चरथावल में महंगाई की मार जिंदगी स्लो, महंगाई फास्ट

सुझड़ू गांव के 35 हजार वोटरों ने किया ऐलान - 27 में भाजपा दूर-दूर तक नहीं दिखेगी, मजदूर, किसान, व्यापारी सब परेशान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। चरथावल विधानसभा में इस बार चुनाव विकास पर नहीं, रोजी-रोटी और महंगाई पर लड़ा जा रहा है। महंगाई ने कमर तोड़ दी, धंधा चौपट हो गया।
सुझड़ू बेल्ट में महंगाई, जीएसटी, गन्ना मूल्य और शिक्षा जैसे चार बड़े मुद्दे हावीं हैं। मजदूर की दिहाड़ी 4०० और चीनी 72 रुपये के आंकड़े ने सरकार के दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है।

खर्चा रुपया, आमदनी चवन्नी, बच्चों का पेट काटना पड़ रहा : राजू, फास्ट फूड कारोबारी

फास्ट फूड की रेहड़ी लगाने वाले राजू ने कहा, हमारी जिंदगी में सब स्लो हो गया, महंगाई फास्ट हो गई। 30 रुपये वाला चाऊमीन का पैकेट अब 60 का आता है, वजन उतना ही है। हम आज भी 10 रुपये प्लेट बेच रहे हैं। राजू बोले, सामान महंगा बेचो तो ग्राहक नहीं आता, सस्ता बेचो तो नुकसान। बच्चों के सामान में कटौती करनी पड़ती है। शिक्षा राम भरोसे है, बड़े बजट पास होते हैं, जमीन पर कुछ नहीं। मैं राजपूत हूं, ठाकुर हूं, कहते हैं रामराज्य है, पर लाभ कुछ नहीं। राम मंदिर बना खुशी है, पर गरीब को क्या मिला? ऊपर से चंदे के नाम पर लूट हुई। मजदूर 8 से 6 बजे तक 400 रुपये कमाता है, उसमें आटा-दाल-तेल कैसे आएगा।

जीएसटी आया, धंधा खत्म नाश्ते से चाय गायब : शमशाद

चरथावल के शमशाद त्यागी ने कहा, पहले यहां सरिया-लोहे का कारोबार होता था, रोजी-रोटी अच्छी चलती थी। त्रस्ञ्ज के बाद धंधा एकदम खत्म हो गया। पहले 700 रुपये रोज कमा लेते थे, अब 3०० रुपये बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। 70 रुपये किलो चीनी हो गई है, नाश्ते की प्याली से चाय गायब हो गई। मोदी जी ने कहा था हवाई चप्पल वाला हवाई जहाज में बैठेगा, 15 लाख आएगा, कुछ नहीं हुआ। जो काम था वो भी छिन गया। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि 5-5 जगह चेकिंग लगाकर फर्जी परेशान किया जाता है।

सुझड़ू के लोंागों ने भाजपा को हटाने का मन बना लिया है: पप्पू त्यागी

किसान नेता पप्पू त्यागी ने कहा, इस सरकार ने मजदूर-किसान और छोटे-बड़े व्यापारी सबको बर्बाद कर दिया। ये सुझड़ू गांव है, 50 हजार आबादी, 35 हजार वोटर, लेकिन किसी की जिंदगी नहीं बदली। हमने भाजपा हटाने की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा, गन्ने का मूल्य नहीं मिल रहा, किसान टिंबर-पॉपुलर लगाने को मजबूर है। रूस्क्क की बात करते हैं, देते नहीं। आंदोलन करो तो खालिस्तानी बोलते हैं। अपनी फसल यहां बेचो तो दाम नहीं, हरियाणा जाओ तो बॉर्डर पर रोक देते हैं, मजबूरी में बिचौलियों को बेचना पड़ता है। पप्पू त्यागी ने ऐलान किया, 27 में विधानसभा चुनाव में भाजपा यूपी में दूर-दूर तक नहीं दिखेगी। कोई भी सरकार आए, बस भाजपा नहीं चाहिए।

4०० दिहाड़ी में क्या खिलाऊं, क्या पालूं कई बार भूखे सोना पड़ता है : सलीम

मजदूर सलीम ने कहा, 4०० रुपये दिहाड़ी कमाता हूं, बताइए बच्चे को खिलाऊं या परिवार पालूं। चीनी 72 रुपये किलो है। आटा, तेल, घी सब महंगा। मजदूर को इस सरकार ने खा लिया है। सरकारी स्कूल की हालत सब जानते हैं, प्राइवेट की फीस महंगी, बच्चों को कैसे पढ़ाऊं। महंगाई बढ़ रही, मजदूरी बढ़ नहीं रही, कई बार भूखे सोना पड़ता है।

