हर मामले में SLP क्यों?’ CJI सूर्यकांत बोले- ‘हाई कोर्ट छींकता भी है…’

सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने SLP दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कहा कि अगर हाईकोर्ट छींकता भी है तो SLP आ जाती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने SLP दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कहा कि अगर हाईकोर्ट छींकता भी है तो SLP आ जाती है. दूसरे मामले में कोर्ट ने कहा कि कैमरा-माइक चालू रहना पक्षकार का अधिकार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत की कई अहम टिप्पणियां सामने आईं.

आर्बिट्रेशन से जुड़े एक मामले की तत्काल सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने हाई कोर्ट के हर छोटे-बड़े आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी दाखिल किए जाने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी की. सीजेआई ने कहा कि अगर हाई कोर्ट छींकता भी है तो एसएलपी आ जाती है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हाई कोर्ट सुनवाई टाल दे, किसी दस्तावेज को रिकॉर्ड पर ले ले या कोई और कार्रवाई करे, लगभग हर स्थिति में एसएलपी दाखिल की जा रही है. इसी सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने इस सवाल पर विचार नहीं किया कि मध्यस्थ का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में आर्बिट्रेशन के एक मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई.

वकील की तरफ से दलील रखी गई कि हाई कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया कि मध्यस्थ यानी आर्बिट्रेटर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. इसी दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, ‘अगर हाई कोर्ट छींकता भी है, तो एसएलपी आ जाती है.’ सीजेआई ने आगे कहा कि अगर हाई कोर्ट सुनवाई टालता है तो एसएलपी आती है… अगर किसी दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लेता है तो एसएलपी आती है.

यानी हाई कोर्ट जो कुछ भी करता है, उसके खिलाफ एसएलपी दाखिल हो जाती है. दरअसल, विशेष अनुमति याचिका के जरिए पक्षकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन सीजेआई की टिप्पणी का संदर्भ था कि क्या हाई कोर्ट की लगभग हर प्रक्रिया और अंतरिम कार्रवाई के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचना उचित है?

दूसरा मामला… सुनवाई के अधिकार पर टिप्पणी

इसी दौरान एक दूसरे मामले में सुनवाई के तरीके को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में तीखी बातचीत हुई. एक याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जब उसकी विशेष अनुमति याचिका जस्टिस जेबी पारदीवाला के सामने आई थी, तब कैमरे और माइक्रोफोन बंद कर दिए गए थे. वकील ने कहा कि उसी मामले में अब जस्टिस पारदीवाला को भी पक्षकार बनाया गया है. वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि जब यह मामला दोबारा आए तो कैमरे और माइक्रोफोन बंद न किए जाएं.

इस पर अदालत की तरफ से स्पष्ट किया गया कि कैमरा और माइक्रोफोन चालू रहना किसी पक्षकार का अधिकार नहीं है. जस्टिस बागची ने कहा कि यह आपका अधिकार नहीं है… आपको केवल जज के सामने सुनवाई का अधिकार है. इसके बाद वकील ने सवाल उठाया कि अगर जज मामले की सुनवाई करने से ही इनकार कर दें तो क्या होगा? वकील ने दावा किया कि मामले की सुनवाई से इनकार कर आदेश पारित कर दिया गया और यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता की सुनवाई हो चुकी है.

इसी मामले में अब संबंधित न्यायाधीश को भी पक्षकार बनाए जाने की बात वकील ने अदालत के सामने रखी. सीजेआई सूर्यकांत ने इसके बाद बातचीत को विराम दिया और अगले मामले की सुनवाई शुरू कर दी.

तीसरा मामला… कोयला और मवेशी घोटाले से जुड़ी याचिका

सुप्रीम कोर्ट में कोयला और मवेशी घोटाले से जुड़े एक मामले में भी तत्काल सुनवाई की मांग सामने आई. याचिकाकर्ता खुद को इस मामले में व्हिसलब्लोअर के तौर पर पेश कर रहा है. उसकी ओर से आरोप लगाया गया कि उस पर एक बार फिर हमला हुआ है और उसे सुरक्षा की जरूरत है. याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच उसके खिलाफ करीब दस मामले दर्ज किए गए थे. वकील के मुताबिक इनमें से कई मामलों में याचिकाकर्ता को बरी किया जा चुका है या आरोप हटा दिए गए हैं.

वकील ने यह भी दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामलों में याचिकाकर्ता को दोबारा समन भेजे गए थे. आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल में अपनी मां से मिलने जाते समय याचिकाकर्ता पर हमला किया गया.

इसी आधार पर मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई और अदालत से सोमवार या उसके बाद सुनवाई का अनुरोध किया गया. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम देखेंगे कि कब सुनवाई कर सकते हैं.

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