सरदार पटेल के नाम पर सियासत? कांग्रेस का BJP पर बड़ा आरोप, एकता परेड पर सवाल

कांग्रेस ने सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर सियासत करने का आरोप लगाते हुए BJP को घेरा है... पार्टी का कहना है कि सरदार पटेल गुजरात...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र की बीजेपी सरकार पर सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत को गलत तरीके से इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है.. पार्टी का कहना है कि गुजरात में सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाने के लिए आयोजित होने वाली एकता परेड की तैयारी में बड़ी अनियमितताएं हैं.. गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को विस्तार से बताया.. और उन्होंने कहा कि अमित शाह के नेतृत्व वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया है.. जिसमें परेड के लिए झांकियां बनाने का काम सिर्फ पांच चुनिंदा फर्मों तक सीमित कर दिया गया है.. गोहिल ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए.. और कहा कि कोई स्पष्ट मानदंड नहीं बताए गए हैं..

वहीं यह आरोप ऐसे समय में आए हैं.. जब देश सरदार पटेल की 150वीं जयंती की तैयारियों में जुटा है.. सरदार पटेल जिन्हें ‘भारत के लौह पुरुष’ कहा जाता है.. जिनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था.. उनकी जयंती हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है.. इस साल की जयंती खास है.. क्योंकि यह 150वीं वर्षगांठ है.. गुजरात के केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर एकता परेड का आयोजन किया जा रहा है.. जो गृह मंत्रालय और गुजरात सरकार के सहयोग से होता है.. इस परेड में पैरामिलिट्री फोर्सेज, पुलिस की टुकड़ियां, देश भर के सांस्कृतिक समूहों के प्रदर्शन.. और कभी-कभी हवाई शो शामिल होते हैं.. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस परेड को हरी झंडी दिखाई थी.. और सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की थीं..

जिसको लेकर कांग्रेस का मुख्य आरोप यह है कि बीजेपी सरदार पटेल की विरासत को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है.. गोहिल ने कहा कि सरदार पटेल गुजरात कांग्रेस कमिटी के पहले अध्यक्ष थे.. और 25 साल तक इस पद पर रहे.. लेकिन अब बीजेपी उनके नाम पर ही भ्रष्टाचार कर रही है.. उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी किया.. जिसमें एकता परेड के लिए झांकियां बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ पांच फर्मों को दी गई है.. बता दें इन फर्मों के एम/एस लाइव पिक्सल टेक्नोलॉजी, एम/एस सिद्धेश्वर कनुगा, एम/एस विशा कनुगा, एम/एस सुशांत खेड़कर और एम/एस स्मार्ट ग्राफ आर्ट एडवरटाइजिंग नाम हैं.. गोहिल ने सवाल किया कि इन फर्मों का चयन कैसे हुआ.. कोई टेंडर नहीं निकाला गया.. कोई बोली नहीं लगाई गई.. कारण बताया गया कि समय की कमी है.. लेकिन तैयारी तो महीनों पहले से हो रही थी..

गोहिल ने आगे खुलासा किया कि इन पांच फर्मों में से दो फर्में एक ही परिवार की हैं.. एम/एस सिद्धेश्वर कनुगा और एम/एस विशा कनुगा को सिद्धेश्वर कनुगा.. और उनकी पत्नी विशा कनुगा चलाते हैं.. इससे पक्षपात की आशंका बढ़ गई है.. कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर थोड़ी सी जांच की जाए तो यह साफ हो जाता है कि यह चयन पारदर्शी नहीं है.. और उन्होंने पूछा कि पति-पत्नी की जोड़ी को क्यों शामिल किया गया.. क्या यह परिवारवाद का उदाहरण नहीं है.. जबकि देश में हजारों प्रोफेशनल झांकी डिजाइनर उपलब्ध हैं.. जिन्हें अनदेखा कर दिया गया..

एक और बड़ा मुद्दा पंकज मोदी का है.. गोहिल ने बताया कि 29 अक्टूबर को जारी एक अन्य कम्युनिकेशन में कहा गया है कि.. सभी झांकियों की अंतिम मंजूरी सिर्फ पंकज मोदी ही देंगे.. पंकज मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई हैं.. वे गुजरात सरकार के सूचना विभाग से रिटायर्ड क्लास वन अधिकारी हैं.. और उन्होंने 1981 में क्लास थ्री कर्मचारी के रूप में सरकारी नौकरी शुरू की थी.. और धीरे-धीरे प्रमोशन पाकर क्लास वन तक पहुंचे.. लेकिन गोहिल ने सवाल उठाया कि झांकी डिजाइन या मूल्यांकन में उनकी कोई प्रोफेशनल बैकग्राउंड या मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता नहीं है.. फिर उन्हें यह जिम्मेदारी क्यों दी गई.. क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि वे प्रधानमंत्री के परिवार से हैं.. गोहिल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी वजह के उन्हें फाइनल अथॉरिटी बना दिया.. और सरकारी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जैसे कार, ऑफिस आदि..

कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि विपक्ष एकता परेड पर सवाल नहीं उठा रहा है.. परेड एक अच्छा आयोजन है जो राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है.. लेकिन जिस तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं, उस पर सवाल हैं.. और उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जाने-माने प्रोफेशनल्स को किनारे करके बंद दरवाजों के पीछे चयन प्रक्रिया चला रही है.. इससे एक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम को पार्टी का कार्यक्रम बना दिया जा रहा है.. गोहिल ने सरकार से कई सवाल पूछे: सिर्फ पांच फर्मों को किस आधार पर चुना गया.. पहले से तैयारी होने के बावजूद समय की कमी का क्या कारण है.. पैनल में पति-पत्नी की जोड़ी क्यों शामिल की गई.. और जब देश में कई विशेषज्ञ उपलब्ध हैं.. तो एक रिटायर्ड अधिकारी को.. जिसके पास कोई डोमेन एक्सपर्टाइज नहीं है.. फाइनल अथॉरिटी क्यों बनाया गया..

 

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