चरथावल सीट का इतिहास

चरथावल सीट का इतिहास देखें तो यहां कई धार्मिक स्थल हैं। चरथावल में रोहाना मोड़ पर सिद्धपीठ प्राचीन महादेव मंदिर है। बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजी हुकूतम में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। चरथावल में मोहल्ला चौहट्टा में भू-गर्भ से शिवलिग निकला हुआ है। दूरदराज से श्रद्धालु यहां भक्ति भाव से आते हैं। इस क्षेत्र से अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल भी बजा था। आचार्य अभयदेव ने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया था। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। जेल में उन्होंने एक किताब भी लिखी थी। तब जेल में बंदियों से सरकारी दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाया जाता था, लेकिन आचार्य अभयदेव ने यह कहकर इनकार दिया था कि मैं पढ़ा-लिखा हूं अंगूठा नहीं लगाऊंगा। इसे बाद जेल के नियमों में बदलाव हुआ था और पढ़े-लिखे बंदी व कैदी हस्ताक्षर करने लगे थे। ब्रिटिश हुकूमत से देश आजाद होने के बाद इन्होंने 1950 में श्रीअरविद आश्रम निकेतन की स्थापना की थी। यहां पर वह युवाओं समेत नागरिकों को ध्यान व योग की शिक्षा देते थे।

राजनीतिक रसूख

राजनीतिक तौर देखे तो इस विधानसभा सीट के लोगों ने सभी दलों पर विश्वास जताया। यहां से भाजपा, बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वर्ष 2००7 में यह सीट सुरक्षित थी और अनिल कुमार विधायक थे। इसके बाद यह सीट अनारक्षित हो गई। वर्ष 12 में बसपा के नूरसलीम राना ने भाजपा के विजय कश्यप को मात दी। वहीं वर्ष 17 में भाजपा के विजय कश्यप ने सपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी को करीब 22 हजार मतों से हराया था। विजय कश्यप को इसका इनाम मिला और उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। हालांकि एक वर्ष कोरोना से उनका निधन हो गया।

विधानसभा क्षेत्र पर एक नजर

चरथावल विधानसभा क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधानसभा के 4०3 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है । यह मुजफ्फरनगर जिले का हिस्सा है और मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1967 में परिसीमन आदेश (1967) पारित होने के बाद हुआ था। 1967 से 2००8 तक, यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति समुदाय के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित था। 8 में, संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 8 पारित होने के बाद, यह निर्वाचन क्षेत्र सभी उम्मीदवारों के लिए खोल दिया गया। चरथावल विधानसभा क्षेत्र का विस्तार बघरा, चरथावल, कुटेसरा, ढिंढावली, पीसी नारा, जरौदा, बहादरपुर, लछेड़ा, सुजरू, बिहारी, हरसौली, तावली, सिमली, वहलना, निरमाना, कुकरा केसी का बरवाला और मुजफ्फरनगर तहसील का चरथावल एनपी है। चरथावल विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1967 में किया गया था। एमचंद इस विधानसभा क्षेत्र से पहले विधायक रहे।

बख्तियारपुर का नाम नीतीशपुर सुनते ही भडक़ी राजद, बोली-

हिंदुस्तान का नाम मोदी पर रख दें

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। पटना से सटे बख्तियारपुर का नाम बदलेगा या क्या होगा लेकिन चर्चा के बीच सियासत तेज हो गई है। बीते बुधवार को जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने सम्राट चौधरी को सुझाव दिया कि इसका नाम बदलकर नीतीशपुर कर दिया जाए. इस बीच आरजेडी की प्रतिक्रिया आई है। आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, हिंदुस्तान का नाम भी मोदी के नाम पर रख दिया जाए।
देश के प्रधानमंत्री हैं और हिंदुस्तान और भारत का नाम दोनों बदल जाए। कहें मोदी देश है, ये तो गजब बात है। भाई वीरेंद्र ने सवाल उठाया कि कि बख्तियारपुर का नाम नीतीशपुरम और नीतीशपुर क्यों होगा? ये बख्तियारपुर है और बख्तियारपुर ही रहे। इस पर राजनीति न हो, लोग टीटीएम न करें, बिहार की जनता भूखमरी के कगार पर है, बेरोजगार को रोजगार नहीं मिल रहा है उस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। मीडिया के एक सवाल पर कि भाई वीरेंद्र ने संतोष सुमन पर निशाना साधा। कहा कि लोग टीटीएम न करें. बिहार की जनता चाहती है कि जो लोग भूखमरी से परेशान हैं उसको दूर करिए। बेरोजगारों को रोजगार दीजिए, नहीं तो रोड पर जब निकलेंगे तो जो खेल अन्य देशों में शासकों के साथ हुआ है वही यहां भी होगा।

