आंदोलन खत्म, सरकार पर संकट अभी बाकी है!

  • धमेन्द्र प्रधान को माला पहनाने से भड़के विपक्षी सांसद
  • छात्रों पर एफआईआर और हमलों से एक बार फिर माहौल बदल रहा है
  • सीजेपी की चेतावनी इस बार होगी आर-पार की लड़ाई
  • 12 बजे से होनी थी चर्चा पेलेट गन मामले में हंगामा सत्र में विपक्ष का प्रहार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। स्पीकर ओम बिरला के आग्रह पर राहुल गांधी ने अपने आक्रामक तेवरों पर ब्रेक लगाया और चर्चा के लिए राजी हो गये। आज संसद में इस मुद्दे पर नॉन स्टाप मैराथन भाव से चर्चा होगी और बिल का प्रारूप सामने आ जाएगा। लेकिन तमाम घटनाक्रम, सियासी संकेतों के बीच मिल रहे खुफिया इनपुट के आधार पर कहा जा सकता है कि सरकार का राजनीतिक संकट अभी पूरी तरह से टला नहीं है बल्कि इसे टाला गया है। सीजेपी और जेन जी नेताओं के बयान और विपक्षी तेवर किसी और कहानी की तरफ इशारा कर रहे हैं। आज संसद में दोपहर बजे से विधेयक पर चर्चा शुरू होनी थी लेकिन प्रर्दशनकारियों पर पुलिस की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल के विरोध में संसद में इतना हंगामा हुआ कि अध्यक्ष को सत्र दो बजे तक के लिए निलंबित करना पड़ा। अब दो बजे से चर्चा शुरू होगी।

धर्मेंद्र प्रधान भारत की बर्बाद एजुकेशन सिस्टम के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे: राहुल गांधी

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधाते हुए उन्हें भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद एजुकेशन सिस्टम का प्रतीक बताया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पूर्व शिक्षा मंत्री की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद एजुकेशन सिस्टम के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे। उसी सिस्टम ने 26 बच्चों की जान ली और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया। इस्तीफा भी नैतिकता से नहीं युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा। और आज उसी व्यक्ति को संसद में भाजपा माला पहना रही है। यह कोई सम्मान नहीं लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है। देश का हर छात्र ये देख रहा है। और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा। दरअसल पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को संसद पहुंचे थे। संसद परिसर में प्रधान के पहुंचते ही भाजपा और एनडीए सांसदों की भीड़ उनका स्वागत करने पहुंची। भाजपा नेताओं ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया जिसको लेकर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने उन पर हमला बोला है। इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है। खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गई हैं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार करके उन पर एफआईआर की जा रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि कहां गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई एफआईआर नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा? उल्टा उन पर घातक हमले और बर्बरता की जा रही है।उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन चली और बिहार में एके-47। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली हर जगह पैटर्न एक ही है। पहले भी कहा है यह सरकार झूठी है। सुधार इनके बस का नहीं है। अपनी बातों से मुकर जाएगी और हर तरकीब से छात्रों की आवाज दबाएगी। मोदी जी देश के छात्रों से माफी मांगिए। और जिन्होंने छात्रों पर हमला किया है उन्हें कुचला है उन पर कार्रवाई कीजिए छात्रों पर नहीं।

