उनके जाने से एनसीपी में नेतृत्व का संकट, महायुति में संतुलन की समस्या और बारामती जैसे गढ़ में कमजोरी आएगी। आने वाले महीनों में चुनाव और समीकरण देखने लायक होंगे। लेकिन अभी पूरा महाराष्ट्र और देश उनके लिए शोक मना रहा है।

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