नाम बदलने से बिहार के लोगों का कल्याण नहीं होने वाला : भाई वीरेंद्र

आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा, नाम बदलने से बिहार के लोगों का कल्याण नहीं होने वाला है आप नाम रखना चाहते हैं आपकी सरकार है रख सकते हैं. आप कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन ये जनता बर्दाश्त नहीं करेगी. आने वाले दिनों में जिस तरह से दूसरे देशों में वहां के शासकों की दुर्गति हुई है उसी तरह से यहां के शासकों की भी दुर्गति होने वाली है।

बिहार के हाजीपुर में निर्माणाधीन फोरलेन पुल का स्ट्रक्चर ढहा, 7 मजदूर घायल, रेस्क्यू टीम का इंतजार

हाजीपुर(4पीएम न्यूज़ नेटवर्क)। लालगंज प्रखंड के जलालपुर में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन पुल गिर गया। हादसे में 5 से 7 मजदूर घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वहीं एक मजदूर अब भी लोहे के स्ट्रक्चर में फंसा हुआ है, जिसकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फंसे हुए मजदूर को लोग पानी पिलाकर जीवित रखे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई राहत एवं बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। मौके पर अफरातफरी मची हुई है और हजारों की संख्या में ग्रामीण जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फोरलेन निर्माण कंपनी द्वारा मजदूरों को किसी प्रकार का सेफ्टी टूल उपलब्ध नहीं कराया गया था। हादसे के बाद भी कंपनी द्वारा फंसे मजदूर को निकालने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। घायल मजदूर मुजफ्फरपुर जिला का बताया गया है बाकी किसी भी मजदूर के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दिया गया है। मौके पर हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के द्वारा किसी प्रकार का सेफ्टी टूल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। वहीं जो मजदूर फंसे हुए हैं उन्हें निकालने के लिए भी फोर लेन निर्माण कंपनी के द्वारा कोई उचित कार्य नहीं किया जा रहा है।

अबू सलेम को लगा झटका नहीं होगी जेल से रिहाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। 2००5 में भारत लाए गए सलेम ने रिहाई की मांग की थी। उसका दावा था कि जेल में अच्छे व्यवहार के कारण उसे दो साल नौ महीने से अधिक की छूट मिली है। इस तरह उसने प्रत्यर्पण की शर्तों के मुताबिक भारत में 25 साल की जेल पूरी कर ली है।
257 लोगों की मौत वाले 1993 के मुंबई बम धमाका मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर का कहना था कि उसे 11 नवंबर 2००5 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जाएगी। 22 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि वह 25 साल की सज़ा पूरी करने के बाद रिहाई की मांग कर सकता है। सलेम के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा का कहना था कि जेल में अच्छे आचरण के लिए मिली छूट और मुकदमे के दौरान जेल में बिताई अवधि को जोडऩे पर उसकी 25 साल की सज़ा पूरी हो चुकी है। मल्होत्रा ने यह भी कहा कि अब उसे जेल में रखना गैरकानूनी हिरासत के बराबर है। यह उसके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इन दलीलों को ठुकरा दिया है। जजों ने कहा है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से की गई गणना के मुताबिक सलेम की सज़ा अभी पूरी नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट मामले में दखल नहीं देगा। इससे पहले भी सलेम अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर अपनी रिहाई की कोशिश करता रहा है। इसी साल 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक याचिका को सुनने से मना करते हुए कहा था कि नासिक जेल से मिले दस्तावेज को हिसाब से हाई कोर्ट मामला सुनेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा कें द्र से जवाब, भेजा नोटिस

भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं चला पाएंगे इंस्टा-फेसबुक?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षा उपायों की भी मांग की गई है, जिसमें माता-पिता या लीगल गार्जियन की सहमति जरूरी होनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि मेटा और दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों के अकाउंट बनाने की आयुसीमा 13 साल तय की है, जो अमेरिकी कानून के मुताबिक है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की फाइल की गई याचिका में कहा गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट (इंडिया) जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की इजाजत देते हैं, जबकि भारतीय कानून 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग मानता है। याचिका में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 21 में बदलाव करने या खास गाइडलाइंस बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है. जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ सोशल मीडिया कॉन्ट्रैक्ट न कर सके, या ये कॉन्टेक्ट माता-पिता या अभिभावक के वेरिफिकेशन व ई केवाईसी के अधीन होनी चाहिए।

बच्चों को सीधे एक्सेस देने पर सवाल

याचिका में ये भी मांग की गई है कि ऐसी गाइडलाइंस बनाई जाएं जो ये जरूरी करें कि जहां भी किसी नाबालिग को डिजिटल प्लेटफॉर्म एक्सेस करने या इस्तेमाल करने की इजाजत हो, तो ऐसा एक्सेस कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त तरीके से हो, जिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक शामिल हों. इसमें भी माता-पिता या अभिभावक का वेरिफिकेशन/ई केवाईसी शाामिल हो, जो सर्विस के नेचर और रिस्क के हिसाब से हो।

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