मोदी के गढ़ में ये क्या हो गया? मणिकर्णिका घाट की घटना पर फंसी बीजेपी सरकार!
मोदी का संसदीय क्षेत्र आज चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सवाल ये बना हुआ है कि जो हिंदुत्व की बात किया करते थे आज उनकी नाक के नीचे मणिकर्णिका घाट पर इतनी बड़ी तोड़फोड़ हुई और भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मोदी का संसदीय क्षेत्र आज चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सवाल ये बना हुआ है कि जो हिंदुत्व की बात किया करते थे आज उनकी नाक के नीचे मणिकर्णिका घाट पर इतनी बड़ी तोड़फोड़ हुई और भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। आलम ये रहा कि विरोध और खींचातानी को रोकने और शांत करवाने के चक्कर में पुलिस कर्मियों की वर्दी तक फट गई।
दरअसल बीते कुछ दिनों पहले काशी के मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार के दौरान एक पत्थर के चबूतरे और उसके नीचे लगी राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के साथ एक शिवलिंग व एक अन्य मूर्ति को निकाल कर मलबे में फेंके जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. जिसके बाद हड़कंप मच गया. बनारस से लेकर मध्य प्रदेश तक माता अहिल्याबाई होलकर के समर्थकों ने नाराजगी जताई और विरोध प्रदर्शन किया. अखिलेश यादव से लेकर प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का अपमान बताया.
इस मामले को लेकर विपक्ष भाजपा सरकार पर हमलावर है। धर्म के ठेकेदार बन रहे बीजेपी नेताओं पर आम जनता भी जमकर हमला बोल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि काशी में माता अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और धरोहरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. वाराणसी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा है कि काशी में विकास के नाम पर सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. प्रशासन को चाहिए कि वह पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच करे. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 15 जनवरी को एक्स पर पोस्ट किया कि मोदी सरकार सौंदर्यीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धरोहर मिटा रही है, ताकि अपना नामपट्ट चिपका सके। उन्होंने इसे सनातन संस्कृति पर हमला बताया। वहीँ उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने योगी-मोदी सरकार को “नास्तिक” कहा और आरोप लगाया कि विश्वनाथ कॉरिडोर में हजारों वर्ष पुराने मंदिर तोड़े गए, अक्षयवट काटा गया। अन्य विपक्षी नेता जैसे आप के संजय सिंह और पप्पू यादव ने भी सोशल मीडिया पर विरोध जताया। उन्होंने इसे वाराणसी की आत्मा पर हमला करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी हिंदुत्व का दावा करती है, लेकिन वास्तव में व्यावसायिक निर्माण कर रही है।
औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ के विध्वंश के बाद काशी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने काशी में कई बड़े कार्य कराए थे। काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ अहिल्याबाई ने मणिकर्णिका घाट का भी जीर्णोद्धार कराया, उसी काल खंड में इस मढ़ी को भी बनवाया गया था। कालांतर में इसी मढ़ी के निचले हिस्से में अहिल्याबाई की प्रतिमा के साथ और भी प्रतिमाएं लगी थीं। ड्रिल करते समय इन्हीं मूर्तियों को हटाने के तरीके का स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू किया था।
मामले में लगतार जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा, विपक्ष ने मोदी, योगी समेत पूरी भाजपा पर हमला बोला। इसी बीच कैबिनेट मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने प्रेस वार्ता कर स्थिति को साफ किया तो दूसरी ओर स्थानीय विधायक नीलकंठ तिवारी मणिकर्णिका घाट पहुंच गए और घाट पर स्थित मंदिर को दिखा कर विपक्ष पर निशाना साधा। यहां तक कि सीएम योगी आदित्यनाथ को भी सफाई पेश करनी पड़ी। सीएम योगी ने आंकड़े बताते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय भी कांग्रेस के नेताओं ने वर्कशॉप से मूर्तियां लाकर उसे धाम निर्माण में खंडित मूर्ति बताया और जनता को गुमराह किया।
यह विवाद मोदी के गढ़ में बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वाराणसी में 2024 लोकसभा चुनाव में मोदी की जीत हुई थी, लेकिन विपक्ष इसे हिंदुत्व की असली परीक्षा बता रहा है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास धरोहर की कीमत पर नहीं होना चाहिए। विरासत संरक्षणवादी और अहिल्याबाई होल्कर के वंशजों ने भी विरोध किया। सोशल मीडिया पर #SaveManikarnikaGhat जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। यह मुद्दा विकास बनाम विरासत की बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। क्या आधुनिकीकरण से काशी की आत्मा बचेगी, या व्यावसायीकरण हावी होगा? सरकार का दावा है कि परियोजना से पर्यटन बढ़ेगा, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
मणिकर्णिका घाट विवाद बीजेपी सरकार के लिए एक बड़ा बवाल बन गया है। जहां एक तरफ विकास की जरूरत है, वहीं धार्मिक भावनाओं और इतिहास का सम्मान भी जरूरी है। कांग्रेस ने इसे लेकर मोदी-योगी पर जमकर निशाना साधा और सत्ताधारी दल की असलियत जनता के सामने दिखाने की कोशिश की, जबकि बीजेपी इसे साजिश बता रही है। आने वाले दिनों में अगर कार्य रुका या बदलाव हुए, तो यह वाराणसी की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।



