एकादशी व्रत क्यों है इतना फलदायी? जानिए धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और भक्तों के लिए इसे बेहद फलदायी माना गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और भक्तों के लिए इसे बेहद फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। मान्यता है कि एकादशी व्रत से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात विजया एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र किनारे इसी विजया एकादशी का व्रत किया था. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में 13 फरवरी को विजया एकादशी मनाई जाएगी. यदि आप भी अपनी बाधाओं को दूर करना चाहते हैं और कार्यों में सफलता पाना चाहते हैं, तो इस दिन कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है.
विजया एकादशी पर क्या करें?
जल्दी उठें और संकल्प लें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें. व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं.
पीले फूलों और फलों का प्रयोग: भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है. उन्हें पीले फूल, पीले फल और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें.
दान-पुण्य: एकादशी के दिन सामर्थ्य अनुसार अन्न, जल या गर्म कपड़ों का दान करें. ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना उत्तम है.
रात्रि जागरण: संभव हो तो रात में सोएं नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन करते हुए भगवान का ध्यान करें.
विजया एकादशी पर क्या न करें?
चावल का सेवन: एकादशी के दिन चावल खाना धार्मिक दृष्टि से भी अशुभ माना जाता है.
तामसिक भोजन: इस दिन प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें.
क्रोध और वाद-विवाद: एकादशी का व्रत संयम का प्रतीक है. इस दिन किसी को अपशब्द न बोलें, गुस्सा न करें और न ही किसी की बुराई करें.
तुलसी के पत्ते न तोड़ें: भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. पूजन के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें.
देर तक न सोएं: इस दिन दिन के समय सोने से बचना चाहिए. अपना समय प्रभु की भक्ति में लगाएं.



