भोजशाला के पास नमाज होगी या नहीं? मुस्लिम पक्ष अब तक क्यों नहीं कर पाया फैसला

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यदि प्रशासन किसी वैकल्पिक स्थान की अनुमति भी देता है, तब भी वहां नमाज अदा की जाएगी या नहीं, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यदि प्रशासन किसी वैकल्पिक स्थान की अनुमति भी देता है, तब भी वहां नमाज अदा की जाएगी या नहीं, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है.

हिंदू पक्ष का स्पष्ट रुख है कि भोजशाला परिसर के आसपास किसी भी स्थान पर जुमे की नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले पर हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों को धैर्य रखने की सलाह दी, साथ ही कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि फैसला होने तक परिसर के पास ही मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार जुमे की नमाज अदा करने के लिए अलग से खुली जगह उपलब्ध कराई जाए. लेकिन निर्देश के बाद भी जुमे की नमाज की जगह को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

धार स्थित भोजशाला के पास जुमे की नमाज को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी तक धार जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ है. इसी वजह से नमाज के लिए स्थान को लेकर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है.

नमाज को लेकर मुस्लिम पक्ष को कैसी आशंका

जबकि, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यदि प्रशासन किसी वैकल्पिक स्थान की अनुमति भी देता है, तब भी वहां नमाज अदा की जाएगी या नहीं, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है. मुस्लिम पक्ष को इस बात की आशंका है कि यदि एक बार भोजशाला परिसर के बाहर किसी निर्धारित स्थान पर नमाज अदा कर ली गई, तो भविष्य में वही व्यवस्था स्थायी रूप से लागू मानी जा सकती है.

दूसरी ओर, हिंदू पक्ष का स्पष्ट रुख है कि भोजशाला परिसर के आसपास किसी भी स्थान पर जुमे की नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

नमाज के लिए परिसर के पास मिले जगह: SC

इससे पहले 14 जुलाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भोजशाला मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) को धैर्य बनाए रखना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि फैसला होने तक भोजशाला परिसर के पास ही कहीं पर भी मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को 2 घंटे (एक बजे से 3 बजे के बीच) नमाज अदा करने के लिए खुली जगह उपलब्ध कराई जाए.

कोर्ट ने कहा कि वह इस केस की रोजाना आधार पर सुनवाई करने और मुद्दे का जल्द समाधान निकालने को तैयार है. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर भी विचार किया, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है.

हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार को पूजा करने और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी. हिंदू समुदाय के लोग भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस संरचना को कमाल मौला मस्जिद बताता है. हालांकि इस विवादित परिसर की देखरेख एएसआई करता है.

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