पीड़ित परिवार से मिलने पर रोक क्यों? मेरठ कांड में सपा नेताओं का पुलिस पर आरोप, सड़क पर धरना
शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन पीड़ित परिवार से मुलाकात के लिए गांव जा रहे थे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के कपसाड़ गांव में दलित युवती के अपहरण और उसकी मां की हत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन पीड़ित परिवार से मुलाकात के लिए गांव जा रहे थे।
इस दौरान पुलिस ने उन्हें परतापुर टोल प्लाजा पर रोक लिया। उनके साथ सरधना से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान भी मौजूद थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर सपा नेताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हो गई। पीड़ित
परिवार के गांव नहीं जाने दिए जाने से नाराज़ सपा नेताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया। विधायक अतुल प्रधान ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। घटना को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और मामले ने सियासी रंग ले लिया है।
इस दौरान सपा नेताओं की पुलिस से झड़प भी हो गयी, जब सपा नेताओं को पीड़ित परिवार के गांव नहीं जाने दिया गया तो वे सब वहीँ धरने पर बैठ गए. अतुल प्रधान ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया कि किस वजह से पीड़ित परिवार को राजनीतिक प्रतिनिधियों से नहीं मिलने दिया जा रहा.
रामजीलाल सुमन पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे
राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन पीड़ित दलित परिवार से मिलने के लिए आगरा से मेरठ के कपसाड़ गांव जा रहे थे, लेकिन मेरठ पुलिस ने उन्हें परतापुर टोल पर ही रोक लिया. समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने जब जबरन जाने की कोशिश की तो पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई. जिसके बाद नाराज कार्यकर्ताओं के साथ रामजीलाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान वहीँ धरने पर बैठ गए. पुलिस पर आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार की आवाज़ को दबाया जा रहा है, साथ ही घटना के दो दिनों बाद भी अरोपियों को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही युवती बरामद हुई है.
क्या है कपसाड़ का पूरा मामला ?
8 जनवरी को मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में दबंग युवकों (ठाकुर बिरादरी) ने खेत पर मां के साथ काम
करने जा रही युवती रूबी का अपहरण कर लिया, जब उसकी मां सुनीता ने बेटी को बचाने के लिए आई तो उसके सिर पर धारदार हथियार से वारकर घायल कर दिया. उसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी. इस घटना के बाद पूरे गांव में तनाव की स्थिति बन गयी. समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी पार्टियों ने इसे दलितों पर अत्याचार का गंभीर मामला बताया. दलित संगठनों ने भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. बसपा सुप्रीमो मायावती से लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.