सरकार ने सुधारों का सबसे बड़ा दांव चला

क्या एक मंत्री का इस्तीफा एक नया विधेयक और सुधारों की घोषणाएं किसी राजनीतिक संकट का स्थायी समाधान होती हैं या फिर यह केवल उस अध्याय का विराम होती हैं जिनका अगला पन्ना अभी खुलना बाकी होता है। यह वह सवाल है जो इन दिनों सत्ता के गलियारों से लेकर विश्वविद्यालयों के कैंपस कोचिंग संस्थानों सोशल मीडिया और संसद के गलियारों तक तैर रहा है। सरकार ने संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। परीक्षा प्रणाली में सुधार का रोडमैप सामने रखा गया। पेपर लीक पर सख्ती का विधायी खाका तैयार हुआ। जवाबदेही और पारदर्शिता की भाषा दोहराई गई। सत्ता पक्ष इसे निर्णायक सुधारों की शुरुआत बता रहा है। लेकिन राजनीति केवल फैसलों से नहीं चलती फैसलों की टाइमिंग और जनविश्वास से भी चलती है। यही कारण है कि सवाल अब केवल यह नहीं है कि सरकार ने क्या किया बल्कि यह भी है कि क्या लोगों को यह भरोसा हो गया है कि आगे ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।

सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर उभरे स्वर

दिलचस्प बात यह है कि बहस अब केवल सत्ता और विपक्ष के बीच सीमित नहीं रही। सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे स्वर भी सुनाई दिए हैं जिन्होंने फैसलों की प्रक्रिया और संवाद पर सवाल उठाए हैं। बड़े निर्णयों से पहले संगठन के भीतर अधिक व्यापक संवाद होना चाहिए था। दूसरी ओर सत्ता समर्थक आवाजें यह कह रही हैं कि कठिन परिस्थितियों में सरकार ने जवाबदेही और सुधार—दोनों का रास्ता चुना है। लोकतांत्रिक राजनीति में इस तरह की अलग-अलग राय असामान्य नहीं होतीं, लेकिन वे यह संकेत जरूर देती हैं कि बहस केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। अब निगाहें संसद पर हैं। यदि प्रस्तावित सुधार केवल कठोर दंड तक सीमित रहते हैं तो बहस जारी रहेगी कि क्या समस्या की जड़ तक पहुँचा गया है। यदि परीक्षा प्रणाली, तकनीकी सुरक्षा, भर्ती प्रक्रिया, निगरानी और संस्थागत जवाबदेही में व्यापक बदलाव दिखाई देते हैं, तो सरकार यह दावा कर सकेगी कि उसने संकट को अवसर में बदलने की कोशिश की। लेकिन यदि सुधारों का असर जमीन पर नहीं दिखा, तो यह सवाल बार-बार लौटेगा कि क्या संकट सचमुच टल गया था, या सिर्फ कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। कई बार संकट का असली फैसला संसद नहीं, जनता करती है। कानून व्यवस्था को बदल सकते हैं, लेकिन विश्वास केवल अनुभव से लौटता है। इसलिए आज का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न किसी एक दल, एक नेता या एक मंत्रालय से बड़ा है। देश का युवा यह महसूस करेगा कि उसकी परीक्षा केवल उत्तर पुस्तिका में नहीं, बल्कि व्यवस्था की नीयत में भी निष्पक्ष है?

सीजेपी ने फिर दी आंदोलन की चेतावनी

कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 25 जुलाई को हुए समझौते के तहत किए गए वादों की लिखित कॉपी उपलब्ध नहीं कराती है तो वह देशव्यापी विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करेगी। सीजेपी ने कहा कि इसी समझौते के तहत नीट पेपर लीक के विरोध में उसका 49 दिनों का आंदोलन समाप्त हुआ था। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रें स को संबोधित करते हुए सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों को गिरफ्तार किया जा रहा है वॉलंटियर्स को परेशान किया जा रहा है और नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं जबकि पहले आश्वासन दिया गया था कि सभी मौजूदा एफआईआर वापस ले ली जाएंगी और कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि अगर आज तक लिखित वादे साझा नहीं किए गए तो संगठन को अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा नीट पेपर लीक से संबंधित आत्महत्या पीडि़तों के परिवारों को मुआवजा देने और पार्टी के पांच सूत्री परीक्षा सुधार चार्टर पर विचार करने के कथित वादे को भी दोहराया। इससे पहले दिन में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने के अपने आश्वासन का पूरी तरह उल्लंघन किया है। बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में स्वयंसेवकों को निगरानी और हिरासत का सामना करना पड़ रहा है।

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