क्या टल जाएगा सीजफायर? पाकिस्तान में वार्ता से पीछे हटा ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर की शर्तों को लेकर मतभेद अब तगड़े रूप से गहरा गए हैं। ईरान का कहना है कि सीज़फायर की शर्तें ईरान और लेबनान दोनों पर लागू थीं,

4pm न्यूज नेटवर्क: दुनिया की सबसे बड़ी खबर इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से नहीं, बल्कि ईरान के तेहरान से आ रही है। जो ट्रंप कल तक दहाड़ रहे थे कि वे ईरान को अपनी मेज़ पर ले आएंगे, आज उनकी साख मिट्टी में मिल गई है। सीज़फायर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए ईरान की टीम पाकिस्तान नहीं पहुँची है।

ईरान के इस एक फैसले ने व्हाइट हाउस में हड़कंप मचा दिया है और डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त बुरी तरह सहमे हुए हैं। आलम ये है कि ट्रंप ने नेतन्याहू को साफ लहजे में ‘सरेंडर’ करने और लेबनान से बातचीत करने का कड़ा आदेश दे दिया है। नेतन्याहू, जो कल तक आग उगल रहे थे, अब गिड़गिड़ाने पर मजबूर हैं। हालांकि, अभी तक सीज़फायर का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है; हाँ, इतना ज़रूर है कि नेतन्याहू ने लेबनान के पीएम को बातचीत का न्यौता दिया है, लेकिन इसके बावजूद ईरान वार्ता के लिए तेहरान से पाकिस्तान नहीं पहुँचा है। क्यों ईरान नेतन्याहू और लेबनान के बीच वार्ता के ऐलान के बाद भी पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं हो रहा है और कैसे इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बुरी तरह फंस गए हैं,

अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर की शर्तों को लेकर मतभेद अब तगड़े रूप से गहरा गए हैं। ईरान का कहना है कि सीज़फायर की शर्तें ईरान और लेबनान दोनों पर लागू थीं, जबकि ट्रंप और व्हाइट हाउस का कल तक यह बयान था कि ऐसा नहीं है। ‘एक्सिओस’ जैसी मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहाँ तक दावा किया गया था कि ट्रंप ने नेतन्याहू को लेबनान में खूनी जंग खेलने की पूरी छूट दी है। इसके बाद मामला और गरमा गया; ईरान ने सीधे तौर पर ट्रंप और अमेरिका पर सीज़फायर की तीन शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया और इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में शामिल होने से साफ़ इंकार कर दिया। कूटनीति के मैदान में ईरान ने वो चाल चली है कि ट्रंप के ‘चाणक्य’ भी फेल हो गए। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वांस इस उम्मीद में पाकिस्तान पहुँचे थे कि वे ईरान के साथ डील फाइनल करके अपनी पीठ थपथपाएंगे, लेकिन ऐन वक्त पर ईरान की टीम ने आने से मना कर दिया।

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की ओर से आई एक खबर में कहा गया था कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं। अब ईरान ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह ‘झूठा’ बताया है और साफ कहा कि उनकी कोई भी टीम पाकिस्तान नहीं गई है। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, एक जानकार सूत्र ने कहा कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ, दोनों ही तेहरान में मौजूद हैं और अपने नियमित कामों में मशरूफ हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही यह खबर कि ईरानी टीम इस्लामाबाद पहुँच गई है, पूरी तरह बेबुनियाद और गलत है।

ईरान ने न सिर्फ प्रतिनिधिमंडल के पहुँचने के दावे को खारिज किया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत मुमकिन नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान में सीज़फायर को मुकम्मल तौर पर लागू नहीं करता और इज़राइल हमले बंद नहीं करता, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी। ईरान की ‘फार्स न्यूज़ एजेंसी’ ने भी यही बात दोहराई है। उसने कहा कि तेहरान का अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने का तब तक कोई इरादा नहीं है, जब तक लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम लागू नहीं हो जाता।

इस बीच ईरान के नेताओं ने अमेरिका और इज़राइल पर दबाव भी बढ़ा दिया है। संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका और इज़राइल के पास अब ज़्यादा वक्त नहीं बचा है। अगर उन्होंने जल्द ही हमले नहीं रोके, तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं। ईरानी अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस तरह की खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं ताकि दुनिया में भ्रम पैदा किया जा सके और ईरान के रुख को कमज़ोर किया जा सके। हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना ज़रूर की है, लेकिन साफ कर दिया है कि किसी भी बातचीत के लिए उसकी शर्तें पूरी होनी लाज़मी हैं। ईरान का कहना है कि वह सिर्फ स्थायी समाधान चाहता है, न कि कोई अस्थायी समझौता। ऐसे में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में सन्नाटा पसरा है और अमेरिकी दूत अब खाली हाथ वापस जाने की तैयारी में हैं। यह ट्रंप की विदेश नीति की अब तक की सबसे शर्मनाक नाकामी मानी जा रही है।

