महाशिवरात्रि के मौके पर ताजमहल में भगवान शिव का अभिषेक
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एक तरफ जहां प्रदेश में अपने फायदे के लिए हिंदू-मुस्लिम किया जा रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ मंदिर-मस्जिद में भी फर्क बताया जा रहा है। लेकिन इन सबके बीच अभी कुछ दिनों पहले संभल में मस्जिद को लेकर हुई हिंसा तो सभी को याद ही होगी। सरकार को उससे सबक लेना चाहिए और ऐसे गतिविधियों पर रोक लगाई चाहिए। लेकिन ऐसा है नहीं सबक लेने के बजाय इन चीजों को और बढ़ावा दिया जा रहा है। खैर अब आलम ये है कि ये धार्मिक आंच मंदिर-मस्जिद तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये आग की लपक आगरा स्थित ताज महल तक जा पहुंची है। ताजमहल या ताजोमाहल का मामला भले ही अभी कोर्ट में हो लेकिन लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे कई मौके आये हैं जब ताजमहल पर लोगों ने जल चढाने की कोशिश की है और उपद्रव किया है।
खैर एक तरफ जहां आज भगवान शिव को लोग जल चढ़ा रहे हैं। अपने मन में उनके प्रति आस्था और श्रद्धा लिए हुए मंदिरों में लगी हुई उनकी प्रतिमानों पर जल चढ़ा कर पूजा अर्चना कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच ताज नगरी आगरा से एक बार फिर ऐसी खबर आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है और चर्चा में बनी हुई है। दरअसल महाशिवरात्रि के अवसर पर आगरा के ताजमहल में अखिल भारत हिन्दू महासभा की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने भगवान शिव का अभिषेक किया। इतना ही नहीं स्मारक के अंदर शिवलिंग पर वह पानी चढ़ाते हुए और पूजा करते हुए भी नजर आईं। इस घटना के सामने आने के बाद न सिर्फ स्मारक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बल्कि प्रदेश की योगी सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने संगम प्रयागराज से गंगाजल लाकर ताजमहल को पवित्र करने के बाद शिवलिंग की स्थापना करने के बाद जलाभिषेक किया। बता दें कि हिंदू महासभा के कार्यकर्ता प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने गए थे। वहां ताजमहल में महाशिवरात्रि पर शिवलिंग स्थापित करने का संकल्प लिया था। ताजमहल को गंगाजल से पवित्र करने के बाद शिवलिंग स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक कराया गया। जिसका वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल है वायरल वीडियो में मीरा राठौर नमक महिला नजर आ रही है। इसके बाद महिला अंदर गई और उसने अंदर बाकायदा शिवलिंग पर जल चढ़ाया। अब वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
खैर आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब ताजमहल पर ऐसी घटाने हुई हैं। इससे पहले ताजमहल पर तिरंगा फहराने का मामला सामने आया था। लेकिन उससे भी पहले हिंदूवादी संगठन के दो युवकों ने गंगा जल चढ़ाया था। हिंदूवादी युवक पानी की बोतल में गंगाजल भरकर ले कर गए थे और ताजमहल के अंदर जाकर गंगाजल चढ़ाया. ताजमहल के अंदर पहुंचे दोनो युवकों ने बोतल में भरा हुआ गंगाजल पहले दिखाते हुए चले फिर ताजमहल के अंदर जाकर गंगाजल चढ़ाया. जिसका वीडियो उस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से दावा किया गया था कि दोनों युवकों ने तेजो महालय में गंगाजल चढ़ाया है, एक लीटर की बोतल में गंगाजल लेकर आए और ताजमहल में चढ़ाया गया क्योंकि ये तेजोमहालय शिव मंदिर है.
वहीं आपको बता दें कि ताजमहल या ताजोमहल का मामला कोर्ट में चल रहा है और ताजमहल को तेजोमहालय साबित करने के लिए अब तक हिंदू पक्ष कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत कर रहा था, लेकिन इस इस मामले में मुस्लिम पक्ष सामने खड़ा हो गया है। मुस्लिम पक्ष ने पक्षकार बनाने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। साथ ही, ताजमहल को मकबरा साबित करने के साक्ष्य भी पेश किए हैं। इस मामले में जब 20 जनवरी को जब आगरा की दीवानी स्थित लघुवाद न्यायालय के न्यायाधीश मृत्युंजय श्रीवास्तव की अदालत में ताजमहल या तेजोमहालय केस की सुनवाई हुई. तो सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता और एएसआई के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग रखी. अदालत ने अब 6 मार्च को अगली सुनवाई की तारीख नियत की है.
बता दें, योगी यूथ बिग्रेड अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने 23 जुलाई 2024 को अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के जरिए सावन माह में ताजमहल या तेजोमहालय में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की मांग की थी. इसके बाद से ही इस मामले में लगातार सुनवाई चल रही है. इस मामले में अब तक यूनियन ऑफ इंडिया के जरिए सचिव सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार को पक्षकार बनाया जा चुका है. साथ ही मुस्लिम पक्ष से सैय्यद इब्राहिम हुैसन जैदी ने कोर्ट में खुद को वादी बनाए जाने का प्रार्थना पत्र दिया है. जिसमें वादी पक्ष, प्रतिवादी एएसआई और भारत संघ मिले होने का आरोप लगाया गया है.
गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट में अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी। लेकिन आज की ताजा घटना ने इस मामले को और भी ऊपर उठा दिया है। अब जाहिर है कि इस घटना के सामने आने के बाद न केवल अखिल भारत हिन्दू महासभा की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि ये सवाल सरकार पर भी उठाए जा रहे हैं की आखिर अब तक ऐसी गतिविधियां होती रहेंगी और सरकार खामोश बैठी रहेगी।