जस्टिस नागू ने सुनवाई से बनाई दूरी, यशवंत वर्मा मामले में अब CJI की बारी
पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित कैश बरामदगी मामले में दायर नई याचिका पर सुनवाई से जस्टिस शील नागू ने खुद को अलग कर लिया है. अब मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत के पास भेजा गया है, जो नई बेंच का गठन करेंगे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित कैश बरामदगी मामले में दायर नई याचिका पर सुनवाई से जस्टिस शील नागू ने खुद को अलग कर लिया है. अब मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत के पास भेजा गया है, जो नई बेंच का गठन करेंगे.
कैश बरामदी मामले में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा को लेकर दायर नई याचिका पर जस्टिस शील नागू ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अब मामले को चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत के पास भेजा गया है. जिसके बाद CJI तय करेंगे कि मामले में अब कौन सी नई बेंच सुनवाई करेगी. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर की गई है.
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने पिछले साल मार्च में मामले की जांच के लिए तीन जजों की जांच कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी के अध्यक्ष पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू थे. हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जी एस संधावलिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जज अनु शिवरामन इसके सदस्य थे. वहीं अब जस्टिस शील नागू ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है.
यशवंत वर्मा के आवास से मिला था कैश
पिछले साल (2025) मार्च में होली वाली रात पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के एक स्टोररूम में आग लग गई .आग बुझने के बाद पुलिस और दमकल कर्मियों को वहां भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिनमें से कुछ नोट जल चुके थे. इस विवाद के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया. साथ ही उन्हें न्यायिक कार्य से भी अलग कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा था.
यशवंत वर्मा के आवास से मिला था कैश
पिछले साल (2025) मार्च में होली वाली रात पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के एक स्टोररूम में आग लग गई .आग बुझने के बाद पुलिस और दमकल कर्मियों को वहां भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई, जिनमें से कुछ नोट जल चुके थे. इस विवाद के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया. साथ ही उन्हें न्यायिक कार्य से भी अलग कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा था.