जैसे ही खबर मिली कि ईरान बातचीत के लिए नहीं आ रहा, ट्रंप के होश उड़ गए। ट्रंप जानते हैं कि अगर शुक्रवार की यह बातचीत नाकाम हुई, तो ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को हमेशा के लिए बंद कर देगा। जिस तरह से ईरान ने होर्मुज में माइंस बिछाने का नक्शा जारी किया है, उसे देखकर ट्रंप की खुद ‘हवा’ निकल गई है। ट्रंप अब होर्मुज पर अपने वादे से कहीं न कहीं मुकरते भी दिख रहे हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस से लीक हुई खबरों के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर बुरी तरह लताड़ा है। ट्रंप ने साफ कह दिया है कि इज़राइल को अब हर हाल में झुकना ही होगा। ट्रंप का यह ‘सरेंडर ऑर्डर’ दरअसल उनकी बेचारगी और कमज़ोरी का सबसे बड़ा सबूत है। जो ट्रंप ‘ईरान को मिटाने’ की बात करते थे, आज वे इज़राइल को पीछे हटने के लिए मजबूर कर रहे हैं। नेतन्याहू के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है—या तो वे ट्रंप की बात मानें, या फिर ईरान के कहर का सामना अकेले करें।

हालांकि, ट्रंप के आदेश को नेतन्याहू ने शायद बहुत गंभीरता से नहीं लिया है। हाँ, इतना ज़रूर है कि ट्रंप के भारी दबाव में आकर नेतन्याहू ने लेबनान से ‘वार्ता’ करने की बात तो कुबूल कर ली है, लेकिन अभी तक सीज़फायर का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। यह नेतन्याहू की पुरानी फितरत है—वे दुनिया के सामने शरीफ और अमनपसंद बनना चाहते हैं, लेकिन ज़मीन पर बारूद बरसाना बंद नहीं कर रहे।

लेबनान के प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि हमें सिर्फ बातों की नहीं, बल्कि ठोस अमल की ज़रूरत है। नेतन्याहू का यह ‘आधा-अधूरा’ रुख दरअसल एक नई साज़िश की बू दे रहा है। वे वक्त मांग रहे हैं ताकि अपनी पस्त हो चुकी फौज को दोबारा इकट्ठा कर सकें। लेकिन ईरान और हिज़बुल्लाह इस बार किसी झांसे में आने वाले नहीं हैं। तेहरान ने साफ कह दिया है कि जब तक आखिरी इज़राइली मिसाइल नहीं रुकती, होर्मुज का रास्ता नहीं खुलेगा। लेबनान की हालत इस वक्त निहायत ही खराब हो गई है। 5 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो चुके हैं और वहाँ रोटी के लाले पड़ गए हैं। राहत कैंपों से जो तस्वीरें आ रही हैं, वे गाज़ा की तरह ही दहला देने वाली हैं।

रोटी के लिए लोग लड़ते-झगड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में ईरान पूरी तरह से एक्शन में है। लेबनान में फौरन सीज़फायर कराने के लिए फिलहाल वह वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं पहुँचा है और इससे न सिर्फ अमेरिका घबराया हुआ है, बल्कि ट्रंप भी सहमे हुए हैं कि जो वे सीज़फायर पर ‘प्रेशर’ का ढोल पीट रहे थे, वो पूरी दुनिया के सामने फट गया है। ट्रंप ने सोचा था कि वे पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को डरा देंगे, लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर ने दिखा दिया कि ‘शेर’ को उसकी गुफा में घेरने की कोशिश कितनी भारी पड़ सकती है।

ट्रंप की डिप्लोमेसी (कूटनीति) इस वक्त आईसीयू (ICU) में है। वे न तो इज़राइल को कंट्रोल कर पा रहे हैं और न ही ईरान को मना पा रहे हैं। वाशिंगटन में अब यह चर्चा तेज़ है कि ट्रंप ने बिना किसी ठोस तैयारी के जंग का ऐलान कर दिया और अब उनके पास कोई ‘एग्जिट प्लान’ तक नहीं है, जिससे पूरी दुनिया में अमेरिका की भयंकर किरकिरी हो रही है।  ईरान की टीम का पाकिस्तान न पहुँचना एक बहुत बड़ा कूटनीतिक तमाचा है। ईरान ने दुनिया को बता दिया है कि वह अपनी शर्तों पर सुलह करेगा, ट्रंप की शर्तों पर नहीं। अब सारी गेंद अमेरिका के पाले में है। क्या ट्रंप नेतन्याहू को वाकई हमले रोकने के लिए मजबूर कर पाएंगे? या फिर ये सीज़फायर सिर्फ एक और ‘फेक न्यूज़’ बनकर रह जाएगा? ईरान में अवाम सड़कों पर है और उनके जज़्बे ने अमेरिका के घमंड को चूर-चूर कर दिया है। ट्रंप का सरेंडर दरअसल दुनिया की उन ताकतों की जीत है जो साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ सीना तानकर डटी हुई हैं।

ऐसे में साफ है कि तेहरान से लेकर वाशिंगटन और इस्लामाबाद तक, सियासत इस वक्त पूरे उफान पर है। ट्रंप का झूठ पकड़ा जा चुका है और नेतन्याहू की ज़िद उन्हें ले डूबेगी। ईरान ने बिना एक भी मिसाइल दागे दुनिया को दिखा दिया है कि कूटनीति का असली सुल्तान कौन है।

Related Articles

Back to top button