सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी मोर्चा, लाठीचार्ज मामले में उतरे दिग्गज वकील
सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के इस्तेमाल के मामले में पहले दिन सुनवाई हुई. इस दौरान 10 से ज्यादा वरिष्ठ वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं. सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के इस्तेमाल के मामले में पहले दिन सुनवाई हुई. इस दौरान 10 से ज्यादा वरिष्ठ वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं. सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए.
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के मामले में सुनवाई की. सुनवाई के दौरान सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों की फौज उतर गई. पहले दिन की सुनवाई में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण समेत 10 वरिष्ठ वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं. सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. पहले दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कुछ अंतरिम आदेश पारित किए. इनमें सामान्य प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने और पीसीआर कॉल का ब्योरा (डिटेल) सुरक्षित रखने के निर्देश शामिल हैं.
कौन-कौन वकील पेश हुए?
प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ जो केस दाखिल हुआ है, वो रिट पिटिशन है. इसे वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने पेश किया है. त्रिपाठी की तरफ से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने दलीलें पेश कीं. शंकरनारायण का कहना था कि यह सिर्फ दिल्ली का मामला नहीं है. पूरे देश में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया.
एक अन्य मामले में सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान भी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. दीवान का कहना था कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी. इसके वीडियो भी सामने आए हैं. इस मामले की गंभीरता से जांच जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.
सीनियर एडवोकेट शोएब मल्लिक ने अपनी दलील में कहा- जो लोग प्रदर्शन करने आए थे, वो निहत्थे थे. उनके पास कोई भी हथियार नहीं था. एक भी ऐसा वीडियो नहीं आया है. वरिष्ठ वकील शदान फरासात ने बिहार का मामला उठाया. फरासात ने कहा कि बिहार में 150 नाबालिग बच्चों को हिरासत में रखा गया है. 48 घंटे से बच्चे पुलिस हिरासत में हैं. सरकार ने एफआईआर वापस लेने का फैसला किया है, लेकिन अभी तक बच्चों को छोड़ा नहीं गया है.
फरासात ने आगे कहा कि बिहार सरकार ने छात्रों की तस्वीर अखबारों में छपवाई है. उनमें कुछ छात्र नाबालिग हैं. इसे देखा जाना चाहिए. सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी भी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने इस मामले में 4 दलीलें पेश कीं. इसके बाद खाना खिलाने वाले जुनैद की तरफ से प्रशांत भूषण पेश हुए. भूषण ने कहा कि जुनैद को पुलिस ने प्रताड़ित किया. इसी दौरान प्रशांत भूषण ने पत्थरों से भरे ट्रक का मुद्दा उठाया. एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पुलिस की तैनाती के बावजूद कैसे पत्थर आ गए?
इन वकीलों के अलावा सीनियर एडवोकेटर एन हरिहरन भी कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने के लिए कहा है. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम यह पूरे देश में करने जा रहे हैं. एडवोकेट मैथ्यूज नेदूंपरा ने अनुच्छेद 32 की सीमाओं का जिक्र किया. सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने दलीलें रखीं. मेहता ने कहा कि हमें रिकॉर्ड पर तथ्यों को रखने के लिए कुछ वक्त की जरूरत है. इसके बाद आप जैसा आदेश देंगे, वैसा ही होगा. घायल पुलिसकर्मियों की तरफ से एस पट्टाराजू कोर्ट में पेश हुए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट की 4 बड़ी बातें
1. चीफ जस्टिस ने आदेश में कहा कि उन सभी लोगों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका पूर्व में क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है.
2. कोर्ट ने सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. इसके अलावा राज्यों को भी मामले में पेश होने के लिए कहा है.
3. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया. ऐसे में अत्यधिक बल की जरूरत नहीं थी.
4. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा- प्रदर्शन के दौरान उसमें उपद्रवियों के शामिल होने का खतरा हमेशा से रहता है.



